अब तक ऐसा माना जाता था कि दृष्टिहीनता संबंधी समस्याएं एक खास उम्र के बाद होती हैं, पर वास्तव में ऐसा नहीं है। आधुनिक जीवनशैली ने जिन स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दिया है, आई हैमरेज भी उन्हीं में से एक है। शुरुआत में ही पहचान करके सही समय पर आई हैमरेज का उपचार बहुत जरूरी है। मुख्यत: रक्तवाहिका नलिकाओं में खून के रिसाव की वजह से कई बार आंखों के अलग-अलग हिस्सों में खून के थक्के जम जाते हैं और इसकी वजह से देखने में परेशानी होती है। इस समस्या को मुख्यत: 4 श्रेणियों में विभाजित किया जाता है :

सबकंजक्टिवल हैमरेज

आंखों के सफेद हिस्से के ऊपर एक झिल्ली होती है, जिसे कंजक्टिवा कहा जाता है। इस पतली झिल्ली के नीचे छोटी-छोटी रक्तवाहिका नलिकाएं होती हैं। कई बार इनमें से खून रिस कर कंजक्टिवा के नीचे जमा हो जाता है, जिसके कारण आंखों के सफेद हिस्से पर लाल रंग के धब्बे नजर आने लगते हैं। इन्हें ही सबकंजक्टिवल हैमरेज कहा जाता है।

कारण : हालांकि, इस समस्या के कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं, पर रक्तवाहिका नलिकाओं से रिसाव होने के भी कई कारण हो सकते हैं, जैसे जोर से छींक आना या खांसना, हाई ब्लडप्रेशर, आंखों में किसी तरह का संक्रमण, भारी सामान उठाना, आंखों या सिर का ऑपरेशन, विटमिन क्च या विटमिन य की कमी, तेज बुखार आदि कारणों से यह समस्या हो सकती है। इसके अलावा कंजक्टिवाइटिसकी वजह से भी यह समस्या हो सकती है।

उपचार : आमतौर पर यह समस्या दवाओं से ठीक हो जाती है। अगर आंखों में लाल धब्बा छोटा हो तो एक सप्ताह के भीतर कंजकटिवा उसे अपने आप सोख लेता है। इससे आंखों की दृष्टि प्रभावित नहीं होती।

हाइफिमा हैमरेज

कॉर्निया और लेंस के बीच के भाग में खून जमा होने से यह समस्या होती है।

कारण : चोट लगने, आंखों की सर्जरी, लिवर या किडनी से संबंधित किसी गंभीर समस्या से भी हाइफिमा हैमरेज हो सकता है।

लक्षण : रोशनी की वजह से आंखों में चुभन, दर्द और दृष्टि में धुंधलापन आदि लक्षण देखने को मिलते हैं। अगर हाइफिमा छोटा हो या ऊपरी पलकों के नीचे हो तो आंखों में लाली नजर नहीं आती।

जांच एवं उपचार : इसके लिए स्लीप टेस्ट किया जाता है। अगर हाइफिमा हल्का है तो वह एक सप्ताह में ठीक हो जाता है। ऐसी स्थिति में दर्द निवारक दवाओं का सेवन नुकसानदेह साबित होता है।

रेटिनल हैमरेज

रेटिना की रक्तवाहिका नलिकाओं से खून का रिसाव होने पर यह समस्या होती है।

कारण: हाई ब्लडप्रेशर, डायबिटीज या आंखों में चोट लगना। इसके अलावा डायबिटीज के मरीजों में डायबिटिक रेटिनोपैथी के कारण रक्तवाहिका नलिकाओं में सूजन आ जाती है और वे फट जाती हैं। इस प्रकार नलिकाओं से निकला हुआ खून रेटिना की परतों पर फैल जाता है। यह दृष्टिहीनता का बहुत बडा कारण है।

लक्षण : रेटिनल हैमरेज के रोगी आमतौर पर धुंधला दिखने की शिकायत करते हैं।

जांच एवं उपचार : रेटिनल हैमरेज को जांचने के लिए ऑप्थाल्मोस्कोपी की जाती है। इसके अलावा जरूरत पडने पर सीटी स्कैन और खास तरह की एंजियोग्राफी की जाती है। इस हैमरेज का उपचार लेजर पद्धति से किया जाता है। इस प्रक्रिया में लेजर द्वारा खराब रक्तवाहिकाओं को सील कर दिया जाता है। आजकल कुछ ऐसे इंजेक्शन भी आ गए हैं, जिन्हें सीधे आंखों में लगाने से मरीज को जल्दी आराम मिल जाता है।

विट्रस हैमरेज

रेटिना और आंख के लेंस के बीच पारदर्शी जेली जैसा द्रव होता है, जिसे हम विट्रस कहते हैं। अगर यह सूख जाए तो इससे दृष्टि प्रभावित होती है।

लक्षण : छोटे-छोटे काले धब्बे दिखाई देते हैं और गंभीर अवस्था में दृष्टि चली जाती है।

जांच एवं उपचार : अल्ट्रासाउंड, बी-स्कैन, बी स्लिट कैप और ऑप्थाल्मोस्कोपी से विट्रस हैमरेज की जांच की जाती है। इस समस्या के प्रारंभिक चरण में आई ड्रॉप द्वारा इलाज किया जाता है, परंतु देर होने पर सर्जरी ही अंतिम विकल्प रह जाता है, जिसे विट्रेक्टोमी कहा जाता है। आंखों से संबंधित कोई भी समस्या होने पर, उसे नजरअंदाज न करें और बिना देर किए विशेषज्ञ से संपर्क करें।

(डॉ. तरुण कपूर, सीनियर कंसल्टेंट एवं एचओडी आई केअर यूनिट मैक्स हॉस्पिटल साकेत दिल्ली, से बातचीत पर आधारित)

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