व‍िसर्जन भी व‍िधि‍वत होता

गणेश महोत्‍सव की शुरुआत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से होती है और यह अंनत चतुर्दशी तक चलती है। इस दौरान कुछ लोग डेढ द‍िन, 3 द‍ि‍न, 5 द‍िन 7 द‍िन, 9 द‍िन व 11 द‍िन के ल‍िए गणेश प्रत‍िमा की स्‍थापना करते हैं। ज‍िससे इन द‍िनों गणेश व‍िसर्जन का स‍िलस‍िला भी जारी है। खास बात तो यह है क‍ि जि‍स तरह से स्‍थापना व‍िध‍िवत होती है उसी तरह व‍िसर्जन भी व‍िधि‍वत होता है। 


इस तरह से करें पूजा पाठ

व‍िसर्जन वाले द‍िन स्‍थाप‍ित गणेश जी की प्रत‍िमा को एक नई चौकी पर ही बैठाएं। इसके बाद उनकी व‍िध‍िवत जल, सुपारी, पान, जनेऊ, दूर्वा, नारियल, लाल चंदन, धूप और अगरबत्ती से पूजा करें अर्चना करें। इतना ही नहीं मोदक का भोग लगाकर गणपत‍ि की लौंग, कपूर और बाती से आरती करें। इसके बाद उनके हाथ जोड़े और भजन, कीर्तन गाते हुए व‍िजर्सन के ल‍िए प्रस्‍थान कराएं। 


गलती से भी न करें ये काम

गणेश जी के व‍िसर्जन में पूजा के साथ कुछ और खास बातों का ध्‍यान रखना जरूरी होता है। गणेश जी को हंसी खुशी व‍िदाई दें। इस दौरान काले कपड़े पहन कर न जाएं। क‍िसी खास तरह के नशे आद‍ि का सेवन न करें। व‍िसर्जन के दौरान क्रोध आद‍ि करने से बचें। इतना ही नहीं अपनी वाणी पर पूर्ण नियंत्रण बनाए रखें। मान्‍यता है क‍ि जो लोग ऐसी हरकते करते हैं उनसे भगवान गजानन अप्रसन्‍न हो जाते हैं।

 

कहनी जरूरी होती यह बात

आदिपूज्य भगवान लंबोदर, व्रकतुंड, विघ्नहर्ता, मंगलमूर्ति जैसे नामों से पुकारे जाने वाले गणेश जी से व‍िसर्जन के 'गणपति बप्पा मोरया अगले बरस तू जल्दी आ' जरूर कहें। शास्‍त्रों के मुताब‍िक को क‍िसी भी व‍िदाई देते समय उसको दोबारा आने को कहना जरूरी होता है। इससे गणपत‍ि अपने भक्‍तों से प्रसन्‍न होते हैं। अनजाने में हुई गल्‍त‍ियों के साथ ही उनकी उनकी हर मनोकामना पूरी करते है। 

 

Posted By: shweta.mishra