प्रयाग में है तीर्थराज संगम

इलाहाबाद में है गंगा यमुना और सरस्वती नदियों का पवित्र संगम, यहां तीन नदियां आकर मिलती हैं इसीलिए इस स्थान को त्रिवेणी के नाम से जाना जाता हैं। संगम स्थल में हालांकि सरस्वती दिखती नहीं पर ऐसी मान्यता है कि वह अदृश्य रूप में गंगा व यमुना की धाराओं के नीचे बहती है इसी लिए यह स्थल त्रिवेणी संगम कहलाता है। हिमालय से निकल कर प्रयाग तक आते आते गंगा गुम्फिद नदी में बदल जाती हैं परन्तु यमुना के मिलने के बाद ये पुन: अथाह जल से भर जाती है। विभिन्न धार्मिक ग्रन्थों में इस स्थल के बारे में विस्तार से उल्लेख मिलता है। रामायण और महाभारत जैसे पौराणिक ग्रंथों में इस स्थान का उल्‍लेख प्रयाग नाम से किया गया है। हर साल यहां जनवरी-फरवरी में माघ मेला नाम से बहुत बड़ा मेला लगता है। इस मेले मे देश-विदेश के लाखों श्रद्धालु स्नान करने आते हैं। 

त्रिवेणी संगम

इलाहबाद को पुराणों में तीर्थराज कहा गया है। पुराणों के अनुसार दक्ष प्रजापति ने आहुति की तीन वेदियों का निर्माण करवाया था कुरुक्षेत्र, प्रयाग और गया जिसमें से प्रयाग को मध्यम वेदी का स्थान प्राप्त है। तीन नदियों के इस स्‍थान संगम का जिक्र ॠग्वेद में भी आता है। उसमें बताया है कि जहां कृष्ण और श्वेत जल वाली जल धाराओं का संगम होता है वहां स्नान करने से मनुष्य को मोक्ष प्राप्‍त होता है और स्वर्ग में स्थान मिलता है। इसके साथ ही जो प्रयाग का दर्शन करता है और संगम के जल में स्नान करके उसकी पवित्र मिट्टी से अपने माथे पर तिलक करता है वह पापमुक्त हो जाता है।

 

माघ मास के मेले

इलाहबाद के संगम स्थल पर हिन्दुओं के अनेक धार्मिक एवं सांस्कृतिक मेलों का आयोजन होता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार मकर संक्रांति के पावन अवसर के दिन यहां माघ मेला आयोजित होता है इस अवसर पर संगम स्थल पर स्नान करने का बहुत महत्व होता है। यहां छह प्रमुख स्नानपर्व होते हैं जिनमें पौष पूर्णिमा, मकर संक्रान्ति, मौनी अमावास्या, बसंत पंचमी, माघ पूर्णिमा और महाशिवरात्रि के स्नानपर्व प्रमुख हैं। इस बार चंद्र ग्रहण के कारण माघ पूर्णिमा पर यहां स्‍नान का महत्‍व बहुत बढ़ गया है। 

 

By Molly Seth