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Magh Purnima 2026: माघ पूर्णिमा के दिन करें अष्टलक्ष्मी स्तोत्र का पाठ, जल्द होंगी सभी मुरादें पूरी

Published: Tue, 27 Jan 2026 07:00 PM (IST)

माघ माह में माघ पूर्णिमा (Magh Purnima 2026) का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी ...और पढ़ें

कैसे करें मां लक्ष्मी को प्रसन्न? (Image Source: AI-Generated)

कैसे करें मां लक्ष्मी को प्रसन्न? (Image Source: AI-Generated) 

HighLights

  1. माघ पूर्णिमा को शुभ माना जाता है

  2. इस दिन पवित्र नदी में स्नान जरूर करना चाहिए 

  3. इससे सभी पापों का नाश होता है 

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार माघ पूर्णिमा 01 फरवरी (Magh Purnima 2026 Date) को मनाई जाएगी। इस तिथि को श्रीहरि और मां लक्ष्मी की साधना के लिए शुभ माना जाता है। इस अवसर पर गुड़, कंबल, ऊनी वस्त्र, घी, फल और अन्न समेत आदि चीजों का दान मंदिर या गरीब लोगों में करना चाहिए।

ऐसा माना जाता है कि पूर्णिमा के दिन दान करने से अन्न-धन की कमी नहीं होती है और शुभ फल की प्राप्ति होती है। साथ ही भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है। अगर आप भी मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो माघ पूर्णिमा के दिन अष्टलक्ष्मी स्तोत्र (Ashtalakshmi Stotram Lyrics) का पाठ जरूर करें। इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होकर साधक की सभी मुरादें पूरी करती हैं और आर्थिक तंगी दूर होती है।

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॥ अष्टलक्ष्मी स्तोत्र॥

॥ आदिलक्ष्मि ॥

सुमनस वन्दित सुन्दरि माधवि,चन्द्र सहोदरि हेममये

मुनिगणमण्डित मोक्षप्रदायनि,मञ्जुळभाषिणि वेदनुते।

पङ्कजवासिनि देवसुपूजित,सद्गुण वर्षिणि शान्तियुते

जय जय हे मधुसूदन कामिनि,आदिलक्ष्मि सदा पालय माम्॥1॥

॥ धान्यलक्ष्मि ॥

अहिकलि कल्मषनाशिनि कामिनि,वैदिकरूपिणि वेदमये

क्षीरसमुद्भव मङ्गलरूपिणि,मन्त्रनिवासिनि मन्त्रनुते।

मङ्गलदायिनि अम्बुजवासिनि,देवगणाश्रित पादयुते

जय जय हे मधुसूदन कामिनि,धान्यलक्ष्मि सदा पालय माम्॥2॥

॥ धैर्यलक्ष्मि ॥

जयवरवर्णिनि वैष्णवि भार्गवि,मन्त्रस्वरूपिणि मन्त्रमये

सुरगणपूजित शीघ्रफलप्रद,ज्ञानविकासिनि शास्त्रनुते।

भवभयहारिणि पापविमोचनि,साधुजनाश्रित पादयुते

जय जय हे मधुसूधन कामिनि,धैर्यलक्ष्मी सदा पालय माम्॥3॥

॥ गजलक्ष्मि ॥

जय जय दुर्गतिनाशिनि कामिनि,सर्वफलप्रद शास्त्रमये

रधगज तुरगपदाति समावृत,परिजनमण्डित लोकनुते।

हरिहर ब्रह्म सुपूजित सेवित,तापनिवारिणि पादयुते

जय जय हे मधुसूदन कामिनि,गजलक्ष्मी रूपेण पालय माम्॥4॥

॥ सन्तानलक्ष्मि ॥

अहिखग वाहिनि मोहिनि चक्रिणि,रागविवर्धिनि ज्ञानमये

गुणगणवारिधि लोकहितैषिणि,स्वरसप्त भूषित गाननुते।

सकल सुरासुर देवमुनीश्वर,मानववन्दित पादयुते

जय जय हे मधुसूदन कामिनि,सन्तानलक्ष्मी त्वं पालय माम्॥5॥

॥ विजयलक्ष्मि ॥

जय कमलासनि सद्गतिदायिनि,ज्ञानविकासिनि गानमये

अनुदिनमर्चित कुङ्कुमधूसर,भूषित वासित वाद्यनुते।

कनकधरास्तुति वैभव वन्दित,शङ्कर देशिक मान्य पदे

जय जय हे मधुसूदन कामिनि,विजयलक्ष्मी सदा पालय माम्॥6॥

॥ विद्यालक्ष्मि ॥

प्रणत सुरेश्वरि भारति भार्गवि,शोकविनाशिनि रत्नमये

मणिमयभूषित कर्णविभूषण,शान्तिसमावृत हास्यमुखे।

नवनिधिदायिनि कलिमलहारिणि,कामित फलप्रद हस्तयुते

जय जय हे मधुसूदन कामिनि,विद्यालक्ष्मी सदा पालय माम्॥7॥

॥ धनलक्ष्मि ॥

धिमिधिमि धिंधिमि धिंधिमि-धिंधिमि,दुन्दुभि नाद सुपूर्णमये

घुमघुम घुङ्घुम घुङ्घुम घुङ्घुम,शङ्खनिनाद सुवाद्यनुते।

वेदपूराणेतिहास सुपूजित,वैदिकमार्ग प्रदर्शयुते

जय जय हे मधुसूदन कामिनि,धनलक्ष्मि रूपेणा पालय माम्॥8॥

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।