हिंदु वर्ष की पहली पूर्णिमा

चैत्र मास में आने वाली पूर्णिमा को चैत्र पूर्णिमा कहा जाता है। इसका एक नाम चैती पूनम भी बताया जाता है। चैत्र मास हिन्दू वर्ष का प्रथम माह होता है इसलिए चैत्र पूर्णिमा के भी साल की पहली पूर्णिमा होने के कारण विशेष महत्व माना गया है। इस दिन भक्त भगवान सत्य नारायण की पूजा कर उनकी कृपा पाने के लिये उपवास रखते हैं। चैत्र पूर्णिमा पर रात्रि के समय चंद्रमा की पूजा की जाती है। उत्तर भारत में चैत्र पूर्णिमा के दिन ही हनुमान जयंती भी मनाई जाती है। इस दिन पवित्र नदीयों, तीर्थत्थलों, सरोवर और पवित्र जलकुंड में स्नान करने और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।

व्रत और पूजा विधि

चैत्र पूर्णिमा पर स्नान, दान, हवन, व्रत और जप किये जाते हैं। इस दिन भगवान सत्य नारायण का पूजन की जाती है और गरीब व्यक्तियों को दान देना चाहिए। चैत्र पूर्णिमा व्रत की पूजा विधि इस प्रकार है, प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी, जलाशय, कुआं या बावड़ी में स्नान करें। इसके बाद सूर्य मंत्र का उच्चारण करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दें। अब व्रत का संकल्प लेकर भगवान सत्य नारायण की पूजा करें। चैत्र पूर्णिमा की रात्रि में विधि पूर्वक चंद्रमा की पूजा करके उन्हें जल अर्पण करें। पूजा के बाद कच्चे अन्न से भरा हुआ घड़ा किसी ज़रुरतमंद को दान करें।

ब्रज में होता है उत्सव

पौराणिक कथाओं के अनुसार चैत्र पूर्णिमा या चैती के दिन भगवान श्री कृष्ण ने ब्रज में रास उत्सव रचाया था, जो महारास के नाम से प्रसिध्द है। कहते हैं इस महारास में हजारों गोपियां शामिल होती थीं और प्रत्येक गोपी के साथ भगवान श्रीकृष्ण रातभर नाचते थे। वे ये कार्य अपनी योगमाया के द्वारा करते थे। इसी दिन राम भक्त हनुमान जी का जन्म हुआ था, इसलिए चैत्र पूर्णिमा को ही हनुमान जयंती मनाई जाती है। 

Posted By: Molly Seth