प्यार और दोस्ती, यह दो ऐसे एहसास हैं, जो शादी के बंधन को हमेशा के लिए अटूट बना देते हैं। प्यार केवल महसूस किया जा सकता है पर दोस्ती निभाई जाती है। सरवर आहूजा और अदिति शर्मा इसके साक्षी हैं। सात साल की दोस्ती को उन्होंने शादी में तब्दील कर दिया। मगर सरवर और अदिति की दोस्ती आज भी बरकरार है। अदिति 'मौसम', 'खन्ना एंड अय्यर' और 'लेडीज वर्सेस रिकी बहल' जैसी फिल्मों में प्रमुख भूमिका में दिख चुकी हैं। वहीं सरवर फिल्म 'खन्ना एंड अय्यर', 'ज्योति' और 'दिया और बाती हम' धारावाहिकों में मुख्य किरदार निभा चुके हैं। काफी समय बाद सरवर और अदिति एंड टीवी पर आने वाले धारावाहिक 'गंगा' में एक साथ स्क्रीन शेयर कर रहे हैं। संघर्ष ने जोडा रिश्ता सरवर : हम दोनों की मुलाकात टैलेंट शो जी सिने स्टार की खोज से हुई थी। यह साल 2004 की बात है। हमने साथ में 'खन्ना एंड अय्यर' में काम किया। काम के सिलसिले में हमारी मुलाकात होती थी। हम दोनों साथ मिल कर करियर के लिए संघर्ष कर रहे थे। साथ फिल्म करने के कारण हमें एक-दूसरे के साथ अधिक समय मिला। हम एक-दूसरे को समझने लगे थे। हमारी सोच मिलने लगी थी। हम अच्छे दोस्त बन गए। हम दोनों की पसंद एक जैसी है। इस वजह से हम एक-दूसरे के करीब आए। अदिति : किसी भी रिश्ते की बुनियाद दोस्ती होती है। दोस्ती के कारण ही हम शादी के बंधन में बंध पाए हैं। शादी से पहले हमें रिश्ते को परखने का खयाल नहीं आया। हमारी दोस्ती कब प्यार में बदल गई, एहसास नहीं हुआ। हमने एक-दूसरे के समक्ष शादी का प्रस्ताव कभी नहीं रखा। दोनों परिवारों ने आपस में बात की और 13 नवंबर 2013 को हम शादी के पवित्र बंधन में बंध गए। स्वभाव भा गया सरवर : शादी से पहले मुझे अदिति की मासूमियत भा गई थी। वह अभी भी वैसी ही हैं। वह जमीन से जुडी हुई इंसान हैं। उनकी खूबी है कि अगर उदास भी हों तो भी सबसे विनम्रता से बात करती हैं। आज की लडकियों में दिखावा अधिक होता है। अदिति साफ दिल की हैं। वह शो बाजी में विश्वास नहीं करती हैं। उनका स्वभाव, समझदारी और उनकी हर खूबी लाजवाब है। उनमें वे सारे गुण हैं, जो मुझे मेरी पत्नी में चाहिए थे। अदिति : सरवर मेरे विपरीत हैं। कहते हैं न, ऑपजिट्स अट्रैक्ट्स। हमारे रिश्ते में वही बात है। मैं जल्दी निर्णय नहीं ले पाती हूं। मैं हमेशा दुविधा में रहती हूं। सरवर आसानी से फैसला ले लेते हैं। कोई भी छोटी या बडी बात हो, उन्हें सही और गलत का अंदाज तुरंत हो जाता है। वह जिस तरह लोगों से मिलते हैं, उन्हें सम्मान देते हैं...मुझे उनका यह स्वभाव बहुत आकर्षित करता है। परिवार का मिला साथ अदिति : परिवार को मनाने में कोई समस्या ही नहीं हुई। भाग के शादी करें, ऐसा कोई दिलचस्प वाकया हुआ नहीं। मैं पंजाबी हूं। सरवर भी पंजाबी हैं। फिर क्या, हो गई शादी। सरवर : हम दोनों शिक्षित हैं। संस्कारी परिवार से आते हैं। हमारा करियर अच्छी रफ्तार में चल रहा था। हमारे माता-पिता शादी से पहले हमारे रिश्ते के बारे में जानते थे। परिवार के पास शादी के लिए मना करने की कोई वजह नहीं थी। इस वजह से परिवार को राजी करने में समस्या नहीं हुई। साधारण तरीके से हुई शादी सरवर : हमारी शादी साधारण तरीके से हुई थी। तकरीबन दो सौ मेहमान शादी में आमंत्रित थे। जो