हर किसी की चाह होती है कि वह जिंदगी में हमेशा सफल हो। कभी यह सफलता करियरकी शुरुआत में ही मिल जाती है तो कभी इसमें समय भी लग सकता है। जैसे हर सिक्के के दो पहलू होते हैं, वैसा ही कुछ कम उम्र में मिली सफलता के साथ भी होता है। उसे सिर्फ एंजॉयकरने के बजाय उससे जुडी जिम्मेदारियों की समझ होना भी जरूरी होता है। कैसे संतुलित रखें खुद को, जानें सखी से।

स्कूल-कॉलेज के दिनों से ही बच्चों को उम्मीदों का ताज पहना दिया जाता है, जिस पर खरा उतरने के लिए वे हमेशा प्रयासरत रहते हैं। इस कोशिश में कम उम्र से ही वे मेहनत करना सीख जाते हैं, अकसर सफलता का स्वाद भी चख लेते हैं पर सफलता का यह दौर मानसिक, शारीरिक व भावनात्मक तौर पर काफी संतुलन मांगता है, जिसका सही तरीका उन्हें नहीं पता होता है। जानें, सफलता के असल मायने और युवा कैसे डील करें कम उम्र में मिली सफलता को।

सफलता सिर्फ जीत नहीं हर किसी के लिए सफलता के मायने अलग होते हैं, इसलिए यह जानना जरूरी है कि आपके लिए सफलता का असली अर्थ क्या है। साइकोथेरेपिस्टसुनीता सनाढ्यपांडेय कहती हैं कि असली सफलता वह है, जिससे हमेशा आगे बढते रहने के लिए प्रेरणा मिलती रहे। कुछ हासिल कर लेने के बाद भी मन में अगर असंतुष्टि की भावना रह जाए या कुछ और पाने की इच्छा बच जाए तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है। हालांकि, इसका यह मतलब भी नहीं है कि आप अपनी सफलता का जश्न ही नहीं मनाएं, जिंदगी में मिलने वाली हर छोटी-बडी सफलता और खुशीका सम्मान के साथ स्वागत करना बहुत जरूरी होता है।

रुकने से बचें सफल होने के बाद भी असंतुष्ट रहने की एक बडी वजह होती है। इससे आप आगे बढते रहने के लिए प्रयासरत रहते हैं। अगर कोई यह सोच ले कि अब वह सफल है और आगे कुछ करने की जरूरत नहीं है तो वह गलत है। सफल होना अच्छी बात है पर उसे मेंटेन किए रहना एक कला है, जो समय के साथ ही सीखी जा सकती है। युवा मॉडल ऐश्वर्यासुष्मिताकहती हैं, 'मैं एक प्रसिद्ध ब्रैंडके लिए मॉडलिंगकरना चाहती थी, मुझे लगता था कि उसके बाद कुछ और करने की जरूरत नहीं रहेगी। करियरकी शुरुआत के 6महीनों में ही मुझे वह मौका मिल भी गया। मगर सही समय पर ही मुझे समझ में आ गया कि वह मेरी मंजिल नहीं है, अभी बहुत आगे जाना है। अगर उस समय मैं वहीं रुक जाती या उसका जश्न मनाती रह जाती तो शायद अपना करियर खत्मकर लेती। मुझे लगता है कि सफलहोने के लिए जरूरी है कि एक लक्ष्य पूरा हो जाने के तुरंत बाद खुदको उससे भी बडे और महत्वपूर्ण लक्ष्य के लिए तैयार कर लेना चाहिए।

न भूलें अपनी रुचि ब्लॉगिंगऔर पब्लिशिंगकी दुनिया में तुष्टि भाटिया और संदीप शर्मा अब जाने-पहचाने नाम हैं। अपनी उम्र के हिसाब से दोनों ने इतनी तरक्की हासिल कर ली है कि एक पल को कोई भी धोखा खा जाए। इनका अपना पब्लिशिंगहाउस है, ये ब्लॉगिंगकरते हैं, नॉवेल्सलिखते हैं, दोस्त बनाते हैं और अपने जैसे यंगस्टर्सको कुछ हटकर करने के लिए एक प्लेटफॉर्मभी उपलब्ध करवाते हैं। तुष्टि बताती हैं कि पढाई के साथ जब उन्होंने इस क्षेत्र में कदम रखने के बारे में सोचा था तो अंदाजा नहीं था कि लोग इन दोनों को इतना प्यार और सम्मान देंगे। कडी मेहनत के साथ ही दोनों ने इस क्षेत्र के बारे में गहन रिसर्च की और सफल होते गए। तुष्टि को बेकिंगका भी बहुत शौक है। लिटरेरीवल्र्डमें इतना व्यस्त रहने के बावजूद उन्होंने अपने इस शौक को पूरा किया। आज उनके बनाए केक्सऔर चॉकलेट्सके फैंसकी कमी नहीं है। सबसे अच्छी बात यह है कि अपने प्रयोग के बिगड जाने पर ये गलती को स्वीकार कर दोबारा उसे बनाने की कोशिश जरूर करती हैं।

