सखी का अप्रैल अंक लाजवाब था। लेख 'ऐसे करें स्किन केयर' और 'वजन है कि घटता नहीं' के जरिये सेहत संबंधी कई समस्याओं का समाधान मिल गया। कहानी 'मुझे माफ कर दो' पढकर मुझे बुजुर्गों की पीडा का एहसास हुआ। अब मैंने यह तय कर लिया है कि महीने में एक बार अपने शहर के ओल्डएज होम जाकर वहां रहने वाले बुजुर्गों की सेवा करूंगी। आपने मुझे एक अच्छे कार्य के लिए प्रेरित किया है। थैंक्यू सखी ।

नव्या सैनी

गुरदासपुर

-आकर्षक कवर से सुसज्जित सखी का मई अंक बेजोड था। गर्मी की छुट्टियों को ध्यान में रखते हुई दी गईं विशेष रचनाएं बहुत उपयोगी और जानकारीपूर्ण थीं। लेख 'बचें पैकेज टूर के धोखे से पढऩे के बाद मैं सचेत हो गई। 'सेहत के साथ शुभ हो यात्रा में दिए गए सुझाव मेरे पूरे परिवार के लिए बहुत उपयोगी साबित हुए। कवर स्टोरी 'बदल रही है मां में बिलकुल सही कहा गया है कि समय के साथ भारतीय मां अपनी अलग पहचान बना रही है, पर उसकी ममता हमेशा की तरह अनमोल और सच्ची है। लेख 'तारीफ तो बनती है पठनीय था। मैं भी इस बात से सहमत हूं कि हमें दूसरों की प्रशंसा में कंजूसी नहीं बरतनी चाहिए।

निवेदिता अग्रवाल, जयपुर

-सखी का मई अंक शानदार था। मदर्स डे के अवसर पर प्रकाशित कवर स्टोरी 'बदल रही है मां दिल को छू गई। वाकई आज की मां बदलते वक्त के साथ कदम मिलाकर चल रही है। यात्रा पर आधारित विशेष रचनाएं भी लाजवाब थीं। लेख 'सफर पर जाने से पहले में यात्रा की तैयारी से जुडे बहुत उपयोगी सुझाव दिए गए थे। 'ट्रैवल फैशन पढकर यात्रा पर जाने से पहले मेरे लिए आउटफिट्स की शॉपिंग आसान हो गई। स्थायी स्तंभ भी रोचक थे।

दीपिका शर्मा, मेरठ

-सखी के मई अंक की जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है। छुट्टियों के इस मौसम में यात्रा पर विशेष रचनाएं प्रकाशित करके आपने हमारी कई समस्याओं का समाधान कर दिया। मैं संयुक्त परिवार में रहती हूं और हम सपरिवार छुट्टियों में घूमने जाने की योजना बना रहे हैं। ऐसे में लेख 'चलेंगे साथ मिलकर में दिए गए सुझाव बहुत उपयोगी थे। लेख 'घर को बनाएं ख्ाुशनुमा पढकर मैंने भी बदलते मौसम के अनुसार अपने घर के इंटीरियर को नया लुक दिया। 'हीट स्ट्रोक से कैसे बचें में दिए सभी सुझावों पर मैं पूरी तरह अमल करती हूं। पत्रिका के साथ संलग्न 'दिल्ली डिजयार की रचनाएं भी रोचक थीं।

उपासना गौड, दिल्ली

-साज-सज्जा और रचनाओं की दृष्टि से सखी का मई अंक अद्वितीय था। कवर स्टोरी 'बदल रही है मां में समय के साथ बदलती भारतीय स्त्री की बेहद स'ची और सुंदर तसवीर पेश की गई है। मैं इस साल छुट्टियों में सपरिवार घूमने जाने की योजना बना रही थी। ऐसे में लेख 'ताकि घर रहे सुरक्षित पढऩे के बाद मेरा ध्यान उन जरूरी बातों की ओर गया, जिन्हें हम अकसर नजरअंदाज कर देते हैं। लेख 'टैनिंग से बचाए तरबूज पढऩे के बाद अब मैं नियमित रूप से इसका सेवन करती हूं। इसके अलावा लेख 'चुनें हेल्दी हेल्थ पॉलिसी पढकर अब मैं ऐसे मामलों में बहुत सजगता बरतती हूं। लेख 'फस्र्ट इंप्रेशन से बनेगी बात में दिए गए सुझाव बहुत उपयोगी थे। कहानी 'वायदा पढ कर मेरी आंखें भर आईं।

