अगर सेहत की बात करें तो आजकल ओबेसिटी, हाई ब्लडप्रेशर, एस्थमा और डायबिटीज जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से ज्यादातर लोग परेशान रहते हैं। खासतौर पर जिन परिवारों में बुजुर्ग और छोटे बच्चे होते हैं, वहां थर्मामीटर, नेब्युलाइजर, बीपी मॉनिटर और ग्लूकोमीटर जैसे मेडिकल उपकरणों की हमेशा जरूरत पडती है। ऐसे परीक्षणों के लिए बार-बार हॉस्पिटल जाना संभव नहीं होता। इसलिए आजकल लोग अपने घर पर ही ऐसी चीजें रखना चाहते हैं पर उन्हें यह मालूम नहीं होता कि ऐसे उपकरण खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और इनके इस्तेमाल का सही तरीका क्या है? सर गंगाराम हॉस्पिटल के मेडिसिन डिपार्टमेंट के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. एस. पी. ब्योत्रा बता रहे हैं, ऐसे ही उपकरणों से जुडी कुछ जरूरी बातें। बीपी मॉनिटर वैसे तो आजकल बाजार में कई कंपनियों के इलेक्ट्रॉनिक बीपी मॉनिटरिंग डिवाइसेज उपलब्ध हैं पर इन्हें खरीदते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए। कैसे करें चुनाव ऐसा माना जाता है कि डॉक्टर्स द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली बीपी मशीन ज्यादा मजबूत और टिकाऊ होती है पर आम लोगों के लिए इसका इस्तेमाल कठिन होता है। इसलिए बेहतर यही होगा कि आप किसी विश्वसनीय कंपनी से ऐसी डिजिटल बीपी मशीन खरीदें, जो ब्लडप्रेशर के साथ पल्स रेट भी बताती हो। वैसे आजकल कलाई पर बेल्ट बांधकर बीपी मापने वाली मशीन भी उपलब्ध है लेकिन आपके लिए बांह पर बेल्ट बांध कर बीपी मापने वाली मशीन ज्य़ादा उपयुक्त होगी क्योंकि इससे सटीक रीडिंग मिलती है। हमेशा क्लिनिकली वैलिडेटेड बीपी मॉनिटर खरीदें। उसे प्रमाणिक बताने वाली कंपनी का नाम मॉनिटर पर नीचे की तरफ लगे स्टिकर पर लिखा होता है। रूटीन चेकअप के दौरान अपने नए बीपी मॉनिटर को डॉक्टर के पास ले जाएं और सुविधा से बचने के लिए उसके रिजल्ट को डॉक्टर के रिजल्ट से जरूर मिलाएं। इस्तेमाल का सही तरीका अगर बीपी मॉनिटर का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं तो सेल निकाल कर बाहर रख दें। बेल्ट को हमेशा सही जगह पर रखें। जहां से आपका हाथ मुडता है और जहां आपको नाडी की गति महसूस होती हो, वहीं पर मशीन की बेल्ट बांधें। बेल्ट को न तो ज्यादा टाइट और न ही ज्य़ादा ढीला रखें। हर बार ली गई रीडिंग को किसी डायरी या मोबाइल में नोट करें। खाना खाने या सीढिय़ां चढऩे के तुरंत बाद बीपी चेक न करें। आमतौर पर 120/80 को नॉर्मल ब्लड प्रेशर माना जाता है। अगर किसी व्यक्ति का सिस्टोलिक बीपी (हायर साइड) 120 से ऊपर हो तो उसे हाई ब्लडप्रेशर, अगर डायस्टोलिक (लोअर साइड) 80 से कम हो तो उसे लो बीपी माना जाता है। हाई ब्लडप्रेशर की समस्या से ग्रस्त लोगों का ब्लड प्रेशर आमतौर पर 130/90 या उससे अधिक होता है। थर्मामीटर यह प्राय: सभी घरों के मेडिकल किट का सबसे जरूरी हिस्सा है। इसे खरीदते वक्त इन बातों का ध्यान रखना चाहिए : कैसे करें चुनाव अच्छी कंपनी का मजबूत डिजिटल थर्मामीटर चुनें। अगर हाथ में लेते ही प्लास्टिक की क्वॉलिटी हलकी और रफ लगे तो उसे न लें। अच्छी बैटरी लाइफ वाला थर्मामीटर खरीदें। बैक लाइट वाले थर्मामीटर का चुनाव न करें। इसमें बैटरी बहुत जल्दी खर्च हो जाती है। अगर घर में नवजात शिशु है तो उसके लिए कान के पीछे लगाने वाले और फोरहेड पर रखकर तापमान जांचने वाले थर्मामीटर का चुनाव करें। आजकल दूर से टेंपरेचर लेने