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जन्‍माष्‍टमी पर लड्डूगोपाल का अभिषेक होने के बाद बने पंचामृत का क्‍या करें?

Published: Fri, 04 Sep 2026 10:56 AM (IST)

जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल के अभिषेक के बाद पंचामृत का क्या करें, यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। इसे प्रसाद के ...और पढ़ें

पंचामृत से जुड़े विशेष नियम (Picture Credits- AI Images)

पंचामृत से जुड़े विशेष नियम (Picture Credits- AI Images)

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर जन्माष्टमी का पर्व बड़ी ही भव्यता के साथ मनाया जाता है। इस साल यह त्योहार 4 सितंबर 2026, शुक्रवार के दिन है। इस दिन अधिकतर घरों में लड्डू गोपाल की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने के साथ उन्हें तरह-तरह के भोग अर्पित किए जाते हैं।

माना जाता है कि बाल कृष्ण की पूजा और सेवा करने से घर में शांति बनी रहती है। जन्माष्टमी के मौके पर पंचामृत का विशेष महत्व है। भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल का पंचामृत से स्नान कराने के बाद पंचामृत का क्या करना चाहिए?

जन्माष्टमी पर पंचामृत का महत्व

जन्माष्टमी के मौके पर भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल को पंचामृत से स्नान कराया जाता है। इसे बनाने के लिए दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का इस्तेमाल होता है। पंचामृत से स्नान कराने के बाद फिर साफ पानी से प्रभु को नहलाया जाता है।

इसके बाद पानी को घर के अलग-अलग हिस्सों में छींटने के साथ पंचामृत का प्रसाद के स्वरूप में सबको दिया जाता है।

janmashtami panchamrit rules significance and usage after laddu gopal abhishek (1)

चरणामृत का इस्तेमाल और नियम

लडडू गोपाल का अभिषेक करने के बाद इस पवित्र मिश्रण को सभी घर वालों में श्रद्धापूर्वक वितरण करना चाहिए।

इसके अलावा पंचामृत में तुलसी का पत्ता जरूर डाले। मान्यताओं के मुताबिक तुलसी के बिना प्रभु किसी भी भोग को स्वीकार नहीं करते हैं।

पंचामृत का भूलकर भी अपमान नहीं करना चाहिए। यदि यह अधिक मात्रा में हो, तो इसे किसी पेड़ की जड़ में अर्पित कर दें जहां किसी का पैर इसपर न लगें।

लड्डू गोपाल का श्रृंगार करने के बाद उन्हें पालकी पर विराजमान किया जाता है। इसके बाद देसी घी का दीपक जलाकर सच्चे मन से उनकी आरती की जाती है। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण के मंत्रों का उच्चारण करने के साथ उन्हें भोग में माखन-मिश्री और दूध अर्पित किया जाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।