हमारे लिए अच्छा सोचते हैं, हमने उनके आशीर्वाद से अपने रिश्ते का शुभारंभ किया। शादी के सात महीने तक हम दोनों काम में मशगूल थे। कहीं जाने का समय नहीं मिला। समय मिलते ही हम थाईलैंड गए। हमने वहां एडवेंचर खेलों का आनंद उठाया। अदिति : हम दोनों का यही सोचना था। हम शादी के नाम पर पैसे बर्बाद नहीं करना चाहते थे। हमने केवल अपने करीबी लोगों को शादी में बुलाया। शादी के बाद एक डांस पार्टी दी थी, जिसमें सभी ने खूब एंजॉय किया। रिश्तों में संयम की कमी अदिति : हम सभी में सहन-क्षमता खत्म हो रही है। पहले रिश्तों को जोडकर रखने की बात होती थी लेकिन हमारी पीढी में इतना संयम नहीं है। हम बिखरे रिश्ते को समेटने की कवायद नहीं करते हैं। कई बार हालात बदतर हो जाते हैं। ऐसे में रिश्तों को छोड आगे बढऩा सही होता है। सरवर : अब कोई रिश्ते पर मेहनत नहीं करना चाहता है। लोग मतलबी हो गए हैं। किसी भी रिश्ते में सब्र नहीं बचा। हम हाईटेक दुनिया में जीवनयापन कर रहे हैं। अब लोग सोशल मीडिया पर एक दूसरे को पसंद कर रहे हैं। डेटिंग एप्लीकेशन आ गए हैं। इसलिए आंखों में आंखें मिलाकर प्यार का इजहार नहीं किया जाता। शायद इस कारण रिश्तों के मायने बदल गए हैं। शहरों के साथ गांवों में भी यही हालात हैं। दोस्ती हमारी ताकत अदिति : हमारे रिश्ते की मजबूत डोर दोस्ती है। मैं कितनी भी परेशान रहूं, सरवर मुझे हमेशा खुश रखने की कोशिश करते हैं। वह मजाकिया स्वभाव के हैं। मैं नाराज हो जाऊं तो वह मुझे मना लेते हैं पर मुझे इन्हें मनाना नहीं आता है। अच्छा है कि वह अपने आप ही मान जाते हैं। सरवर : हमारे रिश्ते की शुरुआत दोस्ती से हुई थी, जो अब तक बरकरार है। हम दो दोस्तों की तरह जीवन व्यतीत कर रहे हैं। एक-दूसरे की बातों का बुरा नहीं मानते हैं। कोई बात बुरी लगे भी तो अगले दिन भूल जाते हैं। हम किसी बात को लंबा नहीं खींचते हैं। पसंद-नापसंद और स्वाद सरवर : अदिति को मेरी नेल बाइटिंग की आदत पसंद नहीं है। मुझे अदिति का खाना बनाना पसंद नहीं है। उन्हें खाना बनाने का शौक नहीं है। कभी-कभार मन करने पर खाना बना लेती हैं। अदिति पापड की सब्जी बढिय़ा बनाती हैं। मेरी मां ने ही उन्हें यह बनाना सिखाया है। बचपन से मुझे पापड की सब्जी पसंद है। अदिति : खाना बनाने में मेरी रुचि नहीं है। सरवर अगर ऐक्टर न होते तो शेफ जरूर होते। सरवर बहुत अच्छा खाना बना लेते हैं। हमारे घर मेहमान सरवर के हाथों के खाने की मांग करते हैं। वह राजमा और पंजाबी व्यंजन बनाने में माहिर हैं। साथ है जरूरी सरवर : अदिति कई बार देर रात घर आती हैं। मैं अदिति के घर आने से पहले अपने सारे जरूरी काम निपटा लेता हूं ताकि अदिति को पूरा समय दे पाऊं। इसी तरह जब मैं शूटिंग पर होता हूं, वह अपने काम खत्म कर लेती हैं। इस तरह हम एक-दूसरे को समय देने की कोशिश करते हैं। अदिति : हम लगातार शूटिंग करके काफी थक जाते हैं। ऐसे में जब भी कभी फुर्सत मिलती है, एक-दूसरे से बात करना, साथ समय बिताना हमें बहुत अच्छा लगता है। छुट्टी के दिन के लिए हम पहले से ही प्लैनिंग कर लेते हैं। तय कर लेते हैं कि बाहर जाना है या दोस्तों के साथ घूमना है। मुझे लगता है, इन्हीं छोटी-छोटी खुशियों से रिश्ता सदाबहार बना रहता है। [प्राची दीक्षित]