करियर को लेकर युवाओं को कई तरह की दुविधाओं का सामना करना पडता है।

अगर मैथ्समें वीकहैं तो सीए या सीएसकरना ठीक रहेगा? अमित, कानपुर मैथ्समें थोडे वीकहैं तो सीए या सीएसकरने में कोई दिक्कतनहीं क्योंकि इन दोनों में प्योरमैथ नहीं होता। सीए या सीएससे संबंधित विषयों में रुचि बढाकर इसका आनंद उठाया जा सकता है। ऐसा करने पर करियर को आगे बढाने में भी कोई बाधा नहीं होगी। इसलिए पहले सीए/सीएस के सिलेबसको देखकर खुद को जज करें। इसके बाद ही इस दिशा में कदम बढाएं। अगर लगता है कि आगे ज्य़ादामुश्किलहो सकती है तो अपनी रुचि का कोई और विकल्प चुन सकते हैं।

अगर एमबीबीएसमें एडमिशनन मिले तो बीडीएसकरना कितना सही है? सुनंदा, दिल्ली मेडिकल फील्डमें ही जाना है और डॉक्टरही बनना है तो बेशक एमबीबीएसमें एडमिशनन मिलने पर बीडीएस(बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी) किया जा सकता है। फर्क सिर्फ इतना ही होगा कि इसमें जनरल फिजिशियन या सर्जन बनने की बजाय डेंटल सर्जन बन सकते हैं। बीडीएसके बाद एमडीएस (मास्टर ऑफ डेंटलसर्जरी) करके रिसर्च भी कर सकते हैं। इसके बाद डेंटिस्टबनने के साथ-साथ डेंटल कॉलेजमें फैकल्टीबनने का ऑप्शनभी होता है। वहां असिस्टेंटप्रोफेसर, एसोसिएटप्रोफेसर और फिर प्रमोशन पाकर प्रोफेसर एंडहेड ऑफ द डिपार्टमेंट भी बना जा सकता है।

क्या मैथ्सविषय अच्छा करियरबनाने में मददगार साबित हो सकता है? कविता, लखनऊ मैथ्समें मन रमता है तो यह ब्राइट करियरबनाने में काफी मददगार हो सकता है। इसके जरिये आगे मैथमेटिशियन,इंजीनियर, साइंटिस्ट,टीचर, प्रोग्रामरआदि के रूप में पहचान बनाई जा सकती है। हालांकि, इसके लिए मैथ्समें हायर एजुकेशनहासिल करना जरूरी होगा।

क्या इंजीनियरिंग में पॉलिटेक्निककरने के बाद कोई जॉब मिलेगी या कोई और कोर्स करना होगा? यागिनी, पटना किसी मान्यता प्राप्तसंस्थानसे इंजीनियरिंग स्ट्रीममें पॉलिटेक्निककरने के बाद सरकारी और निजी संस्थानोंमें जूनियर इंजीनियर के रूप में जॉब ओपनिंगमिल सकती है। राज्य सरकारों के स्टेटइलेक्ट्रिसिटीबोर्ड, पीडब्ल्यूडी, रोडवेज, बीएसएनएल,इंडियन रेलवे, सीपीडब्ल्यूडी,पब्लिकसेक्टर अंडरटेकिंगकंपनियों आदि में जेईके रूप में जॉब पाई जा सकती है, जिसकी अलग से अच्छीतैयारी करनी होगी। अगर अपनी योग्यताबढाना चाहते हैं तो पॉलिटेक्निकके बाद संबंधित ब्रांच में सीधे बीटेकके सेकंड ईयरमें बाइलैटरलएंट्री ले सकते हैं। बीटेक के आधार पर प्रतियोगी परीक्षा क्वॉलिफाई करके एईबन सकते हैं। इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशनकी डिग्री के आधार पर इंडियन इंजीनियरिंग सर्विस (आइईएस) में भी अपीयरहुआ जा सकता है।