वाले इंफ्रारेड थर्मामीटर भी आते हैं पर इनकी रीडिंग ज्य़ादा सटीक नहीं होती। इस्तेमाल का सही तरीका टेंपरेचर लेने से पहले डिस्प्ले पर बैटरी की पोजिशन देखें। अगर लो बैटरी का सिग्नल आ रहा है तो टेंपरेचर के गलत होने की आशंका रहती है। बेहतर यही होगा कि थर्मामीटर को आर्मपिट के बजाय मुंह में लगाएं। अगर थर्मामीटर को आर्मपिट पर लगाती हैं तो उसके टेंपरेचर में 1 डिग्री और जोड लें। मुंह या आर्मपिट में थर्मामीटर रख कर 2 मिनट तक बिना हिलाए रखें और अलार्म सुनाई देने के बाद ही हटाएं। कुछ भी खाने के तुरंत बाद मुंह में थर्मामीटर न लगाएं। इसके लिए कम से कम आधे घंटे का इंतजार करना चाहिए। ग्लूकोमीटर अगर आपके घर में किसी को डायबिटीज है तो शुगर लेवल की जांच के लिए बार-बार घर से बाहर जाना बेहद असुविधाजनक और खर्चीला होता है। इस दृष्टि से यह बेहद उपयोगी उपकरण है। कैसे करें चुनावऐसे ग्लूकोमीटर का चुनाव करें, जिसका इस्तेमाल आसान और सुविधाजनक हो। आजकल बाजार में ऐसे ग्लूकोमीटर भी उपलब्ध हैं, जिन्हें कंप्यूटर के साथ कनेक्ट करने की सुविधा मौजूद होती है। इससे जरूरी रीडिंग को सेव करना आसान हो जाता है। ऐसा उपकरण खरीदें, जिसमें जांच के लिए सीमित मात्रा में ब्लड सैंपल लेने की सुविधा हो। उंगलियों से जितना कम ब्लड निकलेगा, जांच उतनी ही दर्दरहित होगी। ग्लूकोमीटर हमेशा छोटे साइज का लें। उसका आकार जितना छोटा होगा, इस्तेमाल उतना ही सुविधाजनक होगा। आजकल ब्लड टेस्ट के लिए ऐसे यंत्र भी आते हैं, जिनमें रीडिंग को पढऩे के साथ सुना भी जा सकता है। कैसे करें इस्तेमाल तीन महीने के बाद सेल बदल दें। टेस्टिंग स्ट्रिप को किसी एयर टाइट बॉक्स में रखें। अन्यथा नमी की वजह से रिजल्ट गलत आ सकता है। नई मशीन के इस्तेमाल से पहले अपने डॉक्टर से मिलकर उसे ऑपरेट करने का सही तरीका सीख लें। आमतौर पर सुबह खाली पेट 70-110 शुगर लेवल को सही माना जाता है। वेइंग मशीन आजकल ज्य़ादातर लोग बढते वजन की समस्या से परेशान रहते हैं। इसलिए वेइंग मशीन उनकी जरूरत बन चुकी है। कैसे करें चुनाव अपनी सहूलियत के मुताबिक मैनुअल या डिजिटल मशीन खरीदने का ऑप्शन चुन सकते हैं। मैनुअल मशीन में वजन के माप में एक-आधा किलो का अंतर हो सकता है। हालांकि डिजिटल मशीनों में ऐसी दिक्कत नहीं होती लेकिन उनके जल्दी बिगडऩे की आशंका रहती है। अब ऐसी मशीनें भी आने लगी हैं, जो व्यक्ति के वजन को एक एप के जरिये मोबाइल में एनालिसिस के लिए भेज सकती हैं। आज की व्यस्त दिनचर्या में यह लोगों के लिए बेहद सुविधाजनक साबित होती है। इस्तेमाल का सही तरीका मशीन को साफ-सुथरा और नमी से बचाकर रखें। बार-बार इसकी जगह न बदलें। मशीन को झटके से इधर-उधर न सरकाएं। टूटने से बचाने के लिए वेइंग मशीन को हमेशा बच्चों की पहुंच से दूर रखें। अगर मशीन इस्तेमाल में न हो तो सेल को बाहर निकाल दें। उपयोग के बाद इसका स्विच ऑफ करके रखें। इससे मशीन ज्य़ादा लंबे समय तक चलेगी। अगर आपका वजन तेजी से घट (सप्ताह में 1-2 किलो) या बढ रहा है (सप्ताह में 2-3 किलो) तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें। अपने मन से वजन घटाने के तरीके अपनाना सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। कब और कितना वजन मेंटेन करना है, क्या खाना है, क्या नहीं, इसके बारे में एक्सपर्ट से सलाह लेने के बाद ही कोई निर्णय लें और उसके सभी निर्देशों का पालन करें।

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