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गणेश चालीसा पढ़ने में आप भी तो नहीं करते ये गलती? 90% लोग नहीं जानते बुधवार की पूजा का सही नियम

Published: Wed, 06 May 2026 08:00 AM (IST)Updated: Wed, 06 May 2026 09:15 AM (IST)

गणेश चालीसा के पूरे लाभ के लिए इसके महत्व और बुधवार को इसके पाठ की सही विधि जानना जरूरी है। ...और पढ़ें

गणेश चालीसा पाठ के सही नियम (Picture Credit- AI Generated)

गणेश चालीसा पाठ के सही नियम (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपके काम बनते-बनते बिगड़ जाते हैं? लाख कोशिशों के बाद भी मनचाहा फल नहीं मिलता? आज की भागदौड़ भरी और तनावपूर्ण जिंदगी में हम सभी कभी न कभी ऐसे मोड़ पर जरूर आते हैं, जहां आगे बढ़ने के सारे रास्ते बंद नजर आते हैं। 

ऐसे मुश्किल समय में प्रथम पूज्य 'विघ्नहर्ता' भगवान श्री गणेश उम्मीद की किरण बनकर हमें राह दिखाते हैं। किसी भी नए और शुभ काम की शुरुआत हो या जीवन का कोई भारी संकट, सबसे पहले प्रथम पूज्य बाप्पा को ही याद किया जाता है। शास्त्रों में बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन पूरे विधि-विधान से 'गणेश चालीसा' का पाठ किया जाए, तो बंद किस्मत के ताले भी आसानी से खुल जाते हैं। 

क्यों श्रीगणेश को समर्पित है बुधवार का दिन

शास्त्रों के अनुसार, सप्ताह के हर दिन का संबंध किसी न किसी विशेष ग्रह से होता है। इसी तरह का बुधवार का संबंध 'बुध' ग्रह है, जिसे इंसान की बुद्धि, वाणी, तर्क क्षमता और विवेक का मुख्य कारक माना जाता है। दूसरी तरफ, भगवान गणेश स्वयं रिद्धि-सिद्धि और अपार बुद्धि के दाता कहलाते हैं। यही वजह है कि बुधवार के दिन बाप्पा की विशेष उपासना करने से इंसान का मानसिक तनाव काफी हद तक कम हो जाता है। 

गणेश चालीसा का पाठ करने की सही विधि?

किसी भी धार्मिक कार्य या पूजा का पूरा फल तभी मिलता है, जब उसे सही नियम और पूरे साफ मन से किया जाए। गणेश चालीसा के भी ऐसे ही कुछ नियम हैं, जो निम्न हैं- 

ganesh chalisa (1)

  • बुधवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं।
  • पूजा के समय लाल या पीले रंग के साफ-सुथरे कपड़े पहनना सबसे शुभ माना जाता है।
  • इसके बाद अपने घर में पूजा वाली जगह पर भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर के सामने शुद्ध देसी घी का दीपक जलाएं।
  • बाप्पा को 'दूर्वा' (हरी घास) चढ़ाएं। दूर्वा को शीतलता और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है और यह गणेश जी को अत्यंत प्रिय है।
  • अंत में पूरे शांत मन, श्रद्धा और एकाग्रता के साथ गणेश चालीसा का पाठ शुरू करें।

गणेश चालीसा के चमत्कारिक लाभ

  • गणेश चालीसा से लंबे समय से अटका हुआ काम, या फिर नौकरी व व्यापार में लगातार आ रही कोई न कोई अड़चन दूर होती है। 
  • पढ़ाई-लिखाई में कमजोर या जिनका मन पढ़ाई से जल्दी भटक जाता है, ऐसे स्टूडेंट्स के लिए बुधवार को यह पाठ करना किसी चमत्कार से कम नहीं है।
  • इसके नियमित पाठ से घर के क्लेश खत्म होते हैं और परिवार में हमेशा सुख-समृद्धि का वास होता है।
ganesh chalisa

॥गणेश चालीसा॥

॥ दोहा ॥

जय गणपति सदगुण सदन,कविवर बदन कृपाल।

विघ्न हरण मंगल करण,जय जय गिरिजालाल॥

॥ चौपाई ॥

जय जय जय गणपति गणराजू।

मंगल भरण करण शुभः काजू॥

जै गजबदन सदन सुखदाता।

विश्व विनायका बुद्धि विधाता॥

वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना।

तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥

राजत मणि मुक्तन उर माला।

स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥

पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं।

मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥

सुन्दर पीताम्बर तन साजित।

चरण पादुका मुनि मन राजित॥

धनि शिव सुवन षडानन भ्राता।

गौरी लालन विश्व-विख्याता॥

ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे।

मुषक वाहन सोहत द्वारे॥

कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी।

अति शुची पावन मंगलकारी॥

एक समय गिरिराज कुमारी।

पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी॥

भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा।

तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा॥

अतिथि जानी के गौरी सुखारी।

बहुविधि सेवा करी तुम्हारी॥

अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा।

मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥

मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला।

बिना गर्भ धारण यहि काला॥

गणनायक गुण ज्ञान निधाना।

पूजित प्रथम रूप भगवाना॥

अस कही अन्तर्धान रूप हवै।

पालना पर बालक स्वरूप हवै॥

बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना।

लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना॥

सकल मगन, सुखमंगल गावहिं।

नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं॥

शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं।

सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं॥

लखि अति आनन्द मंगल साजा।

देखन भी आये शनि राजा॥

निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं।

बालक, देखन चाहत नाहीं॥

गिरिजा कछु मन भेद बढायो।

उत्सव मोर, न शनि तुही भायो॥

कहत लगे शनि, मन सकुचाई।

का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई॥

नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ।

शनि सों बालक देखन कहयऊ॥

पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा।

बालक सिर उड़ि गयो अकाशा॥

गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी।

सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी॥

हाहाकार मच्यौ कैलाशा।

शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा॥

तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो।

काटी चक्र सो गज सिर लाये॥

बालक के धड़ ऊपर धारयो।

प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो॥

नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे।

प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे॥

बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा।

पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा॥

चले षडानन, भरमि भुलाई।

रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई॥

चरण मातु-पितु के धर लीन्हें।

तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥

धनि गणेश कही शिव हिये हरषे।

नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥

तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई।

शेष सहसमुख सके न गाई॥

मैं मतिहीन मलीन दुखारी।

करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी॥

भजत रामसुन्दर प्रभुदासा।

जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा॥

अब प्रभु दया दीना पर कीजै।

अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै॥

।।दोहा।।

श्री गणेश यह चालीसा,पाठ करै कर ध्यान।

नित नव मंगल गृह बसै,लहे जगत सन्मान॥

सम्बन्ध अपने सहस्र दश,ऋषि पंचमी दिनेश।

पूरण चालीसा भयो,मंगल मूर्ती गणेश॥