जीवन में उतार-चढाव आते रहते हैं। कई बार अपनों से आर्थिक मदद लेने की आवश्यकता पडती है। रिश्तों में पैसे का लेन-देन मुश्किल होता है लेकिन अगर किसी से कभी आर्थिक मदद मांगनी पडे या किसी को देनी पडे तो कुछ व्यावहारिक बातों का ध्यान रखना जरूरी है ताकि पैसा संबंधों में दरार की वजह न बने। पैसे को भले ही हाथ का मैल समझा जाता हो मगर जब यह हाथ में नहीं होता, पसीना छूटने लगता है। यह सच है कि आर्थिक मदद मांगना अच्छा नहीं लगता, फिर भी कई बार ऐसा करना पडता है। आज बैंकों की ऋण संबंधी शर्तें इतनी सुविधाजनक हैं कि नौकरीपेशा लोगों के लिए कर्ज लेना आसान हो गया है लेकिन यह सुविधा हर किसी को नहीं मिलती। चाहे या अनचाहे कई बार दोस्तों-रिश्तेदारों से उधार लेने की जरूरत पडती है। कहा जाता हैकि रिश्तों में लेन-देन से बचना चाहिए। इसकी एक वजह यह है कि तय समय पर पैसा न लौटाया गया तो संबंध बिगड सकते हैं। इससे बचने के लिए कई लोग जीवन का उसूल बना लेते हैं कि वे दोस्तों-रिश्तेदारों से उधार नहीं लेंगे। गंभीर बीमारी, दुर्घटना, नौकरी जाना, आर्थिक नुकसान, चोरी-डकैती या बिजनेस में क्षति...जैसी स्थितियों में लोगों को मदद मांगने की आवश्यकता पडती है।

स्थिति का आकलन मदद कैसे दें या लें? दोनों स्थितियों में जरूरत को समझते हुए कदम उठाना होगा। गलतफहमी से बचने के लिए ऐसा करना जरूरी है। क्या वाकई जरूरत इतनी बडी है कि बिना मांगे काम नहीं चलेगा? यह भी सोचें कि क्या आर्थिक मदद के अलावा भी कोई विकल्प हो सकता है कि मौजूदा संकट कम हो सके। यह तभी संभव है, जब स्थिति की गंभीरता पर विचार करें।

स्पष्ट बात करें रुपये-पैसे के संबंध में भावनाओं को दरकिनार करते हुए व्यावहारिक ढंग से बातचीत जरूरी है। पैसा मांगते या देते समय हर पहलू पर स्पष्ट बातचीत करें ताकि भविष्य में कोई शिकायत न हो। पहले ही समझ लें कि पैसा कब और कैसे वापस किया जाएगा। अगर किस्तों में इसे चुकाना हो तो किस्त की रकम भी तय कर लें। सभी जरूरी दस्तावेज बातचीत के दौरान सामने रखें। मांगने वाले से कभी यह न पूछें कि वह इतने पैसों से क्या करेगा...। इससे वह हर्ट हो सकता है।

समय तय करें पैसे उधार लेने के बाद उसे चुकाना भी होता है। इसके लिए समय निर्धारित करें क्योंकि कोई भी अपना पैसा लंबे समय के लिए नहीं दे सकता। सही समयावधि निश्चित करें ताकि पैसा आसानी से चुका सके। अवधि ऐसी हो कि चुकाने वाले को भी परेशानी न हो और देने वाले को भी दुविधा न हो। अमाउंट छोटा है तो उसे जल्दी चुकाने की कोशिश करें। अगर अमाउंट बडा है और तय नहीं कर पा रहे हों कि वास्तव में कितने समय बाद उसे चुका पाएंगे तो एक निर्धारित धनराशि के लिए समय फिक्स करें, उसे जल्दी लौटाएं और बाकी के लिए थोडा समय मांग लें।

दबाव से बचें पैसा लेने और देने वाले को स्थितियों और रिश्तों के दबाव से बचना चाहिए। पैसा देने वाले को भी अपनी आर्थिक स्थिति का ध्यान रखते हुए मदद करनी चाहिए। अगर किसी ने इतने ज्यादा अमाउंट की मांग की हो, जिसकी व्यवस्था नहीं कर सकते या वह धनराशि देने के बाद स्वयं आर्थिक संकट से घिरने का अंदेशा हो तो इसे पहले ही स्पष्ट कर दें। बिना किसी दुविधा के साफ तरीके से सामने वाले को बताएं कि इतना अमाउंट नहीं दे सकेंगे। पैसा नहीं है तो स्पष्ट मना करें। गोलमोल जवाब न दें। सामने वाले की आर्थिक स्थिति का ध्यान रखते हुए मदद मांगनी चाहिए। अगर मांगने वाला स्पष्ट नहीं होगा या किसी तरह का दबाव महसूस करेगा तो देने वाले को भी साफ बात करने में दिक्कत होगी।

ब्याज न लें रिश्तेदारी या दोस्ती में पैसे का आदान-प्रदान कर रहे हैं तो कोशिश करें कि इसमें ब्याज न लगाएं। मांगने वाला भले ही तात्कालिक रूप से इसके लिए तैयार हो लेकिन खुशी से वह ऐसा नहीं करेगा। वह अगर दोस्त या संबंधी से पैसा मांग रहा है तो इसका साफ अर्थ यही है कि वह बाहर से लोन इसलिए नहीं लेना चाहता कि इस पर उसे महंगा ब्याज देना होगा। पैसे के लेन-देन में कभी किसी की उदारता या स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश न करें।

धोखे में न फंसें रोहित (काल्पनिक नाम) कहते हैं, 'पैसा देते हुए इस पहलू पर जरूर गौर करें कि सामने वाला भविष्य में पैसा वापस कर सकेगा या नहीं। मैंने एक बार अपने बेरोजगार दोस्त की मदद इसलिए की क्योंकि उसके पास मकान का किराया चुकाने जितना भी पैसा नहीं था। नौकरी जाने से कुछ ही दिन पहले उसने किस्त पर वॉशिंग मशीन भी खरीदी थी। मैं जानता था कि वह जल्दी पैसा वापस नहीं कर सकेगा लेकिन मैंने उसे 20 हजार रुपये दिए। उसकी स्थितियां ठीक नहीं हुईं और मुझे भी अपना पैसा वापस नहीं मिला। अमलेंदु ने भी अपने दूर के रिश्तेदार की मदद की थी, जिन्होंने गंभीर बीमारी का हवाला देते हुए आर्थिक मदद मांगी थी। अमलेंदु ने कुछ भी नहीं सोचा और तुरंत उनके अकाउंट में 30 हजार रुपए ट्रांस्फर कर दिए। बाद में उन्हें पता चला कि वह रिश्तेदार इसी तरह कई लोगों से पैसे मांग चुके हैं जबकि वह बीमार भी नहीं थे।

याद रखें ये बातें 1. पैसा मांगने को आदत न बनाएं। तभी मांगें, जब बाकी विकल्प न उपलब्ध हों। 2. लेन-देन की प्रक्रिया के दौरान किसी परिचित को साथ रखें। 3. जब तक उधार नहीं चुका पाते, अपने हर गैरजरूरी खर्च पर रोक लगाएं। 4. समय पर पैसा वापस नहीं कर पा रहे तो मित्र या संबंधी को पहले ही बता दें। उनसे मिलें और विनम्रता से अपनी स्थिति बताएं। 5. पैसा इतना ही दें कि वापस न मिलने पर भी कोई दुख न हो।