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Gupt Navratri 2026: घटस्थापना के समय करें इन दिव्य मंत्रों का जप, खुशियों से भर जाएगा घर-संसार

Published: Sun, 18 Jan 2026 10:00 PM (IST)

माघ गुप्त नवरात्र 19 से 27 जनवरी 2026 तक मनाई जाएगी। इस दौरान दस महाविद्याओं की भक्तिभाव से पूजा की ...और पढ़ें

गुप्त नवरात्र के दौरान क्या करें और क्या न करें?

गुप्त नवरात्र के दौरान क्या करें और क्या न करें?

HighLights

  1. सनातन धर्म में नवरात्र पर्व का खास महत्व है।

  2. यह पर्व देवी मां दुर्गा को समर्पित माना जाता है।

  3. मां दुर्गा की पूजा करने से दुखों का नाश होता है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। गुप्त नवरात्र का त्योहार माघ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तिथि तक मनाया जाता है। इस साल 19 जनवरी से लेकर 27 जनवरी तक गुप्त नवरात्र का त्योहार (Magh Gupt Navratri 2026) मनाया जाएगा। इस दौरान दस महाविद्याओं की देवी की भक्ति भाव से पूजा की जाएगी। साथ ही मनचाही मुराद पाने के लिए व्रत रखा जाएगा।

devi maa durga

धार्मिक मत है कि गुप्त नवरात्र के दौरान दस महाविद्याओं की देवी की पूजा और भक्ति करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। साथ ही घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है। इसके लिए साधक गुप्त नवरात्र के दौरान देवी मां दुर्गा और उनके नौ रूपों की पूजा की जाती है। अगर आप भी दस महाविद्याओं की देवी की कृपा पाना चाहते हैं, तो पूजा के समय इन मंत्रों का जप (Ghatasthapana Shubh Muhurat) करें।

मां दुर्गा के मंत्र (Durga Mantra for Success)

1. या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

2. पाप नाशक मंत्र

हिनस्ति दैत्येजंसि स्वनेनापूर्य या जगत् ।
सा घण्टा पातु नो देवि पापेभ्यो नः सुतानिव ॥

3. संकट से मुक्ति के लिए मंत्र

शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे ।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमो स्तुते ॥

4. रोग रक्षा मंत्र

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभिष्टान् ।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्माश्रयतां प्रयान्ति ॥

5. पुत्र प्राप्ति मंत्र

देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥

6. दुख नाशक मंत्र

जयन्ती मड्गला काली भद्रकाली कपालिनी ।
दुर्गा क्षमा शिवाधात्री स्वाहा स्वधा नमो स्तुते ॥


7. शक्ति प्राप्ति के लिए मंत्र

सृष्टि स्तिथि विनाशानां शक्तिभूते सनातनि ।
गुणाश्रेय गुणमये नारायणि नमो स्तुते ॥

8. धन प्राप्ति के लिए मंत्र

“दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो:
स्वस्थै: स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दारिद्र्यदु:खभयहारिणि का त्वदन्या
सर्वोपकारकरणाय सदाऽऽ‌र्द्रचित्ता॥”

9. सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।

10. पठित्वा पाठयित्वा च नरो मुच्येत सङ्कटात् ॥
उमा देवी शिरः पातु ललाटं शूलधारिणी ।
चक्षुषी खेचरी पातु वदनं सर्वधारिणी ॥
जिह्वां च चण्डिका देवी ग्रीवां सौभद्रिका तथा ।
अशोकवासिनी चेतो द्वौ बाहू वज्रधारिणी ॥
हृदयं ललिता देवी उदरं सिंहवाहिनी ।
कटिं भगवती देवी द्वावूरू विन्ध्यवासिनी ॥
महाबाला च जङ्घे द्वे पादौ भूतलवासिनी
एवं स्थिताऽसि देवि त्वं त्रैलोक्यरक्षणात्मिके ।
रक्ष मां सर्वगात्रेषु दुर्गे दॆवि नमोऽस्तु ते ॥

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