शाहरुख-काजोल की चिर-प्रतीक्षित जोडी हाल ही में रिलीज्ा हुई रोहित शेट्टी की फिल्म 'दिलवाले' में दिखी। रोमैंस और ऐक्शन से भरी यह फिल्म कैसे बनी, जानें इसकी कहानी फिल्म संपादक अजय ब्रह्म्ाात्मज से।

रोहित शेट्टी की 'दिलवाले' 2015 की चर्चित फिल्म है। शाहरुख ख्ाान और काजोल की जोडी इस फिल्म में थोडे अलग अंदाज्ा में दिखी। अपनी रोमैंटिक जोडी के लिए मशहूर दोनों कलाकारों ने इस फिल्म में भी रोमैंस किया था, लेकिन इस बार इसमें रोमांच भी था। फिल्म की शैली तो रोहित शेट्टी की ही थी। वे एक्शन और कॉमेडी के लिए विख्यात हैं। उन्होंने शाहरुख और काजोल के लिए फिल्म को रोमैंटिक टच दिया। रोहित कहते हैं, 'रोमैंस की शुरुआत मैं 'चेन्नई एक्सप्रेस' से ही कर चुका हूं। उस फिल्म में शाहरुख और दीपिका थे। इस बार फिल्म स्टारों की घोषणा के बाद से ही इंडस्ट्री और दर्शकों के बीच जिज्ञासा बढ गई थी कि मैं शाहरुख और काजोल को कैसे पेश करूंगा?'

रीमेक से शुरू हुई बात

'दिलवाले की कहानी 'बोल बचन के समय ही लिखी जा चुकी थी। तब तय नहीं था कि इसमें शाहरुख ही होंगे या वे इसके निर्माता होंगे। िकस्सा यह है कि पिछली बार की तरह इस बार भी 'अंगूर की रीमेक से बात आरंभ हुई। रोहित और शाहरुख की पहली मुलाकात 'अंगूर की रीमेक को लेकर ही हुई थी। दोनों साथ में काम करना चाहते थे। रोहित शेट्टी चाहते थे कि 'अंगूर को नए अंदाज्ा में फिर से बनाया जाए। अनेक मुलाकातों के बाद भी फिल्म पटरी पर आती नहीं दिखी तो रोहित शेट्टी ने 'चेन्नई एक्सप्रेस का आइडिया सुनाया। शाहरुख झट से राजी हो गए। इस बार भी 'अंगूर नहीं बन सकी। बनी 'दिलवाले और उसने दर्शकों को सम्मोहित कर लिया।

प्रेम से दुश्मनी तक

'दिलवाले राज और मीरा की कहानी है। दोनों प्रेमी हैं, लेकिन परिस्थितियों के कारण एक-दूसरे के जानी दुश्मन बन जाते हैं। उनकी दुश्मनी की ज्ामीन भारत तक ही सीमित नहीं रहती। वे देश के बाहर जाकर भी अपनी दुश्मनी जारी रखते हैं। रोहित शेट्टी ने बडे रोचक तरीके से दोनों के प्रेम और दुश्मनी की कहानी को एक ही फिल्म में पिरोया है। उनके साथ वरुण धवन और कृति सैनन की युवा जोडी भी है। साथ में रोहित शेट्टी के प्रिय कलाकार जॉनी लीवर, बोमन ईरानी, संजय मिश्रा, मुकेश तिवारी और 'सिंघम 2 से जुडे पंकज त्रिपाठी भी हैं। रोहित की फिल्मों में सहयोगी कलाकारों की ज्ाोरदार भूमिका है। वे फिल्म में घटनाएं जोडते हैं और ड्रामा बढाते हैं।

गाडिय़ों का स्टंट

पिछली फिल्मों की तरह इसमें भी रोहित ने गाडिय़ां उडाई हैं। बस, इतना फर्क है कि इस बार महंगी और बडी गाडिय़ां हैं। रोहित हंसते हुए कहते हैं, 'इस बार निर्माता शाहरुख ख्ाान थे। 'दिलवाले बडे स्केल पर बन रही थी। विदेशी लोकेशन के हिसाब से भी हमें प्रोडक्शन वैल्यू का ख्ायाल रखना था। वहां देसी गाडिय़ां उडाते तो वह बैकग्र्राउंड से मेल नहीं खाता। सभी जानते हैं कि रोहित शेट्टी की फिल्मों की लोकेशन भारत में ही होती हैं। ख्ाासकर गोवा उनकी फिल्मों में ज्ारूर आता है। वे बताते हैं, 'इस बार भी गोवा है, लेकिन 'दिलवाले के किरदारों केविदेशी कनेक्शन की वजह से मुझे भी विदेश जाना पडा। विदेश जाना तय हो गया तो मैंने सोचा कि किसी ऐसे देश चलते हैं, जहां किसी और ने शूटिंग नहीं की हो। इस लिहाज्ा से मुझे आइसलैंड और बल्गारिया सही लगा। आइसलैंड में कुछ विदेशी फिल्मों की शूटिंग हुई हैं। बल्गारिया में अभी तक दक्षिण भारत की एक फिल्म शूट की गई है। 'दिलवाले में हिंदी सिनेमा के दर्शकों ने नए लोकेशन देखे। 'रंग दे मुझे गेरुआ की मनोहारी पृष्ठभूमि ने सभी को चौंका दिया था। गाने और फिल्म देखने के बाद कुछ लोग यही मानते रहे कि हम सभी ने वीएफएक्स से वैसे बैकड्रॉप तैयार किए। सच्चाई यह है कि सब कुछ रीअल है। आइसलैंड के लोकेशन इतने ख्ाूबसूरत और विस्तृत हैं कि एकबारगी अपनी आंखों पर भी यकीन नहीं होता।

