Papmochani Ekadashi 2026: क्या पापमोचनी एकादशी पर कर सकते हैं तुलसी की पूजा, यहां पढ़ें जरूरी नियम
तुलसी जी को 'हरिप्रिया' भी कहा जाता है, क्योंकि प्रभु श्रीहरि को तुलसी अति प्रिय है। मान्यता है कि एकादशी ...और पढ़ें
-1773204675202_m.webp)
Papmochani Ekadashi 2026 कैसे करें तुलसी की पूजा?
HighLights
चैत्र कृष्ण एकादशी पर मनाई जाती है पापमोचनी एकादशी
इस दिन विशेष रूप से होती है प्रभु श्रीहरि विष्णु की पूजा
भगवान विष्णु के भोग में शामिल की जाती है तुलसी
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को 'पापमोचनी एकादशी' (Papmochani Ekadashi) के नाम से जाना जाता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह एकादशी 'पाप' का 'मोचन' यानी समस्त पापों का नाश करने वाली मानी गई है। भगवान विष्णु को समर्पित इस दिन पर तुलसी जी की आराधना करने से साधक को शुभ परिणाम मिलते हैं। ऐसे में चलिए पढ़ते हैं तुलसी की पूजा विधि।
तुलसी पूजा विधि -
- सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद साफ-सुथरे कपड़े विशेषकर पीले रंग के वस्त्र पहनें।
- भगवान विष्णु को भोग लगाते समय उसमें 'तुलसी दल' जरूर शामिल करें, क्योंकि बिना तुलसी के श्रीहरि का भोग अधूर माना जाता है।
- विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा के बाद तुलसी के पास घी का दीपक जलाएं।
- तुलसी जी को सिंदूर, लाल चुनरी, और शृंगार का सामान अर्पित करें।
- संध्या के समय तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं और 5, 7, या 11 बार परिक्रमा करें।
- परिक्रमा करते समय 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें।
- अंत में तुलसी चालीसा का पाठ व आरती करें।
शक्तिशाली तुलसी मंत्र -
पूजा के दौरान इन मंत्रों का जप करने से आपको प्रभु श्रीहरि के साथ-साथ मां लक्ष्मी जी की कृपा भी मिलती है -
तुलसी गायत्री मंत्र -
ॐ तुलसीदेव्यै च विद्महे, विष्णुप्रियायै च धीमहि, तन्नो वृन्दा प्रचोदयात्।।
तुलसी स्तुति -
महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी,
आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते।।
तुलसी नामाष्टक मंत्र -
(यह मंत्र तुलसी जी के आठ नामों की महिमा बताता है और अश्वमेध यज्ञ के समान फल देता है)
वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।
पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।
एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम।
य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता।।
-1773204298494.jpg)
(Picture Credit: Freepik) (AI Image)
इन गलतियों से करें अपना बचाव
शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करना जरुरी है, जो इस प्रकार हैं -
- धार्मिक मान्यता है कि एकादशी पर स्वयं मां तुलसी भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इसलिए इस दिन तुलसी में जल अर्पित करने से उनका व्रत खंडित हो सकता है।
- एकादशी तिथि पर भूलकर भी तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए और न ही तुलसी को स्पर्श करें।
- एकादशी पर स्नान के बाद ही तुलसी की पूजा करें और भगवान विष्णु को भोग लगाने के लिए तुलसी पत्ते एक दिन पहले ही उतारकर रख लें।
- तुलसी पूजन के दौरान काले रंग के वस्त्र पहनने से बचें, क्योंकि यह नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।
यह भी पढ़ें- Papmochani Ekadashi पर पाना चाहते हैं श्रीहरि विष्णु की कृपा, तो जरूर करें इस चालीसा का पाठ
यह भी पढ़ें- पापमोचनी एकादशी 2026: कहीं आपकी पूजा अधूरी न रह जाए, इन 4 वर्जित कामों ने तोड़ा है कई लोगों का व्रत
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
