हाल ही में आई 'तनु वेड्स मनु रिटर्न्स' ने 15-20 दिनों के भीतर ही बॉक्स ऑफिस पर डेढ सौ करोड का आंकडा पार कर लिया था। आनंद एल. राय की यह फिल्म 'तनु वेड्स मनु' का सीक्वल है। पति-पत्नी के सहज प्रेम और झगडों से बुनी साधारण सी दिखती यह कहानी दर्शकों को कैसे पसंद आई, बता रहे हैं अजय ब्रह्म्ाात्मज।

दो महीने पहले आई 'तनु वेड्स मनु रिटन्र्स नए रिकार्ड स्थापित कर रही है। कंगना रनौत अभिनीत और आनंद एल. राय निर्देशित इस फिल्म की सफलता से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में हडकंप सा मच गया है। पुराने निर्देशकों को समझ नहीं आ रहा है कि दर्शकों को इस फिल्म में ऐसा क्या दिखा, जो अब तक हिंदी फिल्मों में नहीं दिखा था। 'तवेमरि ने 11 दिन में सौ करोड का आंकडा छू लिया। फिल्म की कहानी हिमांशु शर्मा ने लिखी है।

सीक्वल में देरी

फिल्म निर्देशक आनंद राय बताते हैं, 'वर्ष 2011 में जब मैं 'तनु वेड्स मनु बनाने निकला था तो मेरे साथ कोई नहीं था। फिल्म के लिए लोग तैयार नहीं थे। एक तरह से यह अच्छा ही था, क्योंकि कोई आपकी तरफ देख नहीं रहा था। पैसे की दिक्कत थी, लेकिन मनमानी की छूट थी। मुझसे उम्मीद की जा रही थी कि मैं एक और रोमैंटिक कॉमेडी बनाऊं। मैंने फैसला किया कि मैं ट्रेजडी बनाऊंगा। उसी कोशिश में 'रांझणा बन गई। मेरी ज्िांदगी में कोई उतार-चढाव नहीं है। मैं सिर्फ देखना चाहता था कि सुकून से जी रहा व्यक्ति टे्रजडी कैसे हैंडल करता है। तब यह ख्ायाल था कि 'रांझणा चल गई तो वाह-वाह, नहीं चली तो माफी मांग लूंगा और फिर से रोमैंटिक कॉमेडी बना दूंगा।

वह कहते हैं, 'उन दिनों हिमांशु ने 'तनु वेड्स मनु के सीक्वल की कहानी सोच ली। फिर भी हमने 'रांझणा पर ध्यान दिया। हालांकि हमसे सभी इसके सीक्वल की मांग कर रहे थे। हम इस पर एकमत थे कि सीक्वल में भी पहली फिल्म के पात्र होंगे, लेकिन फिल्म ऐसी बनेगी कि जिसने पहली फिल्म न देखी हो, उसे नई फिल्म का आनंद आए और जिसे कहानी याद हो, वह भी आनंद ले।

गहन टीम वर्क

कहा जाता है कि हिमांशु शर्मा और आनंद राय एक-दूसरे के बिना काम नहीं कर सकते। आनंद राय कहते हैं, 'हम आइडियाज पर बातें करते हैं। मगर आइडिया को ठोस रूप हिमांशु देते हैं। बातों-बातों में तय होता है कि कैसी कहानी कहंू, किसकी कहानी कहूं और ज्यादा जोर इस बात पर रहता है कि क्यों वह कहानी कही जाए।

दांपत्य प्रेम की कहानी

'तनु वेड्स मनु रिटन्र्स ने दर्शकों को अभिभूत किया है। आनंद राय कुछ कहना चाहते थे। जरूरी नहीं कि दर्शकों ने उसे उसी स्तर पर समझा हो। आनंद राय कहते हैं, 'पिछले पांच-दस सालों में मैंने किसी फिल्म में दंपतियों की प्रेम कहानी नहीं देखी है। हां, प्रेमियों की कहानियां देखी हैं। फिल्मों ने यह नहीं दिखाया कि क्या शादी के बाद प्रेमी जोडे ख्ाुश रहे या उनके बीच तकरार हुई? क्या उस तकरार में प्यार की खोज हो सकती है? फिल्म देखने के बाद मुझसे पूछा गया कि मैंने ऐसा अंत क्यों किया? कुसुम के साथ भी तो मनु जा सकता था। मेरे पास जवाब है। सच यही है कि हम घिसे-पिटे लोग हैं। रूढिय़ों में जीते हैं। इसे स्वीकार करने में मुझे शर्मिंदगी नहीं है। मैं शादी की संस्था में यकीन करना चाहता हूं। मैं न तो सिनेमा बदलना चाहता हूं और न सिनेमा से समाज बदलना चाहता हूं। मेरा स्वार्थ इतना ही है कि दर्शकों को दो घंटे अच्छा मनोरंजन मिले और घर ले जाने लायक कुछ हो। मैं खुद को इस योग्य नहीं मानता कि नया रास्ता मुझसे बनेगा। एक दर्शक फिल्म के लिए दो से चार सौ रुपये और दो से चार घंटे ख्ार्च कर रहा है तो फिल्ममेकर का फर्ज है कि दर्शकों को संतोषजनक मनोरंजन दे।

