इलाहाबाद। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग, इलाहाबाद की प्रथमा व मध्यमा [विशारद] डिग्री, हाईस्कूल व इंटर के समकक्ष नहीं है। ऐसे में इस डिग्री के आधार पर लिपिक पद पर मृतक आश्रित कोटे में की गई नियुक्ति को निरस्त करने के आदेश में कोई अवैधानिकता नहीं है। साथ ही, कोर्ट ने एटा के जिलाधिकारी को निर्देश दिया है कि वह याची अपीलार्थी को चतुर्थ श्रेणी पद पर नियुक्त करे।

आदेश न्यायमूर्ति सुनील अम्बवानी तथा न्यायमूर्ति पंकज मित्तल की खंडपीठ ने उर्मिला देवी की विशेष अपील को निस्तारित करते हुए दिया है। याची के पति कलेक्ट्रेट एटा में लिपिक थे, सेवाकाल में इनकी मौत हो गई याची ने मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति की मांग की, जिस पर उसे लिपिक पद पर नियुक्ति दी गई, बाद में पता चला उसकी डिग्री मान्य नहीं है।

जिलाधिकारी ने नियुक्ति निरस्त कर दी, एकल न्यायपीठ ने मध्यमा डिग्री को इंटर के समक्ष न मानते हुए याची को लिपिक पद के योग्य नहीं माना और याचिका खारिज कर दी जिसे अपील में चुनौती दी गई थी।

न्यायालय ने राजस्थान प्रदेश बनाम सरदार शहर व अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के हवाले से कहा कि सम्मेलन न तो विश्वविद्यालय है और न ही शिक्षा परिषद, यह सोसाइटी पंजीकरण एक्ट के तहत पंजीकृत सोसायटी है। यह शिक्षण संस्थान नहीं है क्योंकि यहां पढाई नही होती और न ही इससे संबद्ध कोई स्कूल या कालेज है। साथ ही, इसे किसी शिक्षा परिषद से मान्यता नहीं मिली है।