समझें क्षेत्र का स्कोप अकसर यंगस्टर्सअपनी जिद में कुछ करने की ठान तो लेते हैं पर आगे जाकर कंफ्यूजहोने लगते हैं। एक दिशा में कदम रख लेने के बाद उन्हें उसके सही या गलत होने का सही अंदाजा नहीं लग पाता है। शुरुआत में तो बहुत अच्छा लगता है, तारीफें भी मिलती हैं पर बाद में समझ आता है कि यह क्षेत्र तो दरअसल उनके लिए था ही नहीं। इस बाबत सुनीता सनाढ्यकहती हैं, 'ऐसी परिस्थिति के लिए यंग अचीवर्सके साथ ही उनके पेरेंट्सऔर मेंटर्स को भी तैयार रहना चाहिए। कई बार जोश या पीयरप्रेशर में बच्चे किसी काम को करने लगते हैं, अपनी मेहनत से सफल भी हो जाते हैं पर बाद में उन्हें एहसास होता है कि वे किसी और क्षेत्र में इससे बेहतर कर सकते थे। ऐसे में बडों की जिम्मेदारी बनती है कि वे उनके लिए कुछ गोल्सबनाएं, उन्हें उस क्षेत्र के स्कोप के बारे में बताएं और वहां पहले से स्थापित लोगों के अचीवमेंट्ससे अवगत करवाएं। अगर उसके बाद भी उन्हें कुछ खटकता है तो उन पर गुस्सा करने के बजाय उन्हें आगे बढऩे के लिए प्रेरित करना चाहिए। उन्हें समझाना चाहिए कि उनके लिए अवसरों की कोई कमी नहीं है, वे आगे प्रयास कर खुद को समय दे सकते हैं।

संभालें इस दौर को

सफल होने का यह मतलब नहीं होता है कि आप दूसरों पर अपनी धौंस जमाएं। सही तरीके से अपनी जिंदगी के इस सुनहरे दौर को हैंडल करना आना चाहिए। अगर अभी से घमंड और असहनशीलताजैसी समस्या से घिर गए तो आगे बढऩे के बजाय पीछे होते जाएंगे। सफलता को कभी सिर पर नहीं चढऩे देना चाहिए, इस बात के लिए तैयार रहना चाहिए कि आज आप जहां हैं, कल को कोई और भी वहां अपनी जगह बना सकता है। ऐसे में फ्रस्ट्रेटहोने के बजाय शांति से चीजों का अवलोकन करते रहना चाहिए।

आगे बढऩे के लिए नए लक्ष्य बनाकर उन्हें पूरा करने के नए रास्ते तलाशें। अपनी रुचि के क्षेत्र के सफल लोगों के बारे में जानकारियां इकट्ठी कर उनसे प्रेरणा लेते रहें। कभी असफल होने पर असफलता की मूल वजह जानने की कोशिश करने के साथ ही उससे ईमानदारी से डील करना चाहिए। रिसर्च हर फील्ड की जरूरत है। खुदको निखारने की कोशिश करें, नए प्रयोग करें और लीक से हटकर काम करने से न घबराएं। काम के साथ ही स्वास्थ्य और डाइट का विशेष ध्यान रखना चाहिए। आज के युवा बहुत मेहनती हैं, टारगेट पूरा करने के लिए अकसर खुदकी अनदेखी करने लगते हैं, इससे बचना चाहिए। इमोशनलबॉण्डिंगहोना बहुत जरूरी होता है। काम के साथ ही रिश्तों का मोल भी समझें। अगर कोई क्षेत्र या काम आपके लिए नया है तो सीनियर्सकी मदद लेने से कभी हिचकना नहीं चाहिए। फ्रस्ट्रेशनसे बचना बहुत जरूरी होता है। कभी लगे कि सब कुछ बहुत ओवर हो रहा हो तो तुरंत कुछ समय का ब्रेक लेकर नई ऊर्जा के साथ काम शुरू करें। युवाओं के साथ काम करने वाले लोगों को भी बहुत धैर्य रखना पडता है क्योंकि उम्र और अनुभव के अंतर को कम नहीं किया जा सकता है। कभी अनबन या काम गलत होने पर आपा खोने के बजाय उन्हें प्यार से उनकी जिम्मेदारियों का एहसास करवाएं। नया सीखना और दूसरों को सिखाना बहुत जरूरी होता है।