शादी के शुरुआती दौर में कई बार कपल्स भावनात्मक या शारीरिक स्तर पर एक-दूसरे से कंफर्टेबल नहीं हो पाते। काउंसलर्स के पास ऐसी कई शिकायतें आती हैं, जिन्हें थोडे से धैर्य, परिपक्वता और समझदारी से खुद भी सुलझाया जा सकता है।

इंटीमेसी मुश्किल प्रक्रिया है कई बार रोमैंस के बिना भी सेक्सुअल इंटीमेसी हो जाती है, जबकि कई बार रोमैंस के बावजूद इंटीमेसी नहीं पनप पाती। इमोशनल कनेक्ट या इंटीमेसी एक-दूसरे से संवाद या शेयरिंग के जरिये ही पैदा होती है। यह एक मुश्किल प्रक्रिया है। भावनात्मक स्तर पर जुडाव न होने से सेक्स संबंधों पर भी विपरीत प्रभाव पडता है। दिल से जुडऩे के लिए अपने मन व दिमाग को खुला रखना भी जरूरी है। पारिवारिक संस्कारों, परवरिश और सामाजिक नियमों में भी वह कारण छिपे होते हैं, जिनमें लगाव न पैदा होने जैसी शिकायतें जन्म लेती हैं। जो पति-पत्नी बच्चों के सामने एक-दूसरे के प्रति अपनी भावनाओं का इजहार नहीं कर पाते, उनके बच्चे भी भावनाएं व्यक्त करने में असहज रहते हैं। इसी तरह अगर किसी परिवार में किस या हग करना सामान्य समझा जाता हो तो बच्चों में भी इन शारीरिक क्रियाओं के प्रति सहजता रहती है। कुछ संस्कृतियों में किस करना अभिवादन का तरीका है लेकिन भारत में इसे सामान्य नहीं समझा जाता।

रीनू (बदला हुआ नाम) के परिवार में किस या हग करना सामान्य बात है लेकिन शादी के बाद उन्हें ससुराल में दिक्कतें हुईं। वहां किसी को गले लगाना या किस करना अच्छा नहीं माना जाता था। वह कहती हैं, 'कई बार फीलिंग्स के लिए उचित शब्द नहीं मिल पाते। हाथ मिलाने, गले लगाने, किस या हग करने से गर्मजोशी का एहसास होता है। देविका (बदला हुआ नाम) की शादी को एक वर्ष हुआ है। पति से उनकी शिकायत है कि सेक्स क्रिया के दौरान वह आई कॉन्टैक्ट नहीं करते, न रोमैंटिक बातें करते हैं। वैसे वे खूब बातें करते हैं लेकिन इमोशनल स्तर पर कनेक्ट करने में सहज नहीं हैं।

ऐसे लाएं संतुलन परिवेश और परवरिश का अंतर इमोशनल कनेक्ट में बाधक हो सकता है। दोनों पार्टनर्स समान धरातल पर खडे होकर रिश्ते को ऊर्जावान बनाएं, इसके लिए एक्सपर्ट डॉ. राजेंद्र यादव दे रहे हैं टिप्स-

1. प्रयास करते रहें : रिश्ते की शुरुआत अपरिचय से होती है। इंटीमेसी में थोडा समय लगता है, जो कभी-कभार लंबा खिंच सकता है। पार्टनर कंफर्टेबल है तो समय कम हो जाता है अन्यथा यह लंबा हो सकता है। प्रयास जारी रहेंगे तो सफलता जल्दी मिलेगी।

2. दोस्ती जरूरी : कंफर्ट का एहसास एक ही चीज करा सकती है, वह है दोस्ती। सामने वाले के शब्दों और बॉडी लैंग्वेज से उसकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें, उसके दोस्त बनें....। एक बार दोस्ती पनप जाए तो इंटीमेसी में वक्त नहीं लगेगा।

3. पहल करें : यदि पार्टनर कंफर्टेबल नहीं है तो स्वयं पहल करें। रोमांचक गतिविधि जैसे मूवी देखने, लॉन्ग ड्राइव पर जाने, रोमैंटिक म्यूजिक सुनने से पहल संभव है।

4. संवाद के लिए तैयार रहें : रिश्तों में खुलापन तभी आएगा, जब आपसी संवाद होगा। रिश्ते से पार्टनर की इच्छाएं व अपेक्षाएं क्या हैं, यह जानना जरूरी है।

5. लगाव जाहिर करें : शोध बताते हैं कि जिन बच्चों को बडों के बीच में बोलने पर अधिक रोका-टोका जाता है, उन्हें बाद में पार्टनर के साथ फिजिकल-इमोशनल इंटीमेसी में समय लग सकता है। झेन गुरु ओशो पुस्तक 'इंटीमेसी : ट्रस्टिंग वनसेल्फ एंड द अदर में लिखते हैं, 'इंटीमेसी का अर्थ है, दिल की गहराई से निकलने वाली भावना। फीलिंग नहीं होगी तो इंटीमेसी भी नहीं होगी। दिल से पूछें कि क्या वाकई आपके मन में दूसरे के लिए भावनाएं हैं? अगर इसका जवाब नहीं दे पा रहे हैं तो खुद को टटोलें। भरोसा रखें, एक दिन वह लगाव भी जरूर पैदा होगा, जिसका आपको इंतजार है।