यहीं माता सती ने त्यागे थे प्राण और महादेव ने किया था तांडव, पढ़ें दक्षेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी कथा
उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित कनखल में दक्षेश्वर महादेव मंदिर है, जहां माता सती ने प्राण त्यागे थे और भगवान शिव ...और पढ़ें

दक्षेश्वर महादेव मंदिर का रहस्य

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। उत्तराखंड के हरिद्वार से लगभग 4 किलोमीटर दूर कनखल में दक्षेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। इस मंदिर को दक्ष प्रजापति मंदिर भी कहा जाता है। यह पवित्र स्थल भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस स्थान पर दक्षेश्वर महादेव मंदिर है, उसी स्थान पर माता सती ने अपने प्राणों का त्याग किया था और भगवान शिव ने प्रलयंकारी तांडव किया था। सावन के महीने में और महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु महादेव की पूजा-अर्चना और दर्शन करने के लिए दूर-दूर से आते हैं। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको विस्तार से बताते हैं इस मंदिर से जुड़ी विशेष बातें।
दक्षेश्वर महादेव मंदिर की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, माता सती के पिता राजा दक्ष ने कनखल में एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया था। उन्होंने यज्ञ में सभी देवी-देवताओं को बुलाया किया था, लेकिन माता सती और भगवान शिव को निमंत्रण नहीं दिया। माता सती ने इस यज्ञ में जाने की इच्छा जताई, लेकिन महादेव ने उन्हें बिना बुलाए जाने से मना कर दिया। जब माता सती पिता के यज्ञ में जाने की जिद करने लगीं, तो महादेव ने उन्हें यज्ञ में जाने की अनुमति दी।
जब माता सती यज्ञ स्थल पर पहुंचीं, तो राजा दक्ष ने भगवान शिव का घोर अपमान किया। माता सती अपने पति महादेव का अपमान सहन नहीं कर पाईं और उन्होंने उसी यज्ञ कुंड में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए।
जब सती के आत्मदाह की बात का महादेव को पता चला, तो उन्हें अधिक क्रोध आया और उन्होंने प्रलयंकारी तांडव किया। महादेव ने वीरभद्र को राजा दक्ष का सिर काटने के लिए भेजा, क्योंकि राजा दक्ष ने माता सती और उनके साथ उचित व्यवहार नहीं किया था। वीरभद्र द्वारा सिर काटे जाने के बाद अन्य देवताओं के अनुरोध पर शिव जी ने राजा दक्ष के धड़ पर बकरे का सिर लगाकर उन्हें फिर से जीवित कर दिया। इसके बाद राजा दक्ष ने अपनी भूल के लिए शिव जी से क्षमा मांगी।
मंदिर में स्थित यज्ञ कुंड
दक्षेश्वर महादेव मंदिर परिसर में आज भी वह यज्ञ कुंड मौजूद है, जिसमें माता सती ने क्रोधित होकर अपने प्राण त्यागे थे। भारी संख्या में श्रद्धालु इस कुंड के दर्शन करने आते हैं। इस मंदिर में एक शिवलिंग भी विराजमान है, जिसकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दक्षेश्वर महादेव मंदिर के ठीक बगल से गंगा नदी बहती है। यहां स्थित घाट को दक्ष घाट कहा जाता है। मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना करने से पहले भक्त इसी दक्ष घाट पर पवित्र स्नान करते हैं।
कब बना था यह मंदिर?
ऐसा बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1810 में रानी धनकौर ने करवाया था। इसके बाद वर्ष 1962 में इस मंदिर का जीर्णोद्धारकिया गया था।
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Source- Daksheshwar Mahadev Temple
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