भारत सहित दुनिया के लगभग हर हिस्से में उनके श्रोता फैले हुए हैं। फिलहाल वह एक म्यूजिक शो इंडियन आइडल में नजर आ रहे हैं। पिछले दिनों दिल्ली में हुई मुलाकात में उनसे हुईं संगीत के बारे में ढेर सारी बातें।

नगम आज भारत के सबसे कामयाब गायकों में से एक हैं। मो. रफी को अपना आदर्श मानने वाले सोनू ने पहली बार स्टेज पर उनका गीत 'क्या हुआ तेरा वादा... गाया और इसके बाद कभी पीछे मुडकर नहीं देखा। राष्ट्रीय पुरस्कारों सहित कई अन्य प्रतिष्ठित अवॉड्र्स हासिल कर चुके सोनू निगम इन दिनों म्यूजिक शो 'इंडियन आइडल के सीजन 7 में बतौर जज अनु मलिक और फराह खान के साथ आ रहे हैं। उनसे संगीत और जीवन के अन्य पहलुओं के बारे में हुई एक बातचीत।

आप रफी साहब को अपना आदर्श मानते हैं। उनकी आवाज में ऐसा क्या है, जो उन्हें अपने समकालीन गायकों से अलग करता है? उनके कौन से गाने आपके दिल के करीब हैं? -मो. रफी जैसा कोई सिंगर इंडस्ट्री में नहीं हो सकता। वह अकेले सिंगर हैं, जिन्होंने न सिर्फ नाम कमाया बल्कि इज्जत भी कमाई। वह हर तरह का गाना गा सकते थे। उनकी रूहानी आवाज हर एहसास पर खरी उतरती थी। उन्होंने मस्ती भरे गाने गाए तो सैड व सेंटीमेंटल गाने भी गाए। भजन, देशभक्ति गीतों के अलावा गजलों में भी उनकी आवाज का जादू नजर आता है। उनके समकालीन किशोर दा, मन्ना डे तक उनका बहुत सम्मान करते थे। मुझे तो उनके सभी गाने पसंद हैं, लंबी सूची है...। फिर भी मुझे 'ये न थी हमारी किस्मत कि विसाले यार होता, 'तुम जो मिल गए हो तो ये लगता है, 'तुम्हारी जुल्फों के साये में शाम कर लूंगा, 'मन तडपत हरि दर्शन को आज... जैसे गाने बहुत पसंद हैं।

आप कई साल बाद म्यूजिकल शो में जज बनकर आ रहे हैं। इतने दिनों बाद वापसी की क्या वजह है? यह मेरा तीसरा शो है। बीच में कुछ वर्ष मैं यूएस में था। वहीं बेटे नेवान का जन्म हुआ। अब लौटा हूं, तो शोज कर रहा हूं। -क्या ऐसे प्लेटफॉर्म वाकई प्रतिभाओं को उभारने में मददगार साबित होते हैं? कैसी आवाजें आ रही हैं आजकल? देखिए, दौर चाहे कोई हो, मंजिल हासिल करने के लिए हर किसी को कडी मेहनत करनी पडती है। मैंने भी बहुत मेहनत की, आज भी कर रहा हूं। हां- मैं मानता हूं कि ऐसेप्लेटफॉर्म सचमुच लोगों के टैलेंट को बाहर निकालने का काम करते हैं। ऐसे मंच प्रतिभाओं को और निखारते हैं।

हम 30-40 साल पुराने गाने आज भी सुनते हैं मगर नए गानों की उम्र कम हो गई है। क्या आज पहले जैसी आवाजें नहीं हैं या कोई खामी है? -हर दौर में बदलाव होते हैं। साहित्य, भाषा, खानपान एवं पहनावे में बदलाव आता है तो संगीत में क्यों न आए? हमें हर नई चीज को स्वीकार करना चाहिए। जहां तक अच्छे या बुरे गानों की बात है तो हर दौर में ऐसे गाने बने हैं। ऐसा कोई समय नहीं होता, जब केवल अच्छे गाने बने हों या सिर्फ बुरे गाने ही बने हों। आज भी बहुत अच्छा संगीत तैयार हो रहा है। पुराने और नए को मिक्स किया जा रहा है ताकि नई पीढी तक पुराना संगीत पहुंच सके और ये पीढी भी पुराने संगीत की ताकत को महसूस कर सके।

