उम्र बढऩे के साथ व्यक्ति की आमदनी सीमित हो जाती है लेकिन खर्च बढऩे लगता है। इसलिए अगर आप रिटायरमेंट के बाद खुशहाल जिंदगी चाहते हैं तो आपको भविष्य के लिए फाइनेंशियलप्लैनिंग अभी से ही शुरू कर देनी चाहिए।

महंगाई इतनी तेजी से बढती जा रही है कि रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल है। अभी से यह हाल है तो रिटायरमेंट के बाद क्या होगा? यह सवाल अकसर लोगों को परेशान करता है पर वे समझ नहीं पाते कि सीमित आमदनी में बचत कैसे की जाए? फिर भी भविष्य की आर्थिक सुरक्षा एक ऐसा गंभीर मुद्दा है, जिसे हम आसानी से नजरअंदाज नहीं कर सकते। महंगाई को नियंत्रित करना हमारे वश में नहीं है लेकिन समय के साथ बढते खर्च को नियंत्रित करना जरूरी है। अगर करियरके शुरुआती दौर में इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा जाए तो भविष्य के लिए बचत करना आसान हो जाएगा।

प्रतिमाह 10'की बचत अगर आप किसी जॉब में हैं तो ईपीएफ (एंप्लॉई प्रोविडेंटफंड) के माध्यम से कंपनी रिटायरमेंट के बाद के लिए एक सुनिश्चित बचत की व्यवस्था करवा देती है। अगर नौकरी के बजाय आपका कोई निजी व्यवसाय है या आप कोई ऐसा काम करते हैं, जिसमें ईपीएफकी सुविधा नहीं है तो आपको अपने भविष्य के लिए प्रतिमाह कम से कम 10त्न जरूर बचाना चाहिए, तभी रिटायरमेंट के बाद पेंशन के बिना भी आपको आर्थिक सुरक्षा मिल पाएगी। क्या है सही तरीका :इसके लिए सबसे पहले अपनी शुरुआती बचत को म्युचुअल फंड में इन्वेस्टकरना शुरू करें। इसके लिए सबसे पहले आप अपने बैंक से आरडी (रीकरिंग डिपॉजिट)अकाउंट के बारे में मालूम करें। इसमें यह सुविधा दी जाती है कि आपके सेविंग अकाउंट से आपके द्वारा तय की गई निश्चित रकम कटकर अपने आप आपके आरडी अकाउंट में प्रतिमाह जमा होती रहेगी। इससे निवेश के लिए बचत करना आसान हो जाएगा। फिर बाजार की स्थितियों के बारे में मालूम करके इसे किसी ऐसी जगह इन्वेस्टकरें, जहां अच्छा ब्याज मिलता हो। वैसे, आजकल पोस्ट ऑफिस द्वारा जारी किए जाने वाले सिक्योरिटीबॉण्ड्स खरीदनाभी फायदेमंदसाबित होता है।

समय के साथ निवेश बढाएं आपको अपने आप से यह सवाल पूछना चाहिए कि आपकी जितनी भी आमदनी बढी है, क्या उसी अनुपात में आपका इन्वेस्टमेंट भी बढा है? महंगाई तो अपनी रफ्तार से बढती ही रहेगी। आज आपके रहन-सहन का जो स्तर है, भविष्य में उसे भी मेंटेन करना होगा। इसलिए आपको अभी से बचत शुरू कर देनी चाहिए। आर्थिक सुरक्षा के लिए केवल बचत ही काफी नहीं है बल्कि समय-समय पर निवेश करना भी बेहद जरूरी है। अपना जोखिम कम करने के लिए किसी एक ही प्लैन में इन्वेस्टकरने के बजाय अलग-अलग मदों में निवेश करें। क्या है सही तरीका :अगर आपने शेयर मार्केट या म्युचुअलफंड के लिए इंन्वेस्टमेंटकिया है तो जब आपको ज्य़ादा फायदा मिल रहा हो, उसी समय आधी रकम को वहां से निकालकर किसी दूसरी जगह निवेश कर दें। इससे आपको निश्चित रूप से फायदा मिलेगा और इसमें ज्य़ादा जोखिम भी नहीं है।