अर्पिता मिश्रा, लखनऊ

-सखी मेरे पूरे परिवार की प्रिय पत्रिका है। इसका मई अंक बेहतरीन रचनाओं से भरपूर था। लेख '4 क्विक समर मेकअप मेरी कॉलेज जाने वाली बेटी को बहुत पसंद आया। इसमें 'आस्था और 'अध्यात्म जैसे स्तंभ मेरी सासू मां को विशेष रूप से पसंद आते हैं। मेरे पतिदेव सबसे पहले 'मनी मैनेजमेंट पढते हैं तो मैं इसकी रेसिपीज को अपनी किचन में जरूर आजमाती हूं। कहानियां भी दिल को छू जाती हैं। सही मायने में यह संपूर्ण पारिवारिक पत्रिका है।

कीर्ति रौतेला, देहरादून

-सखी के मई अंक में सभी रचनाएं पठनीय थीं, पर मुझे लेख 'ख्ाूबसूरती, जरूरत है, नजरिया बदलने की ख्ाासतौर पर पसंद आया। इसमें व्यक्तित्व की बाहरी सुंदरता से जुडी रूढिय़ों और पूर्व धारणाओं को बहुत सटीक ढंग से उठाया गया है। परवरिश में भी अ'छी सलाह दी गई थी।

रश्मि सिंघल, गुडग़ांव

-सखी मेरी प्रिय पत्रिका है। 1&6 अनमोल पृष्ठों से सुसज्जित इसका मई अंक शानदार था। 'घर की थाली में दी गईं आम की रेसिपीज लाजवाब थीं। 'हेल्थ वॉच जानकारीपूर्ण था। कवर स्टोरी 'बदल रही है मां में बेहद सम-सामयिक मुद्दे को बडी संजीदगी से उठाया गया था। यात्रा पर आधारित इसकी विशेष रचनाएं हमारी छुट्टियों को सुखद बनाने में सहायक होंगी।

पल्लवी अग्रवाल, गाजियाबाद

-सखी के सभी लेख जीवन के प्रकाश स्तंभ की तरह एक नई राह दिखाते है। खानपान और सेहत संबंधी रचनाएं हमें ऊर्जावान बनाए रखती हैं। इसका साहित्य पाठकों के मन-मस्तिष्क पर अमिट छाप छोड जाता है। पत्रिका के अप्रैल अंक में प्रकाशित कहानी 'मुझे माफ कर दो हृदयस्पर्शी थी।

जी.ठाकुर, छिन्दवाडा (मप्र.)

- सखी का मई अंक मेरे लिए रंग-बिरंगे फूलों से सजे आकर्षक गुलदस्ते की तरह था। हमेशा की तरह इसकी रचनाएं अपने ज्ञान की सुगंध से हमारे मन को सुवासित कर रही थीं। वैसे तो पत्रिका के इस अंक में सभी रचनाएं पठनीय थीं, लेकिन 'मिसाल के अंतर्गत बिहार की जया देवी के जीवन से जुडी बातें बेहद प्रेरक थीं। 'करियर के अंतर्गत स्टार्टअप के बारे में बहुत उपयोगी जानकारियां दी गई थीं। लेख 'स्मार्ट फोन को रखें सेफ पढऩे के बाद इसमें दिए गए सुझावों पर मैं पूरी तरह अमल करती हूं। लेख 'फूड जो बनाए मूड पढकर खानपान से जुडी रोचक बातें जानने को मिलीं।

