उसकी यही आदत मुझे अच्छी नहीं लगती, उसे दूसरों की असुविधा का जरा भी खयाल नहीं रहता, इसीलिए मैं उससे बात नहीं करना चाहती...हमें अपने आसपास अकसर ऐसे जुमले सुनाई देते हैं पर इन छोटी-छोटी बातों को हम नजरअंदाज कर कर देते है, जो सर्वथा अनुचित है। हमें सचेत ढंग से अपनी कुछ गलत आदतों को पहचान कर उनमें बदलाव लाने की कोशिश करनी चाहिए। आइए जानते हैं कुछ ऐसी ही आदतों के बारे में- १. वक्त का पाबंद न होना कुछ लोग स्वभाव से लेट लतीफ होते हैं। ऐसे लोग हर काम देर से करते हैं और अपनी इस आदत की वजह से दूसरों का भी कीमती वक्त बर्बाद करते हैं। इससे पर्सनल और प्रोफेशनल दोनों तरह के संबंध खराब होने की आशंका रहती है। ट्रैफिक जाम, सुबह समय पर नींद न खुलना, जैसे कई बहाने इनके पास पहले से तैयार होते हैं। आकस्मिक रूप से आने वाली कुछ बाधाओं पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता। इसलिए हमें अपना टाइम मैनेजमेंट इस ढंग से करना चाहिए कि अगर रास्ते में गाडी खराब हो जाए या ऐसी ही कोई समस्या आ जाए, तब भी देर न हो। २. ताक-झांक की आदत रिश्तों में दूसरों की निजता का सम्मान करते हुए उन्हें थोडा पर्सनल स्पेस देना बहुत जरूरी होता है। कुछ लोग दूसरों के साथ अपने मन की बातें शेयर नहीं करना चाहते। ऐसे में उनसे बातचीत के दौरान उनके वैवाहिक जीवन, रिलेशनशिप, करियर आदि के बारे में बेवजह सवाल नहीं पूछने चाहिए। ऐसी बातें दूसरों को नापसंद हो सकती हैं और इससे कई बार लोगों के आपसी संबंध खराब हो जाते हैं। ३. बिना मांगे सलाह देना भले ही किसी को जरूरत न हो पर कुछ लोग दूसरों को बिन मांगी सलाह देने को हमेशा तैयार रहते हैं। कभी-कभी ऐसा चल सकता है लेकिन जब मुफ्त सलाहें ज्यादा हो जाएं तो आसपास के लोग चिढऩे लगते हैं और ऐसे लोगों से बचने की कोशिश करने लगते हैं। इसलिए जब तक किसी को आपकी मदद की जरूरत न हो, अपनी ओर से उसे कोई ४. व्यंग्यात्मक लहजा यह सच है कि हंसी-मजाक से रिश्तों में गर्मजोशी बनी रहती है पर कुछ लोग सहज हास्य-बोध और कटु व्यंग्य का फर्क समझ नहीं पाते और मजाक में कुछ ऐसी बातें कह जाते हैं, जिससे दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुंचती है। इसलिए मजाक में भी हमें दूसरों से कोई ऐसी बात नहीं करनी चाहिए, जो उनके दिल को चुभ जाए। ५. अपनी तारीफ करना कुछ लोग बेहद आत्ममुग्ध होते हैं और ये जब भी किसी दोस्त या रिश्तेदार से मिलते हैं, उसके सामने केवल अपनी या अपने परिवार की प्रशंसा कर रहे होते हैं। ये दूसरे व्यक्ति से उसका हाल तक नहीं पूछते और उसके सामने लगातार अपनी ही उपलब्धियों और गुणों का बखान करते रहते हैं। शुरुआत में लोग शिष्टाचारवश इनकी ऐसी बातें सुन लेते हैं पर बाद में वे इनसे चिढऩे लगते हैं। इसलिए दूसरों से बातचीत के दौरान उन्हें भी बोलने का मौका देना चाहिए। ६. ब्लेम करना चाहे परिवार हो या ऑफिस, कुछ लोग हर जगह अच्छे कार्यों का क्रेडिट खुद लेना चाहते हैं और मामूली सी चूक होने पर भी सारा दोष दूसरों पर डाल देते हैं। 