मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

आजकल प्यार का ख्ाुमार रीअल लाइफ से ज्य़ादा वर्चुअल स्क्रीन पर परवान चढ रहा है। ऑनलाइन डेटिंग के बाद अब मैट्रमोनियल साइट्स पर प्यार की दीवानगी का सुरूर छाया हुआ है। कई बार तो इन साइट्स पर ऐसे-ऐसे प्रपोजल आ जाते हैं कि हंसे बिना रहा नहीं जा सकता।

शादी का सीजन आते ही सिंगल लोगों के दिल की घंटी भी बज उठती है और शुरू हो जाती है जीवनसाथी की तलाश। इस मिशन में मददगार होती हैं मैट्रमोनियल साइट्स, जिनके सहारे कई सिंगल्स का मिंगल होने का सपना पूरा हो जाता है। लेकिन ये बातें सुनने में जितनी आसान और रोमांचक लगती हैं, असल जिंदगी में होता इसका उलटा है। प्यार और विश्वास से बनता है शादी का बंधन जहां सिर्फ दो लोग ही नहीं जुडते, बल्कि उनके साथ ही मिलन होता है दो परिवारों के रीति-रिवाजों और संस्कारों का। इसीलिए तो कहते हैं कि रिश्ता जोडऩे से पहले पूरी जांच-पडताल कर लेना अच्छा रहता है क्योंकि शादी सिर्फ प्यार से नहीं चलती। शादी की गाडी के दोनों पहियों में तालमेल होना बहुत जरूरी है। सही पार्टनर की इसी ख्ाोज में कई बार तो ऐसे लोगों से पाला पड जाता है कि मुंह से बस यही निकलता है कि इनसे भगवान ही बचाए। मैट्रमोनियल साइट्स पर मिले ऐसे ही कुछ खट्टे-मीठे प्रपोजल्स का अनुभव लेकर आई है सखी।

अजनबी बना लाइफ पार्टनर

बेस्ट प्रपोजल

दोस्तों ने हंसी मजाक में मैट्रमोनियल साइट पर मेरी प्रोफाइल बना दी और उसमें मेरी कुछ फोटोज भी अपलोड कर दीं। उस समय मैं कॉलेज में थी और अपने दोस्तों के साथ मिलकर सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर ऐसे मस्ती-मजाक करना हमारी आदत बन चुकी थी। फिर धीरे-धीरे पढाई का प्रेशर बढा तो मेरा ध्यान इन सब बातों से हट गया। मेरे लिए यह बात आई और गई जैसी हो गई। एग्जैम ख्ात्म हुए पूरा एक हफ्ता बीत चुका था और मैं बैठे-बैठे बोर हो रही थी कि अचानक मुझे अपनी मैट्रमोनियल प्रोफाइल की याद आई। मैंने जैसे ही अपनी प्रोफाइल में लॉग इन किया तो ढेर सारे प्रपोजल्स देखकर मुझे बडा आश्चर्य हुआ लेकिन ख्ाुशी भी हुई कि इतने सारे लोगों ने मुझे पसंद किया था। उसमें से एक लडका मुझे पसंद आया और मैंने उससे चैट करना शुरू किया। पहले तो मैं इस बात को लेकर सीरियस नहीं थी लेकिन जैसे ही बातों का सिलसिला बढा, मेरी उस लडके में रुचि भी बढऩे लगी। हम दोनों की पसंद और ख्ायालात बहुत मिलते थे इसलिए हमने अपने घर पर बात की। घरवालों को हमारे रिश्ते से कोई ऐतराज नहीं था और वे ख्ाुशी से हमारे रिश्ते के लिए तैयार हो गए। हंसी मजाक में बना रिश्ता मेरी जिंदगी से हमेशा के लिए जुड गया और इसी साल हमारी शादी को एक साल पूरा हो रहा है। कभी-कभी जिंदगी में कुछ ऐसा होता है, जो हमारे सोचने और समझने के अंदाज को पूरी तरह बदल देता है।

रूपा ठाकुर, कोलकाता

अच्छा नहीं ज्य़ादा दोस्ताना

ओवर फ्रेंड्ली प्रपोजल

शादी की उम्र को लेकर माता-पिता से ज्य़ादा चिंता रिश्तेदारों और पडोसियों को होती है। ऐसा ही कुछ मेरे साथ भी हुआ। मम्मी की एक फ्रेंड ने उन्हें मैट्रमोनियल साइट्स पर मेरी प्रोफाइल बनाने की सलाह दे डाली। मम्मी ने आव देखा न ताव फौरन मेरी डिटेल्स और फोटो के साथ बढिय़ा सी प्रोफाइल बना डाली। प्रोफाइल तक तो बात ठीक थी लेकिन मम्मी मेरी शादी को लेकर कुछ ज्य़ादा ही ऐक्टिव हो गईं थी और वह घंटों बैठकर लडकियों से चैट पर उनकी पसंद-नापसंद की जानकारी लेने लगीं। इसमें ख्ाास बात यह थी कि वह उनसे इस तरह बात करती थीं मानो वह नहीं मैं ही बात कर रही हूं। एक दिन किसी लडकी ने चैट पर मुझसे मिलने की इच्छा जाहिर की। अब मम्मी को इस बात से चिढ हो गई कि लडकी ने ख्ाुद क्यों मिलने की बात कह दी। मां तो हमेशा मां ही रहेंगी न! भले ही वह मैं बनकर किसी लडकी से बात कर रही थीं। ख्ाुद गलत काम करके भी मम्मी ने जिद पकड ली कि अब वह मैट्रमोनियल साइट्स से नहीं, रिश्तेदारी में ही लडकी ढूंढेंगी। उनका कहना था कि लडकी ओवर फ्रेंड्ली है। उनकी इस बात को सुनकर मैं और पापा हंसे बिना न रह सके।