कर्णप्रिय संगीत

रोहित शेट्टी ने 'दिलवाले में पहली बार रोमैंटिक गाने रखे और उन्हें पूरी भव्यता के साथ शूट किया। उनकी पिछली फिल्मों में गानों पर इतना ज्ाोर नहीं रहता था। 'दिलवाले में उसकी ज्ारूरत भी वे शाहरुख और काजोल के मत्थे मढते हैं। वे कहते हैं, 'सचमुच मुझ पर दबाव था और सभी कह रहे थे कि दो-चार अच्छे गाने तो होने ही चाहिए। अगर मैंने लोकप्रिय रोमैंटिक जोडी ली है तो उनके रोमैंस को दिखाने के लिए रोमैंटिक गानों का होना लाज्िामी है। यही कारण है कि प्रीतम को टीम में शामिल किया गया और गीत लिखने के लिए अमिताभ भट्टाचार्य आए। उन गानों को शूट करने की भी लंबी कहानी है। आइसलैंड में माइनस टेंपरेचर में काजोल और शाहरुख ने गाने को शूट किया। क्रू तो गर्म कपडों से लैस था। शाहरुख और काजोल को मौसम के हिसाब से कपडे नहीं पहनाए जा सकते थे। काजोल शॉट देती थीं और उन्हें झट से कंबल में लपेट दिया जाता था। इतनी ठंड में शूट करने की चुनौती को उन्होंने स्वीकार किया।

दर्शकों पर भरोसा

रोहित शेट्टी मानते हैं कि उन्हें अपनी मेहनत और क्षमता के अनुपात में सराहना नहीं मिलती। अधिकतर क्रिटिक उनकी खिल्ली उडाते हैं। उनकी राय में रोहित की फिल्मों में गाडिय़ों को उडाने के सिवा होता क्या है? रोहित शेट्टी ऐसे समीक्षकों की परवाह नहीं करते। वे 'दिलवाले के साथ अपनी पुरानी फिल्मों का उदाहरण देते हैं, 'किसी भी डायरेक्टर की एक-दो फिल्में संयोग से चल सकती हैं। अगर मेरी आठ फिल्में चली हैं तो इतना तो पक्का है कि दर्शकों ने उन्हें पसंद किया है। दर्शकों को कोई भी बरगला नहीं सकता।

रोहित नहीं मानते कि उन्हें सफलता का कोई फॉम्र्युला मिल गया है। वे अपनी सोच ज्ााहिर करते हैं, 'मुझे लगता है कि दर्शक मनोरंजन के लिए मेरी फिल्में देखने आते हैं। मैं भी यही चाहता हूं कि वे परिवार के साथ मेरी फिल्में देखने आएं और उन्हें सबके साथ मेरी फिल्म देखते हुए झेंपना न पडे। मेरी यह भी कोशिश रहती है कि मेरी फिल्मों में डबल मीनिंग संवाद न हों। मेरी फिल्में फेमिली मनोरंजन के लिए होती हैं। मैं आलोचकों को चुनौती देता हूं कि वे मेरे दर्शकों के सामने सिनेमाघर में आकर बोलें। कुल मिला कर ये लोग नौसिखिए हैं, जिन्हें यह नहीं मालूम कि फिल्में कैसे बनती हैं। वे दर्शकों के सामने ऐसी आलोचना करके देखें, उन्हें समझ आ जाएगा कि मेरी फिल्में क्यों चलती हैं। मेरे दर्शक भी उनके लिखे की परवाह नहीं करते। वे मेरी फिल्में देखते हैं और ख्ाूब देखते हैं।

जब चौंकीं काजोल

शाहरुख खान 'दिलवाले को अपनी ख्ाास फिल्म मानते हैं। वे रोहित की सोच और कल्पना से चकित रहते हैं। वे बताते हैं, 'मैं तो उनके साथ काम कर चुका था। 'चेन्नई एक्सप्रेस में उन्होंने मुझे चौंका दिया था। इस बार चौंकने की बारी काजोल की थी। वह शूट करने आईं तो दो दिनों के बाद उन्होंने पूछा कि पता नहीं कैसे क्या शूट चल रहा है? मैंने उनकी आशंका रोहित से ज्ााहिर की तो रोहित ने अपने शूट किए हुए हिस्से दिखाए। काजोल विमुग्ध हो गईं। उन्होंने फिर कोई सवाल नहीं किया। मुझे लगता है कि रोहित ने अपने अनुभवों से ख्ाास मनोरंजक शैली विकसित कर ली है। धीरे-धीरे वे दर्शकों के बीच भी स्वीकृत और लोकप्रिय हो गए हैं।

अजय ब्रह्म्ाात्मज