कानपुर के हटिया बाजार के खोया बाजार में स्थित एक ऐसी देवी मां विराजमान हैं, जिन्हें प्रसाद के रूप में हरी और ताजी सब्जियां चढ़ती हैं। इन्हें बुद्धा देवी के रूप में जाना जाता है। यहां मां के दर्शन करने के लिए कानपुर ही नहीं, बल्कि आसपास से भी भक्तगणों की भीड़ उमड़ती है और मां का आशीर्वाद प्रात्त करते हैं। जानते हैं मां बुद्धा देवी की महिमा के बारे में....

सब्जियों को माना जाता है मनोकामना पूरक

कानपुर के बुद्धा देवी मां के मंदिर में बुधवार को अंदर का नजारा अद्भुत होता है और नवरात्रों में तो यहां की रौनक और भी बढ़ जाती है। बुधवार का दिन मां के पूजन के लिए बहुत विशेष माना जाता है। इस दिन भक्तों की भीड़ और मां के जयकारों से मंदिर गुलजार रहता है। जहां ज्यादातर मंदिरों में भोग लगाने के लिए फल और मिष्ठान की दुकानें होती हैं, वहीं, बुद्धा देवी मंदिर के बाहर फल और मिष्ठानों के साथ सब्जियों की डालियां भी मिलती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां मां को सब्जियों का भोग लगाया जाता है। भक्त सब्जियों में लौकी के टुकड़े, बैंगन, पालक, टमाटर, गाजर, मूली और आलू मां को चढ़ाते हैं। ये भोग मनोकामना पूरक माना जाता है।

सपने में दिए थे मां ने दर्शन

इस मंदिर के पुजारी को पुरोहित या पंडित नहीं, बल्कि राजू माली के नाम से पुकारा जाता है। राजू माली के अनुसार, यह मंदिर करीब 100 साल पुराना है। आज जिस जगह मंदिर है, वहां सब्जियों का बगीचा हुआ करता था और उसकी देखरेख का काम उनके पूर्वज करते थे। बताया जाता है कि एक बार राजू माली के पूर्वज के सपने में बुद्धा देवी आई और बोली कि उन्हें इस बगीचे से बाहर निकालो। ये सपना करीब एक हफ्ते तक आता रहा, जिसको लेकर वो परेशान रहने लगे। इसके बाद उन्होंने बगीचे की उस जगह की खुदाई करने का फैसला किया जहां मां ने खुदाई करने को कहा था।

सब्जियों के बगीचे से निकली मूर्ति 

राजू माली के मुताबिक, करीब तीन दिन की खुदाई के बाद देवी बुद्धा की मूर्ति मिली। उनकी मूर्ति मिलने के बाद उन्होंने वहां एक चबूतरा बनवाया और मूर्ति की स्थापना की। देवी की मूर्ति सब्जियों के बगीचे से निकली थी, इस वजह से उन्हें प्रसाद के रूप में सब्जियां चढ़ाई जाती हैं।

हर मनोकामना होती है पूरी

यहां आने वाले भक्तों की भीड़ में कोई कमी नहीं है। भक्तों का मानना है कि उन्होंने जब भी सच्चे दिल में मां से कोई गुहार लगाई है तो मां ने उनकी मनोकामना पूरी की है। यह मंदिर एक सकरी गली में स्थित है लेकिन यहां आने वालों को इसका रास्ता मिल ही जाता है। नवरात्रों में यहां में तो भक्तों की भीड़ दोगुना रहती है।   

 

Posted By: Priyanka Singh

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