दत्तो ने जीता दिल

'तनु वेड्स मनु रिटन्र्स में दत्तो का किरदार सभी को पसंद आया है। कुसुम सांगवान नाम की इस लडकी ने दर्शकों का दिल जीत लिया। आनंद राय बताते हैं, 'शादी के कुछ साल बीतने के बाद उन्हें एक-दूसरे की ख्ाामियां दिखने लगती हैं। दोनों को लगता है कि एक-दूसरे की कुछ कमियां खत्म हो जाएं तो उनसे बेहतर कोई नहीं होगा। ऐसा होता नहीं, हो भी नहीं सकता। परफेक्ट तो मशीन होती है। मेरा मानना है कि थोडी कमियां हों, तभी रिश्ते बनते हैं। कमियों की स्वीकृति ही प्यार है। दत्तो तनु-मनु के बीच इसलिए लाई गई कि वे अपनी कमियां समझ सकें। कुसुम के साथ मनु के जाने का अर्थ होता कि पति को दूसरी औरत मिलनी चाहिए। मगर फिल्म में मनु फिर से तनु के प्यार में पडता दिख रहा है। इस बार उनका प्रेम एक लेवल ऊपर जाता है।

लोकेशन पर जोर

आनंद राय की फिल्मों में लोकेशन पर ध्यान दिया जाता है। 'तनु वेड्स मनु रिटन्र्स में कानपुर के साथ ही लखनऊ, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में शूटिंग की गई है। दत्तो की हरियाणवी पर ध्यान दिया गया है। वह कहते हैं, 'मुझे मेरे किरदार ही लोकेशन पर ले जाते हैं। मैं किरदार का स्थान कैसे बदल सकता हूं। कई बार लोकेशन के हिसाब से स्क्रिप्ट में तब्दीली करनी पडती है। लिखते समय यह कहां पता रहता है कि वास्तविक लोकेशन कैसा होगा? झज्जर का इलाका मुझे दत्तो के अनुकूल लगा तो उसके भाई के लिए दिल्ली का ख्ाास इलाका ठीक लगा। दिक्कतें और आसानी तो साथ-साथ चलती हैं। मुझे लगता है कि मैं अपने देश में आसानी से शूट कर लेता हूं। मुझे स्थानीय लोगों की मदद मिलती है। झज्जर में लोवाखुर्द गांव के लोगों ने अपने दरवाज्ो खोल दिए थे।

डबल रोल्स पर मेहनत

'तनु वेड्स मनु रिटन्र्स में दत्तो का रूप और चरित्र ख्ाास ढंग से गढा गया। मशहूर मेकअप डिज्ााइनर विक्रम गायकवाड की मदद ली गई। बहुत हलकेपरिवर्तन से उन्होंने तनु व दत्तो को दो रूपों में ढाला। दत्तो के दांत, बाल व आंखों पर मेहनत की गई। वह एथलीट है, इसलिए उसकी नाक के आसपास की त्वचा को अलग टेक्स्चर दिया गया। शूटिंग में दीपक डोबरियाल के कारण काफी समय बर्बाद हुआ। आनंद राय शिकायत करते हैं, 'दीपक उम्दा ऐक्टर हैं। इतने उम्दा हैं कि उनके कारण हमारा ख्ार्च बढ जाता है। दरअसल, उनके साथ के दृश्यों में दूसरे ऐक्टरों को हंसी आ जाती थी और उनका परफॉर्मेंस बिगड जाता था। मुझे फिर से टेक लेना पडता था। ऐसा कई बार हुआ। जिम्मी शेरगिल और माधवन के साथ भी 18-18 रीटेक लेने पडे। दीपक ने मुझे इतना आत्मविश्वास दिया कि मैं ह्यूमर के साथ इमोशंस को लेकर चल सका।

आनंद राय अपने ऐक्टरों की खूबियों को समेटते हुए कहते हैं, 'वे मुझे मौका और फुर्सत देते हैं। प्रधान चरित्रों को निभा रहे कलाकारों को ज्य़ादा समय देना होता है। ऐसे में दूसरों की अनजाने में ही उपेक्षा हो जाती है। पर मेरे सभी कलाकार हमेशा मुस्कराते हुए आते हैं। फिल्म में तनु और मनु की डिस्कवरी थी। ग्ाौर करें तो 'तनु वेड्स मनु रिटन्र्स में दोनों एक-दूसरे को डिस्कवर कर रहे हैं।

अजय ब्रह्म्ाात्मज