'सारी गडबड तुम्हारी वजह से हुई है, मैंने तो पहले ही मना किया था, तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। वे बार-बार ऐसे वाक्य दोहराते हैं। ऐसी बातें सुनकर इनके करीबी लोग इनसे चिढऩे लगते हैं। इसलिए दूसरों को ब्लेम करने के बजाय विनम्रता से अपनी भूल स्वीकारना सीखें। गलती मान लेने से इंसान छोटा नहीं हो जाता बल्कि दूसरों की नजरों में उसकी इज्जत बढ जाती है। ७. निंदा करना कुछ लोग पीठ के पीछे अकसर दूसरों की बुराई कर रहे होते हैं। जब किसी तीसरे व्यक्ति के जरिये उसे ऐसी बातें मालूम होती हैं तो वह उदास हो जाता है और आपसी संबंधों पर भी इसका बुरा असर पडता है। इसलिए दूसरों की बुराई करने से हमेशा बचना चाहिए और अगर कोई व्यक्ति आपके सामने ऐसा करता है तो कभी भी उसकी बातों पर अपनी सहमति जाहिर न करें। इससे उसकी ऐसी आदतों को बढावा मिलेगा और न चाहते हुए भी दूसरों की बुराई करने वाले लोगों में आपका नाम शामिल हो जाएगा। इसलिए अगर आपको किसी व्यक्ति से कोई शिकायत है तो औरों से उसकी बुराई करने के बजाय शालीनता भरे शब्दों में उसे यह समझाएं कि आपकी इस बात से मुझे बहुत दुख होता है। इससे वह व्यक्ति आपकी परेशानी समझ जाएगा और उसके साथ आपके रिश्ते में सहजता बनी रहेगी। ८. चीजें वापस न करना जरूरत के वक्त दूसरों की मदद लेने में कोई बुराई नहीं है पर हमेशा सहयोग मांगने की आदत न डालें। इसके अलावा आकस्मिक स्थितियों में खुद भी दूसरों की सहायता करने के लिए सहर्ष तैयार रहें। कुछ लोग अकसर अपने पडोसियों से रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजें मांग कर ले जाते हैं और काम हो जाने के बाद वापस करना भूल जाते हैं। इसी तरह कुछ लोग पैसे उधार लेकर वापसी में बहुत देर लगाते हैं। ऐसी आदतों से न केवल व्यक्ति का इंप्रेशन खराब होता है बल्कि रिश्तों में भी कडवाहट आ सकती है। इसलिए जहां तक संभव हो, दूसरों से चीजें, खासतौर पर पैसे न मांगें। अगर कभी ऐसी नौबत आए तो मांगते वक्त ही उसे यह जरूर बता दें कि आप उसे पैसे कब तक लौटा पाएंगे और अपना कर्ज सही वक्त पर चुका दें। अगर किसी वजह से पैसे वापस करने में देर हो रही हो तो उस व्यक्ति को सही कारण बताकर उससे थोडे दिनों की मोहलत मांग लें ताकि उसके मन में आपके लिए किसी गलतफहमी की गुंजाइश न रहे। ९. अनावश्यक सहानुभूति अपनों की परेशानी देखकर सभी को दुख होता है। अगर आपका कोई करीबी व्यक्ति मुश्किल में है तो खुद आगे बढ कर उसकी मदद करें। ऐसा नहीं कर सकते तो अपने स्नेहपूर्ण व्यवहार से उसे इस बात का एहसास जरूर दिलाएं कि इस मुश्किल वक्त में आप उसके साथ हैं। हालांकि कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो मुश्किल वक्त में अपनों की मदद नहीं करते और उनके सामने अनावश्यक रूप से सहानुभूति भरी बातें करते हैं। मसलन, 'यह कैसा अनर्थ हो गया, आपके साथ बुरा हुआ, अब आपको बहुत परेशानी होगी, आपको देखकर मुझे बहुत दुख हो रहा है...। ऐसी बनावटी बातें सुनकर दुखी व्यक्ति का मन ज्यादा परेशान हो जाता है। अगर आप किसी की मदद नहीं कर सकते तो कोई बात नहीं पर हमदर्दी दिखाने के बहाने नकारात्मक बातें कर उसका मनोबल न गिराएं। १०. बेवजह बहस करना जहां चार बर्तन होंगे, वहां उनका आपस में टकराना स्वाभाविक है। यही बात रिश्तों पर भी लागू होती है। अगर कभी घर या ऑफिस में कुछ बातों को लेकर किसी से मतभेद हो भी जाए तो समझदारी इसी में है कि दूसरे व्यक्ति के सामने संक्षिप्त रूप में अपनी बात रखकर आप शांत हो जाएं। कुछ लोग छोटी-छोटी बातों को बेवजह बहस का मुद्दा बना देते हैं और उन पर लगातार बोलते रहते हैं। यह गलत आदत है। इससे दूसरे व्यक्ति को ग्लानि होती है और वह ऐसे लोगों से दोबारा बातचीत नहीं करना चाहता। इसलिए अगर कभी विवाद हो तो बातचीत के दौरान ऐसी अप्रिय स्थिति न आने दें। अगर आप इन सभी बातों का हमेशा ध्यान रखेंगे तो आपके रिश्तों में कभी कडवाहट नहीं आएगी।