श्री कृष्‍ण की पूजा

सावन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी कहा जाता है। इस दिन व्रत उपवास करके भगवान श्रीकृष्ण का पूजन किया जाता है। इस दिन प्रात: काल उठ कर भगवान श्री कृष्‍ण को जल चढ़ायें और उन्‍हें तुलसी दल और उसकी मंजरी अर्पित करें। भगवान के सामने घी के दीपक प्रज्वलित करें। भगवान को पंचामृत से स्‍नान करायें और धूप, दीप, चंदन आदि सुगंधित पदार्थों से उनकी आरती उतारें। कामिका एकादशी के दिन पूजा के बाद इसकी कथा का श्रवण करें और पूरे दिन फलाहार करके व्रत करें। इस वर्ष कामिका एकादशी 7 अगस्त 2018 को पड़ रही है। 

कामिका एकादशी का मुहूर्त 

वैसे तो दशमी के दिन से ही सूर्यास्त के पहले भोजन करने के बाद कुछ भी नहीं खाना चाहिए और कामिका एकादशी के व्रत का संकल्‍प मन में ले  लेना चाहिए। अगले दिन प्रात: काल उठकर भगवान की पूजा करनी चाहिए और व्रत का करते हुए एकादशी की रात को जागरण करना चाहिए। एकादशी के दिन जागरण करना भी व्रत का ही एक अंग माना जाता है। इस बार व्रत शुभ मुहूर्त 7 अगस्‍त को सुबह 7:52 बजे शुरू होगा और 8 अगस्त को प्रात 05:15 बजे पर समाप्‍त होगा। अत: व्रती इसका पारण अगले दिन 8 तारीख को सुबह से लेकर 04.23 तक कर सकते हैं। 

व्रत कथा 

पौरणिक कथाओं के अनुसार एक बार युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से पूछा कि हे प्रभु श्रावण के कृष्ण पक्ष में कामिका एकादशी अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण मानी जाती है ऐसा क्‍यों, इसकी कथा का वर्णन करने की कृपा करें। तब श्री कृष्ण ने उन्‍हें ये कथा सुनाई। एक नगर में एक श्रेष्‍ठ ठाकुर और एक ब्राह्मण रहते थे। दोनों की एक दूसरे से बनती नहीं थी। आपसी झगड़े के कारण ठाकुर ने ब्राह्मण को मार डाला। बाद में जब उसने ब्राह्मण की तेरहवीं करनी चाही तो नाराज ब्राह्मणों ने उसके घर खाना खाने से मना कर दिया और ठाकुर अकेला पड़ गया। उसके मन में अपने कृत्‍य के लिए ग्‍लानि भी पैदा हुई और वह खुद को दोषी मानने लगा। तब उसने एक साधु से अपने पापों का निवारण करने का तरीका पूछा, तब साधु ने उसे कमिका एकदशी का उपवास करने के लिए कहा। उसकी सलाह पर ठाकुर ने व्रत करना शुरू कर दिया। एक बार कामिका एकादशी के दिन जब वह भगवान की मूर्ति के निकट सो रहा था तो उसने एक स्‍वप्‍न देखा। भगवान ने उसे सपने में कहा कि ठाकुर तुम्‍हारे सभी पाप दूर हो गए हैं और अब तुम ब्राह्मण हत्‍या के अपराध से मुक्त हो गए हो।  तभी से कामिका एकादशी को महत्वपूर्ण माना जाता है। ये पाप को नष्‍ट करके चेतना से सभी नकारात्मकता को नष्ट कर देता है।  इसीलिए आज तक श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी का व्रत किया जाता है।

Posted By: Molly Seth