सारी जमा पूंजी खर्च न करें कई बार आकस्मिक जरूरतों के लिए कुछ लोग अपने पीएफ अकाउंट से जमा पैसे निकाल लेते हैं पर यह घाटे का सौदा है। ऐसी जरूरतों के लिए अपनी दूसरी बचत या इन्वेस्टमेंट से पैसे निकाल कर खर्च करना ज्य़ादा बेहतर होगा। पीएफको हमेशा अंतिम विकल्प के रूप में रखना चाहिए। सरकार को भी आपके भविष्य की चिंता होती है। इसीलिए रिटायरमेंट से पहले पीएफ से पैसेनिकालने को लेकर कई तरह के सख्त कायदे-कानून बनाए गए हैं। मसलन कोई भी व्यक्ति अपनी नौकरी के शुरुआती पांच वर्षों में पीएफसे पैसे नहीं निकाल सकता और रिटायरमेंट के कुछ वर्ष पहले भी पीएफमें से 70त्न से ज्य़ादा रकम निकालने की इजाजत नहीं होती। हालांकि कुछ लोग नौकरी बदलते समय भी पुरानी कंपनी में जमा पीएफकी राशि को निकालकर खर्चकर डालते हैं, लेकिन यह समझदारी भरा निर्णय नहीं है। क्या है सही तरीका :जब भी जॉब बदलने की स्थिति आए तो आप पुरानी कंपनी में जमा पीएफको निकाल कर खर्च करने के बजाय यथाशीघ्र उसे नई कंपनी के पीएफअकाउंट में ट्रांस्फरकरवा लें। इससे आपको ब्याज का नुकसान नहीं उठाना पडेगा।

मुद्रास्फीति का भी रखें ध्यान भविष्य में अवकाश प्राप्त करने वाले लोगों के सामने सबसे बडी दिक्कत यह है कि उन्होंने पूरी उम्र मेहनत करके जो कुछ भी बचाया है, वह बचत ज्य़ादालंबे समय तक नहीं टिक पाएगी। बढती महंगाई और मुद्रास्फीति की दरों की वजह से आपका खर्चभी दिनोंदिन बढता जाएगा। अनुमान है कि अगर 6त्न की दर से प्रतिवर्ष मुद्रास्फीति बढती रही तो आने वाले 20वर्षों में 1करोड रुपये की कीमत मात्र रुपये 29लाख रह जाएगी। इसलिए बढती उम्र और महंगाई की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रिटायरमेंट के बाद शुरुआती 5वर्षों में अपनी जमा राशि का सिर्फ 5 त्न ही खर्च करें। 70वर्ष की उम्र में पहुंचने के बाद 10 त्न तक खर्च किया जा सकता है। 80वर्ष की उम्र में वार्षिक बचत का लगभग 20 त्नभी निकाला जा सकता है। क्या है सही तरीका :इस समस्या से बचने के लिए सबसे पहले यह हिसाब लगाएं कि आपकी बचत से कुल कितना ब्याज आ रहा है। मान लीजिए आपको अपनी बचत पर 12त्न का वार्षिक ब्याज मिल रहा है तो आप प्रतिवर्ष उस राशि का 6त्न निकाल कर खर्च कर सकते हैं।

अपने लिए भी बचाएं भारतीय समाज में ज्य़ादातर लोग केवल अपने बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए पैसे बचाते हैं, जो जरूरी भी है। बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाना निश्चित रूप से आपकी जिम्मेदारी है लेकिन उम्र बढऩे के बाद सेहत की देखभाल संबंधी खर्च बढ जाते हैं। ऐसे में अपने भविष्य का खयाल रखना भी जरूरी है। ऐसी परेशानी से बचने के लिए अपने लिए एक अच्छी हेल्थ पॉलिसी जरूर खरीदें, साथ ही अपनी आमदनी का कुछ हिस्सा सिर्फ अपने लिए बचाएं। क्या है सही तरीका :अगर बच्चे की पढाई का खर्च वहन करने में दिक्कत आ रही है तो अपने किसी दूसरे इन्वेस्टमेंट से अचानक पैसे निकालकर खर्च करने से एजुकेशनलोन लेना ज्यादा बेहतर है। इससे बच्चे में जिम्मेदारी की भावना का एहसास होगा क्योंकि जॉब मिलने के बाद लोन का भुगतान उसे ही करना होगा। अगर इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा जाए तो रिटायरमेंट के बाद आपको कोई परेशानी नहीं होगी।