Vijaya Ekadashi 2026: सफलता के लिए भगवान विष्णु को लगाएं ये खास भोग, जानें पूजा का समय और पारण के नियम
Vijaya Ekadashi Puja Muhurta: विजया एकादशी 2026 के पावन अवसर पर जानें भगवान विष्णु को प्रसन्न करने की सबसे सरल ...और पढ़ें
-1770877315713_m.webp)
विजया एकादशी पर कैसे करें भगवान विष्णु को खुश (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का अपना एक अलग ही महत्व है, लेकिन जब बात 'विजया एकादशी' (Vijaya Ekadashi) की हो, तो इसका नाम ही इसकी खासियत बयां कर देता है। जैसा कि इसके नाम से स्पष्ट है, यह एकादशी हर क्षेत्र में 'विजय' यानी जीत दिलाने वाली मानी जाती है।
साल 2026 में विजया एकादशी का व्रत (Vijaya Ekadashi Ka Vrat) फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाएगा। मान्यता है कि जो भी भक्त इस दिन पूरी निष्ठा से भगवान विष्णु की पूजा करता है, उसके बड़े से बड़े दुश्मन परास्त हो जाते हैं और रुके हुए काम बनने लगते हैं।
विजया एकादशी 2026: कब है शुभ मुहूर्त?
दृक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 12 फरवरी को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट पर होगी। तिथि समापन 13 फरवरी को दोपहर 02 बजकर 25 मिनट पर हो जाएगा। इसी के साथ, 2026 में विजया एकादशी का व्रत 13 फरवरी को रखा जाएगा।
सर्योदय - सुबह 07 बजकर 01 मिनट पर
सूर्यास्त - शाम 06 बजकर 10 मिनट पर
ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 05 बजकर 18 मिनट से 06 बजकर 09 मिनट तक
विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 27 मिनट से 03 बजकर 12 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 08 मिनट से 06 बजकर 24 मिनट तक
अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक
कैसे करें भगवान विष्णु को प्रसन्न?
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले रंग के वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर के सामने व्रत का संकल्प लें। पूजा में पीले फूल, चंदन, अक्षत और तुलसी दल का प्रयोग बेहद जरूरी है।

(Image Source: AI-Generated)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की भी पूजा करनी चाहिए, इससे घर में सुख-समृद्धि आती है। पूजा के दौरान 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करते रहें। अगर संभव हो तो इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ अवश्य करें।
भोग में क्या चढ़ाएं?
विजया एकादशी पर भोग का विशेष ध्यान रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु को पीले रंग की मिठाई या केसर वाली खीर का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। सबसे जरूरी बात यह है कि भोग में तुलसी दल (पत्ते) जरूर हों, क्योंकि बिना तुलसी के भगवान विष्णु भोग स्वीकार नहीं करते हैं। चरणामृत और तुलसी के पत्ते से व्रत का पारण करें।
पारण का सटीक समय
विजया एकादशी व्रत के पारण की समय 14 फरवरी 2026 को सुबह 07:00 बजे से सुबह 09 बजकर 14 मिनट रहेगी। इस दौरान किसी भी समय पारण किया जा सकता है।
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