प्रेरणा बंसल, सोनीपत

- मुझे हर महीने सखी का बेसब्री से इंतजार रहता है। पत्रिका का मई अंक देखा। यात्रा से जुडी बेहतरीन रचनाओं की वजह से पत्रिका का यह अंक संग्रहणीय बन गया है। मैं तीन स्कूली बच्चों की मां हूं। जब भी उन्हें पिकनिक पर जाना होता था तो मैं समझ नहीं पाती थी कि उनके लिए नया क्या बनाऊं? 'पिकनिक स्नैक्स में दी गई रेसिपीज ने मेरी इस समस्या का समाधान चुटकियों में कर दिया। इसके अलावा 'यात्रा : जिनसे मिली सीख में पाठकों के अनुभव मेरे लिए भी बहुत मददगार साबित हुए। लेख 'फूड जो बनाए मूड से स्वाद और मूड के आपसी रिश्ते के बारे में कई रोचक और नई बातें जानने को मिलीं। 'सलाहकारों से सावधान ने हंसने पर मजबूर कर दिया।

राधिका यादव, पटना

- मैं सखी की नियमित पाठिका हूं और कुकिंग मेरी हॉबी है। पत्रिका का मई अंक देखा। गर्मियों के इस मौसम में 'जायका के अंतर्गत मॉकटेल्स की रेसिपीज प्रकाशित करके आपने दिल ख्ाुश कर दिया। लेख 'लर्निंग के साथ अर्निंग भी मेरे कॉलेज जाने वाले बेटे के लिए वरदान साबित हुआ। 'शेफ से पूछें पढकर कुकिंग संबंधी कई समस्याओं हल एक साथ मिल जाता है। 'हेल्थ वॉच ने हमेशा की तरह सेहत के प्रति सचेत किया।

निधि जोशी, बडौदा

- सखी के साथ मेरी दोस्ती बहुत पुरानी है। समय के साथइसने मेरी सोच को परिपक्व बनाया है। इस पत्रिका में आधुनिकता और परंपराओं का बहुत सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। सौंदर्य, सेहत और करियर पर आधारित लेख मेरे व्यक्तित्व को संवारते हैं। सकारात्मक सोच से परिपूर्ण रचनाएं हर कदम पर मेरा मार्गदर्शन करती हैं। पत्रिका के उज्ज्वल भविष्य के लिए मेरी शुभकामनाएं।

सुषमा शर्मा, फरीदाबाद

- सखी का अप्रैल अंक ज्ञानवर्धक रचनाओं से भरपूर और उपयोगी था। कवर स्टोरी 'सृजन का सुख पढकर मैं 62 वर्ष की उम्र में भी नए उत्साह और ऊर्जा से सराबोर हो गई। अपनी सहज भाषा शैली और उत्कृष्ट रचनाओं की वजह से यह पत्रिका हम पाठिकाओं के लिए गागर में सागर साबित होती है। मेरी कामना है कि यह पत्रिका निरंतर कामयाबी के पथ पर अग्रसर हो।

शशि प्रभा गुप्ता, बेंगलुरू

- मेरी मम्मी सखी की नियमित पाठिका हैं। उनकेसाथ मैं भी इसकी फैन बन गई हूं। पत्रिका के मई अंक में यात्रा से संबंधित विशेष रचनाएं बेहद रोचक और जानकारीपूर्ण थीं। लेख 'मैं उड चली, आसमां है मेरा के अंतर्गत फीमेल सोलो ट्रैवलर्स के अनुभव रोचक होने के साथ प्रेरक भी थे। लेख 'घर में तैयार करें 10 हेयर पैक्स में दिए गए सुझाव मेरे लिए बहुत उपयोगी साबित हुए। आशा है कि आने वाले अंकों में भी ऐसी ही स्तरीय रचनाएं पढऩे को मिलेंगी।

अपर्णा पाठक, कोटा

पिछले दस वर्षों से मैं नियमित रूप से सखी पढती आ रही हूं। समय के साथ यह निखरती जा रही है। पत्रिका का मई अंक भी प्रशंसनीय था। यात्रा पर केंद्रित विशेष रचनाओं ने मेरी छुट्टियों को ख्ाुशनुमा बना दिया। 'मिसाल के अंतर्गत बिहार की जया देवी के संषर्ष यात्रा से जुडे अनुभव बेहद प्रेरक थे। सभी सभी स्थायी स्तंभ भी रोचक थे।

सरिता चौहान, अलीगढ

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