पिछले दिनों आपका एक विडियो काफी वायरल हुआ था, जिसमें आप भेष बदल कर रोड साइड हारमोनियम पर गा रहे थे... -हम खुद को जितना समझदार समझते हैं, उतने होते नहीं हैं। कई बार हमारे सामने हीरा होता है और हम उसे कोयला समझते हैं। उसी हीरे की जब मार्केटिंग हो जाती है तो हमें कीमत समझ आ जाती है। मैंने काफी देर तक हारमोनियम बजा कर गाना गाया और पब्लिक ने मुझे नहीं पहचाना। भीड एकत्र हुई लेकिन इसके लिए मुझे काफी मशक्कत करनी पडी और कमाई के नाम पर मेरे हाथ में सिर्फ 12 रुपये आए। इस रोड साइड शो के जरिये मेरा मकसद केवल यह दिखाना था कि अगर मैं सोनू निगम न होकर कोई आम चेहरा हूं तो मुझे सुनने वाले ज्यादा नहीं होंगे, भले ही मैं कितना भी अच्छा गाऊं। अभी तक किसी भी गायक ने ऐसा नहीं किया, इसलिए यह अनुभव तो मुझे हमेशा याद रहेगा।

आपके बेटे नेवान ने भी कई जगह अपनी आवाज दी है। क्या उसे भी संगीत की दुनिया में लाने का इरादा है? -मैंने नेवान को कभी नहीं कहा कि वह गाए या न गाए। उसे जो भी बनना है, वह बने। मैं चाहता हूं कि वह सिर्फ इंसान बने, एक सुखी-संतुष्ट इंसान... मेरे जैसा नहीं-अपने जैसा। वह चाहे म्यूजिक में आए, इंजीनियर बने या ऐक्टर....यह उसकी मर्जी होगी। मेरी कामना तो बस यही है कि वह जो भी करे-उसमें खुश रहे।

क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ, जब प्रोफेशनल जरूरत के लिए आपने कोई ऐसा काम किया हो, जो मन लायक न हो या जिससे आपको खुशी न मिली हो? -कभी नहीं...। अगर मैं कोई काम नहीं करना चाहता तो उसे दबाव में नहीं करता। मैंने हमेशा मन का काम किया है। हर किसी के पास हर मुकाम पर चॉइस होती है। किसी भी पडाव पर आप यह नहीं कह सकते कि आपके पास चॉइस नहीं है। अगर आज नहीं है तो कभी नहीं होगी क्योंकि पैसे या कामयाबी का कोई अंत नहीं है। इसलिए वही करें, जो मन को भाए। मैं मन की जिंदगी जीता आया हूं और आगे भी ऐसे ही जिऊंगा।

देश-विदेश, हर जगह आपने म्यूजिक शो किए हैं। कोई यादगार वाकया... -कुछ समय पहले दुबई में परफॉर्म कर रहा था। वहां रूस, बेलारूस और मॉस्को से काफी लोग आए थे। कार्यक्रम के बाद उन्होंने स्टेज पर आकर मुझे बुके भेंट किया। इसके बाद मेरा ही छोटा सा स्टैच्यू गिफ्ट दिया। वह स्टैच्यू मेरे पास है। विदेशी दर्शकों का यह प्यार पाकर मुझे बहुत अच्छा लगा।

परिवार को समय दे पाते हैं? -मैं कभी इतना व्यस्त नहीं रहता कि उन्हें समय न दे सकूं। इन दिनों बिजी हूं, यात्राएं भी ज्यादा हो रही हैं। फिर भी कोशिश रहती है कि परिवार का कोई न कोई सदस्य मेरे साथ रहे। पापा, पत्नी या बेटा...कोई भी।

संगीत को कैसे परिभाषित करते हैं? -यह मुझे खुशी और आत्मिक संतुष्टि देता है। वैसे मैं चाहे लिखूं, गाऊं या डांस करूं, हर काम गंभीरता से करता हूं। संगीत के बारे में सब कुछ जानना चाहता हूं। हर तरह का संगीत सुनता हूं, उसकी सराहना करता हूं।