बारहवीं के बाद समझ नहीं आ रहा है कि कौन सा कोर्स करें? अंशु नैथानी, चंडीगढ कुछ समझ में नहीं आ रहा है तो किसी का अनुकरण करने के बजाय सबसे पहले अपनी पसंद और नापसंद को अच्छीतरह जानने-समझने का प्रयास करें। इस बारे में जरूरी लगे तो घर के अन्य सदस्यों, दोस्तों,टीचर्स और काउंसलरकी राय भी लें। इसके बाद जो क्षेत्र सबसे अधिक पसंदीदा लगे, उससे संबंधित कोर्स करने पर विचार करें। इस तरह से आगे बढऩे पर जो भी करियरचुनेंगे, उसमें तरक्कीऔर पैसे के साथ-साथ भरपूर खुशी भी मिलेगी क्योंकिआप इसमें अपने काम को हमेशा एंजॉयकरेंगे।

क्या बारहवीं के बाद टीचर ट्रेनिंग की जा सकती है? अमृता, लुधियाना जूनियर लेवल पर टीचर (नर्सरी/प्राइमरी लेवल) बनने के लिए कुछ राज्योंमें 12वींके आधार पर जेबीटीयानी जूनियर बेसिक टीचर ट्रेनिंग कोर्स कराया जाता है। यह टीचिंग का डिप्लोमाकोर्स है। यूपीजैसे कुछ राज्योंमें इसकी जगह बीटीसीकोर्स कराया जाता है लेकिन इसमें एडमिशनअब ग्रेजुएशनके आधार पर दिया जाता है। टीचर्स ट्रेनिंग के ये कोर्स राज्यसरकार के बोर्ड या एससीईआरटी द्वारा संचालित किए जाते हैं। मान्यता प्राप्त निजी संस्थानोंमें भी ये कोर्स चलाए जाते हैं।

ह्यूमैनिटीजबैकग्राउंड वाले स्टूडेंट्स एंट्रेंस एग्मजा के आधार पर किन प्रोफेशनल कोर्सेज में एडमिशनपा सकते हैं? सुनैना, दिल्ली ह्यूमैनिटीज बैकग्राउंड वाले स्टूडेंट्सके लिए भी आज के समय में कई सारे प्रोफेशनल कोर्स उपलब्धहैं, जो बेहतर करियरमें मददगार हो सकते हैं। इनमें रिटेल, हॉस्पिटैलिटी,ट्रैवलएंडटिकटिंग,फैशन/ अपैरल डिजाइनिंग, गेमिंग/एनिमेशन,इवेंट/वेडिंगमैनेजमेंट आदि प्रमुख हैं। इन सभी में कुशल लोगों की प्राइवेट/कॉरपोरेटसेक्टरमें अच्छीडिमांड है। इनमें अच्छीअर्निंगकरने और अपनी पहचान बनाने के भी पर्याप्तमौके आपके पास हैं।

रेगुलरएमबीएऔर जॉब के साथ डिस्टेंसएमबीएमें से बेहतर क्या है? अमित, मुंबई रेगुलरएमबीएफुलटाइमकोर्स होता है। यह उनके लिए बेहतर है, जिन्होंनेअभी करियर की शुरुआत नहीं की है और हायर एजुकेशन के जरिये जॉब मार्केट में अपनी वैल्यूबढाना चाहते हैं। हां, अगर कोई कहीं जॉब कर रहा है और करियरमें बेहतर अवसरचाहता है तो वह नौकरी से ब्रेक लिए बिना डिस्टेंसमोड से एमबीएया पीजीडीएमकरके अपनी योग्यता बढा सकता है। इसके बाद वर्तमान जॉब में प्रमोशन या बेहतर अवसर पाने की संभावना बढ जाती है।

एआईपीएमटी एग्जाम में 11वीं और 12वीं के सिलेबस का कितना महत्व है? रीना, लखनऊ सबसे पहले तो यह स्पष्ट कर दें कि एआईपीएमटी का नाम पिछले वर्ष से एनईईटी (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट) हो गया है, जिसे सीबीएसई द्वारा आयोजित किया जाता है। इस एग्जाम का बेस ही 11वीं और 12वीं का बायो स्ट्रीम का सिलेबस है। हां, इतना जरूर है कि नीट में थ्योरी के बजाय एप्लीकेशन पार्ट पर ज्य़ादा जोर होता है। अगर आपने 11वीं-12वीं की पढाई के दौरान पीसीबी के विभिन्न फॉम्र्युलों को अलग-अलग तरह से अप्लाई करने का भरपूर अभ्यास किया है और एआईपीएमटी/नीट के पिछले कुछ वर्षों के प्रश्नपत्रों को अच्छी तरह से समझा है तो आपको आगे इसके पेपर सॉल्व करने में दिक्कत नहीं होगी।