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क्या आप भी चुका रहे हैं पिछले जन्म के कर्मों का कर्ज? लाल किताब में बताए गए हैं ये संकेत

Published: Thu, 20 Aug 2026 05:22 PM (IST)

लाल किताब में कर्मिक ऋण का महत्व बताया गया है, जो पिछले जन्म के कर्मों का फल वर्तमान जीवन में ...और पढ़ें

जानें अपने कर्मिक ऋण के संकेत और प्रभाव । (Picture Credit- AI Generated)

जानें अपने कर्मिक ऋण के संकेत और प्रभाव । (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ज्योतिष की दुनिया में लाल किताब को बहुत महत्‍व दिया गया है। इस किताब में ग्रहों की स्थिति के साथ-साथ व्यक्ति के जीवन में आने वाली परेशानियों के बारे में भी बताया गया है। खासतौर पर आपके पिछले जन्‍म में कर्म कैसे रहे हैं और उनका फल इस जीवन में आपको कैसा मिलेगा, ये सभी कुछ इस किताब के माध्‍यम से जाना जा सकता है।

लाल किताब के अनुसार, अगर कुंडली में कुछ ग्रह विशेष स्थिति में हों, तो उसे कर्मिक ऋण या ऋण योग से जोड़ा जाता है। इस स्थिति में पिछले जन्म के कुछ बुरे कर्मों का प्रभाव वर्तमान जीवन में अलग-अलग परिस्थितियों के रूप में दिखाई देता है। चलिए जानते हैं कि लाल किताब में इसके क्‍या संकेत बताए गाए हैं।

क्या होता है कर्मिक ऋण?

लाल किताब में कर्मिक ऋण का अर्थ ऐसे कर्मों को बताया गया है, जिनका प्रभाव व्यक्ति के वर्तमान जीवन में किसी न किसी रूप में दिखाई देता है। इसके संकेत के रूप में बार-बार करियर में असफलता, आर्थिक परेशानियां, पारिवारिक तनाव या जीवन में लगातार बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। यह ऋण कई प्रकार के होते हैं।

पितृ ऋण

लाल किताब के अनुसार पितृ ऋण का संबंध पिता या पूर्वजों से जुड़ा होता है। यदि किसी व्‍यक्ति पर पिृ ऋण होता है, तो परिवार में लगातार परेशानियां, संतान से जुड़ी बाधाएं या जीवन में लंबे समय तक संघर्ष जैसे संकेत नजर आते हैं। ऐसे में सूर्य के उपाय करने से पितृ दोष के प्रभाव कम हो जाते हैं।

स्त्री ऋण

लाल किताब में स्त्री ऋण का संबंध पत्नी या किसी स्त्री के प्रति किए गए गलत व्यवहार से जुड़ा होता है। संकेत के रूप में दांपत्य जीवन में तनाव, पारिवारिक कलह और खुशियों के बीच अचानक परेशानियां आने जैसी बातें दिखाई देती हैं। जब ऐसा हो तो शुक्र को मजबूत बनाने के उपाय करने चाहिए।

निर्दयता ऋण

निर्दयता ऋण उन कर्मों से जुड़ा होता है, जब पिछले जन्‍म में जातक द्वारा किसी कमजोर, असहाय या निर्दोष व्यक्ति को कष्ट पहुंचाया गया हो। इसके संकेतों में अचानक दुर्घटनाएं, कानूनी परेशानियां या शारीरिक कष्ट जैसी स्थितियों को सहना पड़ता है। ऐसे में व्यक्ति दूसरों के प्रति दयालु और जिम्मेदार व्यवहार रखे, तो प्रभाव काफी हद तक कम हो जाता है।

मातृ ऋण

लाल किताब में मातृ ऋण का संबंध माता और मातृ पक्ष से जोड़ा जाता है। इसके संकेतों में मानसिक अशांति, घर में तनाव और पारिवारिक सुख की कमी जैसी बातें दिखाई देती हैं। इस स्थिति में जातक का चंद्रमा भी कमजोर होता है। इसलिए चंद्रमा को मजबूत करने के उपाय करने चाहिए।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है