बीते कुछ वर्षों में शादियों का अंदाज ही बदल गया है। एक से बढकर एक आइडियाज का इस्तेमाल किया जा रहा है। अब लोग परंपराओं में भी प्रयोग करने से नहीं घबराते। इसीलिए इवेंट मैनेजर्स की डिमांड भी लगातार बढ रही है। प्री-वेडिंग शूट्स, थीम या आउटडोर वेडिंग्स, गेस्ट बुक्स, कस्टमाइज्ड गिफ्ट्स और ऑनलाइन इनविटेशंस आदि का बिजनेस जोरों पर चल रहा है। शादी जिंदगी भर का रिश्ता है और इसकी तैयारी करने में भी महीनों का समय लग जाता है। हर रस्म व दिन के लिए कुछ खास तैयारियां जो करनी होती हैं। अब शादी वाले घरों में खरीदारी से ज्यादा तनाव इस बात का रहता है कि उसे सबके लिए यादगार कैसे बनाया जाए। शादी : तब और अब जहां पहले दोस्तों-परिजनों की मौजूदगी व आशीर्वाद के बीच दूल्हा-दुलहन अग्नि के समक्ष सात फेरे लेकर शादी के पवित्र बंधन में बंध जाते थे, वहीं अब शादी एक बडे इवेंट में तब्दील होती जा रही है। पहले जमाने में शादी से पहले लडका-लडकी एक-दूसरे को देख भी नहीं पाते थे। फिर दौर बदला, देखना-दिखाना, मिलना-मिलाना शुरू हुआ और अब तो वे शादी की तैयारियां भी मिलजुल कर करने लगे हैं। इससे उन्हें एक-दूसरे की पसंद-नापसंद को समझने का मौका तो मिलता ही है, शुरू से ही उनके बीच एक अच्छी अंडरस्टैंडिंग भी बन जाती है। कई घरों में शादी की शॉपिंग मिल-जुलकर की जाती है ताकि बाद में कोई समस्या न हो। क्रिएटिव डिजाइन कंसल्टेंट रुचिका कृष्णानी बताती हैं, 'हाल के वर्षों में इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों पर लोगों की निर्भरता बढी है। वे घर-बाहर के कामों में उलझे रहने के बजाय शादी से जुडे विभिन्न कार्यक्रमों को एंजॉय करना चाहते हैं। इसके लिए बजट की खास परेशानी नहीं है क्योंकि हर थीम को लोगों के बजट के अनुरूप ही डिजाइन किया जाता है। किसी की डिमांड पानी के बीचोंबीच फेरे लेने की होती है तो कोई मंडप की सजावट में नयापन तलाशता है।' जादू निमंत्रण पत्रों का भले ही ई-इनविटेशन युवाओं के बीच पॉपुलर हो रहा है लेकिन आज भी हर घर में निमंत्रण पत्र का बहुत शिद्दत से इंतजार किया जाता है। जहां पहले गणपति वंदना और श्री राम-सीता की तसवीरों से सुसज्जित काड्र्स चलन में थे, वहीं अब उनकी कायापलट हो चुकी है। कार्ड्स के साथ मिठाई के डिब्बे के बजाय गिफ्ट्स देने का कल्चर भी बढ रहा है। गुडग़ांव स्थित कोर डिजाइंस की डायरेक्टर रुचिता बंसल के मुताबिक, 'शादी की तडक-भडक का अंदाजा उनके इनविटेशन काड्र्स से लगाया जा सकता है। अब लोग ऐसे काड्र्स तैयार करवाने लगे हैं, जिनमें थीम और कस्टमाइज्ड गिफ्ट्स का प्रमुखता से ख्याल रखा जाता है। मसलन अगर शादी की थीम उदयपुर रखी जा रही है तो इनविटेशन कार्ड को वहां के किले के रूप में डिजाइन करवाया जाता है, जिसके झरोखों से वहां की प्रसिद्ध मिठाइयां निकाल कर खाई जा सकती हैं। उन मिठाइयों को हम वहां की फेमस शॉप्स से खास तौर पर ऑर्डर देकर बनवाते हैं। थाइलैंड थीम में वहां के बीच का लुक देते हुए बोल्स या ट्रे में वहां से मंगवाई गईं कुकीज रख दी जाती हैं। इनको क्लाइंट या उनके गेस्ट्स तक पहुंचाना थोडा कठिन