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कैंची धाम जाने की कर रहे हैं प्लानिंग? भूलकर भी न करें ये 4 गलतियां, मंदिर ने जारी किए सख्त नियम

Published: Sat, 12 Sep 2026 06:00 PM (IST)

श्रद्धालुओं को कैंची धाम मंदिर जाते समय कुछ सख्त नियमों का पालन करना होगा, जिनमें मिट्टी या पानी न ले ...और पढ़ें

कैंची धाम में क्यों मना है मिट्टी और पानी ले जाना? (Picture Credit- AI Generated)

कैंची धाम में क्यों मना है मिट्टी और पानी ले जाना? (Picture Credit- AI Generated)

HighLights

  1. मंदिर से मिट्टी या पानी ले जाना मना है।

  2. किसी भी प्रकार का चढ़ावा चढ़ाने पर रोक है।

  3. मंदिर ट्रस्ट कभी दान की मांग नहीं करता।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आज के समय में नीम करोली बाबा (Neem Karoli Baba) अधिक आस्था का केंद्र हैं। उनके भक्त उन्हें भगवान हनुमान का अवतार मानते हैं। नीम करोली बाबा का जीवन कई रहस्यों से भरा हुआ है। उन्होंने अपने जीवनकाल में लोगों का अपने वचनों से मार्गदर्शन किया।

वर्तमान में भी लोग उनके द्वारा बताए गए मार्ग पर चलते हैं, जिससे उन्हें जीवन में सफलता प्राप्त होती है। हाल ही में नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित 'हनुमान अंश' (Hanuman ansh) नाम की फिल्म रिलीज हुई है, जिसके बाद से नीम करोली बाबा खूब चर्चा में हैं। यह फिल्म भगवान की खोज में उनके द्वारा की गई उत्तर भारत की यात्रा और उनके 'नीम करोली बाबा' बनने तक के सफर को दर्शाती है। इस फिल्म को भारी संख्या में लोग देख रहे हैं।

साथ ही कई लोग उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम जाने की योजना बना रहे हैं। इस मंदिर में रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। दर्शन के लिए आने वाले हर श्रद्धालु को नियमों का पालन करना पड़ता है। अगर आप भी नीम करोली बाबा के मंदिर जाने की सोच रहे हैं, तो ऐसे में आइए इस आर्टिकल में हम आपको बताते हैं इस मंदिर के नियमों के बारे में।

नीम करोली मंदिर के नियम

मिट्टी या पानी ले जाना मना है- मंदिर की वेबसाइट के अनुसार, श्रद्धालुओं को कैंची धाम मंदिर से मिट्टी या पानी साथ नहीं लाना चाहिए। महाराज जी के भक्तों में ऐसी कोई परंपरा कभी नहीं रही है।

चढ़ावे पर रोक- मंदिर में किसी भी तरह का ताबीज, कपड़े, धागा, कंबल आदि चीजें चढ़ाने की कोई परंपरा नहीं है। श्रद्धालुओं को भूलकर भी ये चीजें मंदिर में नहीं चढ़ानी चाहिए।

दान की मांग नहीं- कैंची मंदिर एक ट्रस्ट है। यह ट्रस्ट किसी भी श्रद्धलु से किसी भी प्रकार का दान कभी भी मांगता नहीं है। मंदिर में किसी श्रद्धलु के द्वारा पूजा और यज्ञ नहीं होती है। यहां पर मंदिर प्रशासन के आदेश पर ही पूजा और यज्ञ का आयोजन किया जाता है।

अन्य गतिविधियों की अनुमति नहीं- वेबसाइट पर यह भी स्पष्ट किया गया है कि मंदिर परिसर में योगासन, ध्यान, या आयुर्वेदिक उपचार जैसी कोई गतिविधि नहीं कराई जाती है। मंदिर प्रशासन इन चीजों के लिए अनुमति नहीं देता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है