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शुक्रताल में आज भी मौजूद है 5000 साल पुराना अक्षयवट, जहां मिला था राजा परीक्षित को भागवत कथा का ज्ञान

Published: Tue, 07 Jul 2026 04:30 PM (GMT+05:30)Updated: Tue, 07 Jul 2026 05:13 PM (GMT+05:30)

शुक्रताल, मुजफ्फरनगर में स्थित एक प्राचीन तीर्थ स्थल है, जहां 5100 साल पुराना अक्षय वट वृक्ष मौजूद है। इसी वृक्ष ...और पढ़ें

शुक्रताल में मौजूद है बरगद का पेड़ (Picture Credit- AI)

शुक्रताल में मौजूद है बरगद का पेड़ (Picture Credit- AI)

HighLights

  1. शुक्रताल में है 5100 साल पुराना अक्षय वट वृक्ष

  2. ऋषि शुकदेव ने राजा परीक्षित को सुनाई थी भगवत कथा

  3. यह वृक्ष श्रीमद्भागवत पुराण के जन्मस्थान का साक्षी है

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारत में कई सारे ऐसे तीर्थ स्थल हैं, जिनकी अपनी अलग-अलग मान्यताएं हैं। वहां पर स्थापित हुए भगवान की पूजा का भी खास महत्व होता है। ऐसी एक जगह उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में मौजूद है। जहां पर पावन तीर्थ स्थल शुक्रताल मौजूद है। यह प्राचीन समय से यहां मौजूद है। गंगा किनारे बसा यह स्थान हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथों में से एक श्रीमद्भागवत पुराण का जन्मस्थान भी कहा जाता है। इस जगह की शोभा बढ़ाता है यहां पर लगा प्राचीन बरगद का पेड़, जिसे अक्षय वट भी कहते हैं। इसी के नीचे बैठकर शुकदेव ने राजा परीक्षित को भगवत कथा का वर्णन किया था।

शुक्रतल है ऋषि शुकदेव की तपस्थली

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब राजा परीक्षित को ऋषि द्वारा सात दिनों में मृत्यु का श्राप मिला, तो वह व्याकुल होकर यहां पर आए थे और उन्होंने महर्षि शुकदेव की शरण ली थी। तब ऋषि ने इसी बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर उन्हें श्रीमद्भागवत पुराण के उपदेश का वर्णन किया था। इस चीज का यह वृक्ष साक्षी है। आज भी भक्त आते हैं और इस वृक्ष की परिक्रमा करते हैं। उनका मानना है कि पेड़ में आज भी श्रीमद्भागवत पुराण का अहसास होता है।

साधारण नहीं है बरगद का पेड़

शुक्रताल में लगा विशाल अक्षय वट साधारण पेड़ नहीं है। यह काफी समय पुराना है। ऐसी मान्यता है कि यह 5100 साल पुराना चमत्कारी वृक्ष है। जिसकी शाखाएं 150 फीट ऊंची व विशाल हैं। पेड़ आज भी अपनी जड़ों को गहराई से जमाए हुए उसी स्थान पर खड़ा है, जहां पर शुकदेव ने श्रीमद्भागवत पुराण का वर्णन किया था। यहां आने वाले लोगों को इस वृक्ष से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

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बरगद का पेड़ क्यों होता है खास?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बरगद का पेड़ ब्रह्मा वृक्ष कहा जाता है। मान्यता है कि इस वृक्ष में त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है। ऐसा कहा जाता है कि इस वृक्ष से की गई कोई भी प्रार्थना खाली नहीं जाती है। यहां पर हर इच्छा पूरी होती है।

शुक्रताल में इसी वृक्ष के पास से गंगा नदी भी बहती है, जहां पर लोग स्नान करके इसके दर्शन करते हैं और अपनी मानतों का धागा यहां पर बांधकर जाते हैं। आप भी इस जगह पर जाकर यहां की सकारात्मक ऊर्जा को महसूस कर सकते हैं।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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