जरूर होता है पर इस तरह के ट्रेंड्स को बहुत पसंद किया जा रहा है। इसी तरह से आगरा, गोवा, रॉयल, विंटेज थीम्स का जलवा भी बरकरार है। बात पारंपरिकता की करें तो कुछ समय पहले हमने सीता जी के स्वयंवर पर आधारित एक थीम तैयार की थी। उसे भी खूब पसंद किया गया।' उपहारों का भी अंदाज नया हर शादी में मेहमानों को दिए जाने वाले गिफ्ट्स भी बेहद खास होते हैं। पहले बर्तनों पर दूल्हा-दुलहन के नाम लिखवाने या चांदी के सिक्के देने का चलन था, वहीं अब उपहारों पर दूल्हा-दुलहन के नाम या शादी से जुडी कोई भी जानकारी अंकित नहीं की जाती है। कार्ड्स के साथ या मेहमानों को विदा करते समय दिए जाने वाले गिफ्ट्स को इस तरह से बनवाया जाता है कि लोग उनका आसानी से बाद में इस्तेमाल कर सकें। आइवरी से बनी मूर्तियां, सिरैमिक्स या ग्लास के बोल्स, ट्रे और डिब्बों को बहुत पसंद किया जा रहा है। कार्ड के साथ ही इनकी भी आकर्षक पैकेजिंग की जाती है। ऐसे प्रत्येक कार्ड की कीमत 1000 रुपये से शुरू होकर 10000 रुपये तक हो सकती है। अकसर गिफ्ट्स भी थीम के अनुसार ही तैयार करवाए जाते हैं, जिससे कि मेहमान शादी से अधिक जुडाव महसूस कर सकें। निमंत्रण का डिजिटल अंदाज डिजिटल वल्र्ड में अब निमंत्रण के तरीके भी डिजिटल होते जा रहे हैं। फेसबुक और व्हॉट्सएप पर ग्रुप्स बनाकर दोस्तों व परिजनों को आमंत्रित किया जाने लगा है। जिस तरह पहले वर-वधू के घर के छोटे बच्चे मेहमानों से शादी में आने का आग्रह करते थे, वहीं अब डिजिटल माध्यम पर 'सेव द डेट' कैप्शन के साथ वे खुद ही लोगों को बुलावा भेज देते हैं। सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के लिए प्री-वेडिंग शूट्स करवाने वाले जोडों के 1-2 मिनट के शॉर्ट इनोवेटिव विडियोज भी बना दिए जाते हैं। व्हाइट फ्रॉग प्रोडक्शंस के डायरेक्टर कुणाल खन्ना बताते हैं, 'थीम और कॉन्सेप्ट के आधार पर इनविटेशंस के कई विकल्प मौजूद हैं। मसलन ओल्ड स्कूल थीम, नेचर, विंटेज, ग्लैमर, एक्सप्रेसिव, रॉयल आदि। कुछ लोग किसी कहानी के आधार पर भी थीम चुनना पसंद करते हैं। कई कपल शूट के लिए ऐसी जगह चुनते हैं, जहां से उनकी लव स्टोरी की शुरुआत हुई थी, जैसे कॉफी शॉप, स्कूल-कॉलेज, गार्डन, ऑफिस, रिजॉर्ट आदि। शूट करवाते समय लोकेशन, कॉस्ट्यूम, प्रॉप्स और लाइट्स का खास खयाल रखना चाहिए। ऐसे शूट्स दोस्तों से करवाने के बजाय किसी प्रोफेशनल से ही करवाए जाने चाहिए।' सोशल साइट्स पर बने विवाह से संबंधित पेज पर प्री-वेडिंग शूट से लेकर शादी के हर कार्यक्रम की तसवीरें पोस्ट की जाती हैं। इसका फायदा यह होता है कि किसी कारणवश उसमें शामिल होने से वंचित रह गया मेहमान भी शादी की हर रस्म को वर्चुअली एंजॉय कर सकता है। इस संबंध में नवविवाहिता सौम्या उत्तम बताती हैं, 'हमारे प्री-वेडिंग शूट को बहुत पसंद किया गया था क्योंकि घरवालों के लिए यह बिलकुल नया और अनोखा कॉन्सेप्ट था। यहां तक कि उस विडियो को यू-ट्यूब पर भी अपलोड किया गया था। उसे एक शॉर्ट स्टोरी की तरह फिल्माया गया था।' विदाई भी हो खास अब ऐसा नहीं होता है कि गिफ्ट या आशीर्वाद दे-ले कर मेहमान