महाकाल की नगरी का 'वरसिद्धि मंदिर', जहां उल्टा स्वास्तिक बनाने और सांकल बजाने से जल्द बजती है शहनाई
उज्जैन में हरसिद्धि मंदिर के पीछे स्थित वर सिद्धि मंदिर अविवाहितों के लिए विशेष मान्यता रखता है। यहां धागा बांधने ...और पढ़ें
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वर सिद्धि मंदिर में विवाह से जुड़ी अनोखी मान्यता

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। उज्जैन जिसे 'महाकाल की नगरी' के नाम से भी जाना जाता है। इस शहर की शान महाकालेश्वर मंदिर तो है ही, लेकिन कुछ ऐसे भी मंदिर है, जिनकी मान्यताएं अनोखी होने के साथ हैरान करने वाली भी है।
उज्जैन के मध्य में स्थित है हरसिद्धि मंदिर जो शहर के सबसे पूजनीय पीठों में से एक है। इस मंदिर का उल्लेख शिव पुराण में भी देखने को मिलता है। माना जाता है कि, इसी स्थान पर देवी सती की कोहनी गिरी थी।
उज्जैन आने वाले लोग महाकालेश्वर मंदिर और हर सिद्धि मंदिर के बारे में तो जानते होंगे, लेकिन बहुत कम लोगों को ही 'वर सिद्धि मंदिर' के बारे में पता होगा।

वरसिद्धि मंदिर की अनोखी मान्यता
हरसिद्धि शक्तिपीठ मंदिर के पीछे एक ऐसी देवी का मंदिर है, जिन्हें वर सिद्धि माता के नाम से जाना जाता है। वर सिद्धि यानी योग्य वर (पति) देने वाली देवी।
वर सिद्धि मंदिर से जुड़ी मान्यता है कि जो भी कुंवारे लड़के या लड़कियां माता के दरवाजे की सांकल बजाकर शादी की मनोकामना का धागा बांधता है, उनकी शादी जल्द हो जाती है।
सांकल के अलावा स्वास्तिक बनाने की भी मान्यता
हरसिद्धि मंदिर के पीछे सीढ़ियों के पास वरसिद्धि देवी का छोटा-सा मंदिर है। मंदिर के अंदर देवी की आकर्षक प्रतिमा है। इस मंदिर में आने वाले युवक-युवतियां मंदिर के दरवाजे की सांकल बजा कर मनोकामना का धागा बांधती हैं। इस धागे को पचरंगी धागा कहा जाता है, जिसमें तीन या पांच गांठ लगाई जाती है।
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इसके अलावा मंदिर की मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाने की भी मान्यता है। भक्त जब मां वरसिद्धि के दर्शन के लिए आते हैं, तो दीवार पर उल्टा स्वास्तिक बनाते हैं, ताकि शादी की मनोकामना पूरी हो सके। जिन लोगों की मनोकामना पूरी हो जाती है, वह पुन: दर्शन कर सीधा स्वास्तिक बनाते हैं और देवी को पूजन की सामग्री समेत प्रसाद भेंट करते हैं।
वर सिद्धि मंदिर के पीछे स्थित देवी वर सिद्धि का मंदिर भी प्राचीन है। शादी से जुड़ी ऐसी मान्यता के कारण मंदिर में रोजाना युवक और युवतियां आकर धाग बांधते हैं, जिन्हें विवाह में देरी का सामना करना पड़ रहा है।
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