निखिल खन्ना, लुधियाना

सब कुछ हो परफेक्ट

डिमांडिंग प्रपोजल

ब्रेकअप होने के बाद घर वालों के बहुत जोर देने पर मैंने सोशल साइट्स और मैट्रमोनियल साइट्स के जरिये कुछ अच्छी प्रोफाइल की तलाश शुरू की। मेरे घर पर जात-पात को लेकर ज्य़ादा समस्या नहीं थी इसलिए मैं आराम से अपनी पसंद के अनुसार अपनी भावी पत्नी को खोजने का कार्य कर रहा था। घर वालों को बस सभ्य और पढी-लिखी बहू चाहिए थी जो मेरे कंधे से कंधा मिलाकर चल सके। मेरे एक फ्रेंड ने मेरे लिए एक प्रोफाइल सिलेक्ट की जो बिलकुल मेरी पसंद से मैच कर गई। हम दोनों ने फोन के माध्यम से बातचीत करना शुरू किया। एक दिन एक-दूसरे की पसंद नापसंद पर बातें शुरू हुई तो पता चला कि मैडम की डिमांड्स बहुत ज्य़ादा हैं। मेरे खाने-पीने से लेकर मेरे कपडों तक का चयन वह अपनी पसंद से करना चाहती थी। हाल में ही दिल टूटने का दर्द झेल चुका था इसलिए

मैं एक और सिरदर्द नहीं चाहता था। मैंने उसे साफ-साफ मना करना ही बेहतर समझा।

विकास कुमार, मुंबई

शादी नहीं तो दोस्ती ही सही

फ्रेंडली प्रपोजल

जॉब ज्वॉइन करते ही पापा को मेरी शादी की चिंता होने लगी। पापा का दिल रखने के लिए मैं उनकी पसंद के दो-चार लडकों से मिली लेकिन उनमें से कोई भी मुझे पसंद नहीं आया। पापा मेरे चूजी स्वभाव को बहुत अच्छी तरह जानते थे इसलिए उन्होंने मुझे ऑनलाइन लडका ढंूढने की सलाह दी। मुझे भी उनका सुझाव जंच गया और मैंने मैट्रमोनियल साइट्स में रजिस्ट्रर कर लिया। कुछ दिनों की तलाश के बाद एक लडका मुझे पसंद आ गया पर बातों ही बातों में उसने मुझे बताया कि वह अपने शहर से बाहर नहीं जाना चाहता। चूंकिमेरी जॉब दूसरे शहर में थी और मैं अपने करियर से समझौता नहीं करना चाहती थी। इसलिए शादी की बात वहीं ख्ात्म हो गई और वहीं से हम दोनों की दोस्ती की शुरुआत हो गई, जो आज भी कायम है।

शिखा राजपूत, लखनऊ

जब पल्ले पडा देवदास

इमोशनल प्रपोजल

पिछले दिनों मेरी बडी बहन ने एक मैट्रमोनियल साइट पर मेरी प्रोफाइल बना दी। कुछ ही दिनों में कई लोगों के प्रपोज्ाल्स दिखने लगे। चूंकि घर में मेरी शादी को लेकर लोग कुछ ज्य़ादा ही उत्साहित थे, इसलिए मेरी बहन ने फटाफट कुछ लडकों को शॉर्ट लिस्ट किया और मुझसे उनके नंबर शेयर किए। मैंने उसमें से एक लडके की प्रोफाइल सिलेक्ट की जो मेरी प्रोफाइल से थोडा मैच कर रही थी। दीदी के कहने पर मैंने उससे बात करनी शुरू तो की लेकिन मुझे उसका स्वभाव कुछ अजीब सा लगा। पहले दिन से ही वह शादी के सपने सजाने लगा था। मैं उसे फ्यूचर से पहले वर्तमान के बारे में सोचने को कहती तो वह इमोशनल हो जाता कि मैं तुम्हारे साथ ही पूरी जिंदगी बिताना चाहता हूं। मुझे उसकी ऐसी बातों पर हैरानी होती क्योंकि अभी हमें बात किए एक महीना मात्र हुआ था। उसका इमोशनल होना बुरा नहीं लगता था, बस वह हर बात में सपने सजाने लगा था। मैंने ये सब बातें जब दीदी के साथ शेयर कीं तो वह हंस पडी और बोलीं कि जल्दी से इस लडके से पीछा छुडाओ वरना आठवीं बार 'देवदास फिल्म बन जाएगी। कुछ दिनों बाद घरवालों ने कुंडली मिलाई तो वह नहीं मिली। उस लडके का तो पता नहीं, मगर इस बात को सुनकर मेरी ख्ाुशी का ठिकाना न रहा।

गुंजन, देहरादून

प्रस्तुति : वंदना यादव

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