यूं ही शादी से विदा हो लिए। उन्हें गेस्ट बुक्स या विडियो रिकॉर्डिंग के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करवानी पडती है। विवाह-स्थल के एग्जिट गेट के पास ही गेस्ट बुक्स रख दी जाती हैं, जिनमें मेहमान दूल्हा-दुलहन को उनके भावी जीवन के लिए शुभाशीष के तौर पर संदेश लिख जाते हैं। इनमें कई तरह के फनी और इमोशनल संदेश पढऩे को मिल जाते हैं। इंजीनियर शिवानी राजपाल बताती हैं, 'मुझे लगता है कि हमारे खानदान में मेरी शादी से ज्यादा यादगार शादी किसी की भी नहीं रही होगी। शादी की तैयारियों से लेकर विदाई तक ऐसे कई वाकये हुए, जो दो साल बाद भी लोगों को अच्छी तरह याद हैं। अमेरिका से आए मेरे कजंस और दोस्तों ने गेस्ट बुक में इतने फनी कोट्स लिखे थे, जिन्हें पढकर मेरे पति और मैं हंसे बिना नहीं रह पाते। ये चीजें जिंदगी भर सहेजने वाली होती हैं।' शानदार हैं कार्यक्रम शादी जैसे घरेलू समारोह को घरों से निकलकर होटल्स और रिजॉॅट्र्स तक पहुंचने में ज्यादा देर नहीं लगी। पहले संयुक्त परिवारों में समय और जिम्मेदारियों का कुछ पता ही नहीं चलता था और सारी तैयारियां आसानी से हो जाती थीं। अब एकल परिवार में विवाहोत्सव की तैयारियां कर पाना बहुत मुश्किल काम हो गया है। ऐसे में इवेंट मैनेजमेंट कंपनियां बेहद मददगार साबित होती हैं। क्लाइंट के बजट के अनुसार वे एक से एक शानदार शादियों को होस्ट कर देती हैं। शादी के कार्ड से लेकर विदाई तक के कार्यक्रमों की रूपरेखा इवेंट मैनेजर्स ही तैयार कर देते हैं। शॉपिंग, वेन्यू, गिफ्ट्स... हर चीज का इंतजाम ये चुटकियों में कर देते हैं। सिंपल से लेकर लैविश वेडिंग्स तक में इनका सहयोग लोगों को शादी एंजॉय करने का समय देता है। पानी के बीचोंबीच सेट लगाकर फेरे लेने का कॉन्सेप्ट हो या डेस्टिनेशन वेडिंग का सपना, बिना इनकी मदद के उन्हें पूरा कर पाना शायद हर किसी के लिए मुमकिन नहीं होता। प्रपोजल : न रहे कोई कमी शादी जैसे अहम रिश्ते की शुरुआत होती है प्रपोजल से। इसमें भी हालिया समय में कई तरह के बदलाव देखे गए हैं, जिनमें से युवा लेखक दुर्जाय दत्ता के अंदाज को खासा पसंद किया गया। अपनी पार्टनर अवंतिका को प्रपोज करने के लिए उन्होंने ट्विटर का सहारा लिया। अपने ऑफिशियल अकाउंट से हैशटैग 'मैरी मी अवंतिका' चलाकर अवंतिका के साथ ही उन्होंने अपने करोडों फैन्स का दिल भी जीत लिया। इस नॉवेलिस्ट के अनोखे प्रपोजल ट्वीट्स को बार-बार रीट्वीट कर फॉलोअर्स ने अवंतिका को प्रपोजल के लिए हां कहने पर मजबूर कर दिया। अब इसी तरह के तरीकों को आम लोग भी अपनी जिंदगी में आसानी से अपनाने लगे हैं। इस बाबत ब्लॉगर निवेदिता अपना अनुभव बताती हैं, 'मैं ब्लॉगर्स मीट में हिस्सा लेने के लिए गोवा गई थी। व्हॉट्सएप और फेसबुक पर ब्लॉगर्स के कई ग्रुप्स हैं, जिनके मेंबर्स अकसर मिलते रहते हैं। उन्हीं में से एक अक्षत से मेरी अच्छी दोस्ती हो गई थी। गोवा में उन्होंने बहुत ही शानदार तरीके से मुझे प्रपोज किया। बीच साइड का प्रपोजल का वह अंदाज मुझे इतना सम्मोहित कर गया कि न कहने का तो सवाल ही नहीं उठता था।' दीपाली पोरवाल