1- अमरनाथ गुफा भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। यहाँ की प्रमुख विशेषता पवित्र गुफा में बर्फ से प्राकृतिक शिवलिंग का निर्मित होना है। इसी कारण से इसे स्वयंभू हिमानी शिवलिंग भी कहते हैं। वैसे अमरनाथ स्‍थित शिव लिंग को बाबा बर्फानी भी कहा जाता है। 

2- अमरनाथ गुफा का आकार लगभग डेढ़ सौ फुट है। इसमें ऊपर से बर्फ के पानी की बूँदें जगह-जगह टपकती रहती हैं। इन्‍हीं बूंदों से एक स्‍थान से टपकने वाली हिम बूँदों से लगभग दस फुट लंबा शिवलिंग बनता है। चन्द्रमा के घटने-बढ़ने के साथ-साथ इसका आकार भी घटता-बढ़ता रहता है।

3- आश्चर्य की बात तो ये है कि यह शिवलिंग ठोस बर्फ का बना होता है, जबकि ऐसी गुफाओं में आमतौर पर कच्ची बर्फ ही होती है जो हाथ में लेते ही भुरभुरा जाती है। अमरनाथ के प्रमुख शिवलिंग से कई फुट दूर गणेश, भैरव और पार्वती के वैसे ही अलग अलग हिमखंड भी र्निमित होते हैं।

4- मान्‍यता है कि इसी गुफा में माता पार्वती को भगवान शिव ने अमरत्व की कथा सुनाई थी, जिसे सुनकर उसी समय जन्‍मे शुक शिशु शुकदेव ऋषि के रूप में अमर हो गये थे।

5- ऐसी कथायें भी प्रचलित हैं कि जिन भक्‍तों पर शिव पार्वती प्रसन्‍न होते हैं उन्‍हें कबूतरों के जोड़े के रूप में प्रत्‍यक्ष दर्शन देते हैं और उन्‍हें मोक्ष की प्राप्‍ति होते हैं। 

6- यह भी कहा जाता है सौभाग्‍यशालियों को दर्शन देने वाला कबूतरों का ये जोड़ा दरसल वही है जो भगवान शिव द्वारा वर्णित अमरत्‍व की कथा सुन कर अमर हो गया है।  

7- कुछ धर्माचार्यों का मत है कि शिवजी जब पार्वतीजी को अमर कथा सुनाने ले जा रहे थे, तो उन्होंने जिन स्‍थानों पर छोटे-छोटे अनंत नागों को, माथे के चंदन को, पिस्सुओं को और गले के शेषनाग को छोड़ा था वे सब अनंतनाग, चंदनबाड़ी, पिस्सू टॉप और शेषनाग नाम से प्रसिद्ध हुए। 

8- अमरनाथ गुफा के बारे में सबसे पहले पता सोलहवीं शताब्दी में एक मुसलमान गडरिए बूटा मलिक को चला था। आज भी मंदिर का चौथाई चढ़ावा उस मुसलमान गडरिए के वंशजों को मिलता है। साथ ही यहां पर सभी फूल बेचने वाले भी मुस्‍लिम ही हैं। 

9- कहते हैं कि पशुओं को चराते हुए जंगल में इस गडरिए की मुलाकात एक साधू से हो गई थी साधू ने बूटा को कोयले से भरी एक कांगड़ी दी।जब  घर पहुंचकर उसने कांगड़ी में कोयले की जगह सोना पाया तो वह बहुत हैरान हुआ और उसी समय साधू का धन्यवाद करने के लिए गया परन्तु वहां साधू की जगह एक विशाल गुफा मिली और उसी दिन से यह स्थान एक तीर्थ बन गया।  

10- अमरनाथ यात्रा छड़ी मुबारक भी कहते हैं जो तमाम भक्‍तों और साधु संतों के साथ एक जुलूस के रूप में शुरू होती है। इस साल ये आज यानि 29 जून से प्रारंभ हुई है और हमेशा की तरह रक्षाबंधन पर यानि सात जुलाई को भगवान शिव के छड़ी पूजन के साथ पूरी होगी। इस दौरान आने वाले सभी श्रद्धालुओं की देखभाल की तमाम जिम्‍मेदारी अमरनाथ श्राइन बोर्ड लेता है। 

 

Posted By: Molly Seth