ऐक्टर-डायरेक्टर रोहित रॉय को टीवी की दुनिया में लंबा समय हो चुका है। कई फिल्मों में भी वह नज्ार आते रहे हैं। अभी वह मधुर भंडारकर की फिल्म 'कैलेंडर गर्ल', अंग्रेजी नाटक 'अनफेथफुली योर्स' के अलावा इन्वेस्टगेशन डिस्कवरी के क्राइम शो 'ख्ाूनी साया' को होस्ट कर रहे हैं।

दूरदर्शन के दिनों में एक चर्चित धारावाहिक था 'स्वाभिमान'। इसमें ऋषभ मलहोत्रा के किरदार में पहली बार डेब्यू किया था रोहित रॉय ने, जो छोटे-बडे पर्दे का जाना-पहचाना चेहरा हैं। वह अभी इन्वेस्टगेशन डिस्कवरी के क्राइम शो को होस्ट कर रहे हैं। उनसे 10 सवाल।

1. क्राइम शो होस्ट करने की वजह?

नयापन...। ऐसा शो मैंने पहले नहीं किया था। सीरियस, कॉमेडी वाली तमाम भूमिकाएं की हैं। डॉन की भूमिका भी कर ली है। 'ख्ाूनी साया' में एक अलग अनुभव मिल रहा था तो इसके लिए तैयार हो गया।

2. किन नए प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है अभी?

'ख्ाूनी साया..., (हंसते हुए) अभी तो मर्डर मिस्ट्रीज्ा ही हल कर रहा हूं। इसमें हर एपिसोड में हत्या के एक मसले को सुलझाया जाता है। इस तरह का पहला ही अनुभव है यह।

3. आप काफी सीनियर हो चुके हैं। सफलता के आपके सूत्र क्या हैं?

अभी तो स्ट्रगलर ही हूं मैं, सफल कहां हूं! ऐसा किसी घमंड में नहीं कह रहा हूं। मेरे लिए सफलता का अर्थ है- अपने काम को बेहतर ढंग से करना। जब ऐसा लगता है कि मैंने काम में बेस्ट दिया और जब अपनी मेहनत से संतुष्ट होता हूं तो वह पल सुकून भरा होता है। थिएटर मुझे बहुत पसंद है, अभी एक नाटक कर रहा हूं। जो भी काम सुकून और शांति दे, वह मेरे लिए सफलता है।

4. दिल के सबसे करीबी लोग...

मेरे पिता जो अब दुनिया में नहीं हैं। मां, बडे भाई और उनके दो बच्चे, पत्नी, बेटी...। ये लोग मेरे दिल के सबसे करीब हैं।

5. टेंशन-फ्री कैसे रहते हैं?

एक टेक्नीक है-बेटी क्यारा के साथ खेलता हूं। वह अब 12 साल की हो चुकी है। मेरा सबसे बडा स्ट्रेस-बस्टर है वह। इसके अलावा जिम जाकर पसीना बहाता हूं। पसीने के साथ शरीर से टॉक्सिंस भी बाहर निकल जाते हैं। मैं सबसे यही कहता हूं कि ख्ाुद को टेंशन-फ्री रखना है तो ख्ाूब पसीना बहाएं।

6. आपने इतने किरदार निभाए। किस भूमिका में ज्य़ादा मज्ाा आया?

फिल्म की थी-शूटआउट एट लोखंडवाला, इसमें फट्टू का पात्र निभाने में मुझे बहुत मज्ाा आया। यह गैंग का एक सदस्य था। इसके अलावा सब टीवी पर कॉमेडी शो है 'पीटर्सन हिल, जिसमें मैंने स्टेशन मास्टर की भूमिका निभाई है। ऐसे किरदार मुझे प्रभावित करते हैं।

7. जीवन का आपका फलसफा...

जिओ और जीने दो। ज्िांदगी एक ही बार मिलती है। हर इंसान अलग है। उसके जीने का अपना ढंग है। किसी को हानि पहुंचाए बिना, दूसरों की ज्िांदगी में ताक-झांक किए बिना आराम से जिएं, बिना टेंशन लिए।

8. संघर्ष के दिनों से कितना सीखा, कितना भुला दिया?

मेरा पहला ही सीरियल 'स्वाभिमान हिट रहा था। यानी तब तो संघर्ष से वंचित रह गया मैं। लेकिन पिछले 4-5 सालों से चुनौतियां सामने आ रही हैं कि कैसा काम किया जाए। इस बीच कई लोगों ने टीवी पर न दिखने का कारण भी पूछा, तो जवाब यही है कि मुझे अपने हिसाब से काम नहीं मिला। एक स्तर के बाद हर कोई अपने ढंग से काम करना चाहता है, मैं भी चाहता हूं।

9. छुट्टी के मूड में हों तो क्या करेंगे?

ईमानदारी से बताऊं तो ठंडी जगह जाकर चुपचाप बैठूंगा या सो जाऊंगा। मैं, पत्नी मानसी और बेटी क्यारा को यात्राएं बेहद पसंद है। अभी बेटी की छुट्टियां हैं तो एक महीने के लिए यूएस जा रहे हैं। फुर्सत होती है तो मुंबई के आसपास हिल स्टेशंस पर चले जाते हैं। कहीं न गए तो चुपचाप घर में बैठते हैं और परिवार के साथ समय बिताते हैं।

10. ख्ाुशियों की आपकी रेसिपी?

मां, पत्नी, बेटी ख्ाुश रहे....परिवार की ख्ाुशी ही मेरी सबसे बडी ख्ाुशी है। हर किसी के लिए ख्ाुशी की अलग रेसिपी होती है। किसी को घडी ख्ारीदने से ख्ाुशी मिलती है, किसी को टेक्नोलॉजी से, किसी को गाडी ख्ारीदने से....। मेरे लिए अपनों का ख्ाुश रहना सबसे बडी चीज्ा है। वे ख्ाुश हैं तो मैं भी ख्ाुश हूं।

इंदिरा राठौर

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