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सर्वार्थ सिद्धि योग में अजा एकादशी आज, यहां पढ़ें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और कथा

Published: Mon, 07 Sep 2026 06:30 AM (IST)Updated: Mon, 07 Sep 2026 08:21 AM (IST)

आज 07 सितंबर को अजा एकादशी का व्रत किया जा रहा है, जिसमें भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा ...और पढ़ें

अजा एकादशी पर जरूर करें इस कथा का पाठ (Picture Credits- AI Images)

अजा एकादशी पर जरूर करें इस कथा का पाठ (Picture Credits- AI Images) 

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी 07 सितंबर को अजा एकादशी का व्रत किया जा रहा है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करना अधिक शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को सच्चे मन से करने पर जीवन में सदैव सुख-शांति बनी रहती है और साधक को सभी पापों से मुक्ति मिलती है।

अजा एकादशी का व्रत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। आइए जानते हैं अजा एकादशी व्रत का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और कथा।

अजा एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Aja Ekadashi 2026 Date and Shubh Muhurat)

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत- 06 सितंबर को सुबह 09 बजकर 59 मिनट पर
भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का समापन- 07 सितंबर को सुबह 07 बजकर 33 मिनट पर
वैदिक पंचांग के अनुसार, आज यानी अजा एकादशी का व्रत 07 सितंबर को किया जा रहा है।

ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04 बजकर 31 मिनट से 05 बजकर 16 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 54 मिनट से 12 बजकर 44 मिनट तक
विजय मुहूर्त- दोपहर 02 बजकर 25 मिनट से 03 बजकर 15 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त- शाम 06 बजकर 36 मिनट से 06 बजकर 59 मिनट तक
सर्वार्थ सिद्धि योग- शाम को 06 बजकर 14 मिनट से 06 बजकर 02 मिनट तक

अजा एकादशी व्रत पारण का समय (Aja Ekadashi Vrat Paran Time)

अजा एकादशी व्रत पारण का समय 08 सितंबर को सुबह 06 बजकर 02 मिनट से 08 बजकर 33 मिनट के बीच किया जा सकेगा। व्रत का पारण करने से पहले मंदिर या गरीब लोगों में अन्न-समेत आदि चीजों का दान करें।

अजा एकादशी पूजा विधि

  • चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और भगवान विष्णु एवं मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
  • भगवान श्रीहरि को पीला चंदन, पीले फूल और पीले वस्त्र अर्पित करें।
  • देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें।
  • अजा एकादशी व्रत कथा सुनें और विष्णु चालीसा का पाठ करें।
  • मौसमी फल, मिष्ठान और पंचामृत का भोग लगाएं।
  • प्रभु से जीवन में सुख-शांति की कामना करें और अगले दिन शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करें।

अजा एकादशी कथा

सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने कठिन परिस्थितियों के चलते अपना राजपाट और परिवार खो दिया था और वे एक चांडाल के दास बन गए थे। महर्षि गौतम के मार्गदर्शन में उन्होंने इस विपत्ति से पार पाने के लिए अजा एकादशी का व्रत किया। महर्षि गौतम ने राजा की व्यथा सुनकर उन्हें भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी।

इसके बाद राजा हरिश्चंद्र ने विधिपूर्वक व्रत किया। साथ ही उन्होंने श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की और रात्रि जागरण किया। अजा एकादशी व्रत के प्रभाव से राजा के सभी पाप नष्ट हो गए। आसमान से पुष्प वर्षा हुई, उन्हें उनका खोया हुआ परिवार और राजपाट दोबारा मिल गया, और अंततः मृत्यु पश्चात उन्हें वैकुंठ की प्राप्ति हुई।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।