यशराज बैनर की फिल्म 'रॉकेट सिंह : सेल्समैन ऑफ द ईयर' से 2009 में बॉलीवुड में डेब्यू करने वाली शाजान उसके बाद 'दिल तो बच्चा है जी' और 'हाउसफुल 2' जैसी मल्टीस्टारर मूवीज में भी नजर आई थीं। स्वभाव से बेहद खुशमिजाज शाजान से एक बातचीत। आप बॉलीवुड फिल्मों के बाद कुछ समय के लिए साउथ की फिल्मों में सक्रिय हो गईं। आगे क्या प्लैन्स हैं? यह सच है कि कुछ समय के लिए मैं तमिल व तेलुगु की फिल्मों में सक्रिय हो गई थी। छोटे से ब्रेक के बाद अब मैं बॉलीवुड में वापसी कर चुकी हूं। मैं एक क्रेजी कॉमेडी मूवी 'सॉलिड पटेल्स' कर रही हूं जिसके लिए मैंने गुजराती भी सीखी। उसके अलावा 'सिद्धार्थ' में महेश भट्ट की बेटी के किरदार में नजर आऊंगी। फिलहाल मैं अपनी हिंदी संवारने की कोशिश भी कर रही हूं। आपने करियर की शुरुआत थिएटर से की थी। अच्छा किरदार मिला तो क्या फिर से वहां जाना चाहेंगी? मम्मी-पापा के इसी इंडस्ट्री से होने के बावजूद मैंने कभी ऐक्ट्रेस बनने के बारे में नहीं सोचा था। पापा के एक दोस्त ने एक प्ले में भूमिका का प्रस्ताव रखा था, जिसे मैं न नहीं कह पाई थी। थिएटर की ओर मेरा रुझान अब भी है, मौका मिला तो प्ले जरूर करना चाहूंगी। अब मेरा सारा फोकस सिर्फ ऐक्टिंग की तरफ ही है। अभी तक आपने मल्टीस्टारर फिल्मों में ही काम किया है। आगे किस तरह की भूमिकाएं निभाना चाहेंगी? सोलो फिल्म हर कोई करना चाहता है, मेरे पास जब ऐसी किसी मूवी का प्रस्ताव आएगा तो मैं उसका हिस्सा जरूर बनना चाहूंगी। मैं चुनिंदा फिल्में करना चाहती हूं। मैं बैनर या ब्रैंड देखकर फिल्में साइन नहीं करती हूं, मेरे लिए मेरा किरदार ज्यादा अहमियत रखता है। कुछ अदद भूमिकाओं का इंतजार है फिलहाल। कह सकते हैं कि अब दर्शक मेरा नया वजर्न देखेंगे। 'टेक्नोलॉजी और सिनेमा'... इस पर आप क्या कहना चाहेंगी? आप सोशल मीडिया पर कितनी ऐक्टिव हैं? टेक्नोलॉजी के बिना सिनेमा का क्षेत्र अधूरा है। फिल्म की शुरुआत से लेकर उसके पोस्ट प्रोडक्शन तक, तकनीक का महत्व बहुत ज्यादा होता है। मैं खुद भी काफी टेक फ्रेंड्ली हूं। हालांकि, मैं हर लेटेस्ट गैजेट के लिए पागल नहीं होती हूं, फिर भी उसकी जरूरत को बखूबी समझती हूं। ट्विटर के माध्यम से मैं अपने फैंस से जुडी रहती हूं, वहां सिर्फ काम से संबंधित बातें ही होती हैं, जबकि फेसबुक मेरे लिए दोस्तों के संपर्क में रहने का एक जरिया है। आप खुद को कैसे परिभाषित करेंगी? अकसर लोग मुझे गंभीर समझते हैं, जबकि मैं बेहद खुशमिजाज इंसान हूं। मुझे जोक्स क्रैक करना अच्छा लगता है, लोगों की नकल उतारने में भी बहुत मजा आता है। मुझे खाने से प्यार है और अब थोडा-थोडा खाना बनाना सीख भी रही हूं। हैंगआउट के नाम पर मुझे अपने घर में रहना अच्छा लगता है। दीपाली पोरवाल