लगभग पांच साल पहले की बात है। एक मिडिलएजव्यक्ति अपनी बेटी को साथ लेकर मुझसे मिलने आए। उसकी उम्र तकरीबन 25वर्ष रही होगी। उन दोनों से अलग-अलग बात करने के बाद मुझे मालूम हुआ कि उस परिवार में केवल दो बेटियां थीं। मां के मन में बेटा न होने का मलाल इतना अधिक था कि बेटियों के प्रति उनका व्यवहार बेहद चिडचिडा हो गया था। उसके पिता ने बताया कि वर्षा (परिवर्तित नाम) शुरू से ही होनहार स्टूडेंट थी। आजकल वह अच्छी कंपनी में जॉब भी करती है लेकिन जब से इसकी बहन की शादी हुई है, इसकी मां किसी न किसी बहाने इसे बेवजह डांटती-फटकारती रहती हैं। इससे उसके मन में हीन भावना घर कर गई थी। गहरी उदासी, दैनिक कार्यों में अरुचि और अनिद्रा जैसे लक्षण डिप्रेशनकी ओर इशारा कर रहे थे। सारी बातें सुनने के बाद मैंने उन दोनों को अगले सप्ताह बुलाया।

समस्या कुछ और थी वर्षा की मां पर्सनैलिटीडिसॉर्डरक्लस्टरबी नामक मनोवैज्ञानिक समस्या से ग्रस्त थीं, जिसके लक्षणों को पहचानना थोडा मुश्किल होता है क्योंकि ऐसे लोगों के व्यवहार में अस्थिरता होती है और इनमें कई मनोवैज्ञानिक समस्याओं का मिला-जुला रूप देखने को मिलता है। छोटी-छोटी बातों को लेकर दूसरों पर चीखना-चिल्लाना इस समस्या के प्रमुख लक्षणों में से एक है। ऐसी आदतों से मरीज को खुदकोई तकलीफ नहीं होती लेकिन उसके आसपास के लोगों को बहुत परेशानी होती है। इसीलिए वह अनजाने में दूसरों को बहुत परेशान करता है पर वह अपनी समस्या को पहचान नहीं पाता और न ही उसे दूर करने की कोशिश करता है। यहां भी वर्षा की मां को समझाने से स्थिति सुधरने वाली नहीं थी। लिहाजा अगली सिटिंगसे मैं वर्षा और उसके पिता को अस्ट्रिवनेसट्रेनिंग देने लगी। खासतौर पर मैंने उसके पिता को समझाया कि आप पत्नी के सामने शांतिपूर्णढंग से असहमति जाहिर करें। उन्हें खुशकरने के लिए उनकी हर बात मानने की आदत छोड दें। अगर कभी वह आपके सामने आपकी बेटी की बुराई करती हैं तो आप उन्हें उसी वक्त शालीनता से टोकें कि ऐसा कहना गलत है। आप केवल पत्नी के लिए ही नहीं बल्कि बेटी के लिए भी उपहार लाएं। लोगों के सामने उसकी तारीफ करें। इससे उसका आत्मविश्वास बढेगा।

समाधान की ओर अगली सिटिंगमें मैंने वर्षा को अकेले ही बुलाया। मैंने उसे समझाया कि तुम करीबी दोस्तों के साथ खुलकर अपने दिल की बातें शेयर करो। तुम्हारी मम्मी की पुरानी सोच को बदलना थोडा मुश्किल है लेकिन दिन-रात ऐसी नकारात्मक बातें सुनकर उन्हें अपने दिल में दबाए रखना तुम्हारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत घातक होगा। इसलिए अगर उनकी किसी बात से तुम्हारी भावनाएं आहत होती हैं तो अपने करीबी दोस्तों के साथ ऐसे अनुभव शेयर करने में कोई बुराई नहीं है। दोस्तों के साथ कभी वीकेंडआउटिंगपर निकल जाओ और हमेशा खुशरहने की कोशिश करो। यह सच है कि मम्मी के ऐसे व्यवहार से तुम्हें परेशानी होती है पर तुम्हें उनकी जो बातें नापसंद हों, उन्हें नजरअंदाज करने की कोशिश करो। लगभग दो महीने बाद जब वर्षा मुझसे मिलने आई तो वह काफी खुशनजर आ रही थी। उसने बताया कि अब वह अच्छा महसूस कर रही है और मां के साथ उसके रिश्ते में सहजता आने लगी है।

लगभग आठ महीने में वर्षा का डिप्रेशनदूर हो गया। इसमें उसके दोस्तों का बहुत बडा योगदान था। इसलिए अगर कभी आपका कोईकरीबी व्यक्ति तनावग्रस्त हो तो उसे अकेला न छोडें, उससे बातचीत करें। ऐसे लोगों के लिए अपनों का इमोशनल सपोर्ट बेहद जरूरी होता है।