भक्तों के संकटों को हरने वाला और सुख समृद्धि देने वाला अनंत चतुर्दशी का व्रत इस वर्ष आज किया जा रहा है। इस वर्ष अनंत चतुर्दशी विविधताओं से भरी हुई है। क्योंकि पर्व पर विशेष संयोग बन रहा है जो 24 वर्षों बाद आ रहा है। अनंत चतुर्दशी को सिंह का बृहस्पति तथा कन्या का सूर्य है, जो बहुत ही महत्वपूर्ण है। चतुर्दशी मध्यान 12:06 बजे तक ही रहेगी। अनंत चतुर्दशी का व्रत करने से व्रत करने वाले के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और सिद्धी, बुद्धि और विद्या की प्राप्ति होती है। विशेषकर भगवान विष्णु की कृपा के लिए यह व्रत किया जाता है और इस दिन अनंत भगवान के साथ विष्णु भगवान व गणपति पूजन का विधान शास्त्रों में बताया गया है।

यह है मान्यता

भविष्य पुराण के अनुसार जुए में पांडव राजपाट हार कर जब जंगल में भटक रहे थे और कई प्रकार के कष्टों को झेल रहे थे तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अनंत चतुर्दशी का व्रत करने की सलाह दी और उसी व्रत के प्रभाव से पांडव सभी कष्टों से मुक्त हुए और महाभारत के युद्ध में उन्हें विजयी की प्राप्ति हुई थी।

यह है विधि

इस दिन व्रती को प्रात: काल स्नान कर कलश की स्थापना कर कलश पर अष्टदल कमल के समान बने बर्तन में कुश से निर्मित अनंत की स्थापना करना चाहिए और फिर शास्त्रनुसार भगवान अनंत के साथ-साथ भगवान विष्णु और विघ्नहर्ता गणोश जी का आवाहन कर उनकी पूजा करनी चाहिए।

जैन धर्मो में प्रचलित है अनंत चतुर्दशी

अनंत चतुर्दशी का पर्व हिन्दुओं के साथ-साथ जैन समाज के लिए भी महत्वपूर्ण और कामनाओं से भरा है। जैन धर्म के दशलक्षण पर्व का इस दिन समापन होता है। जैन अनुयायी श्रीजी की शोभायात्र निकालते हैं और जलाभिषेक करते हैं।

Posted By: Preeti jha

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