राजस्थान: दिव्यांगता नहीं रोक पाई सपनों की डोली, उदयपुर में 50 जोड़ों ने थामा एक-दूसरे का हाथ
नारायण सेवा संस्थान, उदयपुर में 47वें दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह समारोह में 50 जोड़ों ने सात फेरे लिए।

उदयपुर में 50 जोड़ों ने थामा एक-दूसरे का हाथ।
HighLights
उदयपुर में 47वें सामूहिक विवाह में 50 दिव्यांग जोड़ों ने शादी की।
नारायण सेवा संस्थान ने दिव्यांगों को सम्मान और आत्मनिर्भर जीवन दिया।
नवदंपतियों को गृहस्थी शुरू करने के लिए आवश्यक सामग्री भेंट की गई।
जागरण संवाददाता, उदयपुर। बैसाखी के सहारे जिंदगी की मुश्किलें पार करने वाले, कृत्रिम अंग से चलना सीखने वाले और सामाजिक धारणाओं से आगे बढ़कर अपने सपनों को चुनने वाले 100 युवक-युवतियों ने रविवार को नई जिंदगी की शुरुआत की।
नारायण सेवा संस्थान के सेवा महातीर्थ, बड़ी में आयोजित 47वें दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह समारोह में 50 जोड़ों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सात फेरे लेकर एक-दूसरे का हाथ थामा। विवाह मंडप में दिव्यांगता पीछे छूट गई और साथ, सम्मान व आत्मनिर्भर जीवन का सपना सामने था।

19 और 20 सितंबर को आयोजित दो दिवसीय समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से आए 100 वर-वधू परिणय सूत्र में बंधे। खास बात यह रही कि इनमें कई ऐसे युवक-युवतियां शामिल थे, जिनका नारायण सेवा संस्थान में उपचार, ऑपरेशन, कृत्रिम अंग प्रत्यारोपण, सहायक उपकरण अथवा कौशल प्रशिक्षण हुआ है।
इलाज और पुनर्वास के लिए कभी संस्थान पहुंचे ये युवक-युवतियां अब उसी परिसर से जीवनसाथी का हाथ थामकर नई गृहस्थी की ओर रवाना हुए।
दिव्यांगता नहीं, क्षमताओं से बनी पहचान
संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि देश में 2.61 करोड़ दिव्यांगजन हैं, जिन्हें आज भी सामाजिक बाधाओं और पुरानी धारणाओं का सामना करना पड़ता है। लोगों का ध्यान अक्सर व्यक्ति की दिव्यांगता पर जाता है, उसकी क्षमताओं पर नहीं।
उन्होंने कहा कि समारोह में ऐसे जोड़े भी हैं, जिनमें दिव्यांग ने सक्षम व्यक्ति को और सक्षम व्यक्ति ने दिव्यांग को जीवनसाथी चुना है। उन्होंने इन जोड़ों की सोच को सामाजिक धारणाओं से ऊपर उठकर जीवन का साथ चुनने वाला बताया।

अग्रवाल ने बताया कि पिछले 22 वर्षों में संस्थान के माध्यम से 2,582 दिव्यांग युवक-युवतियों के विवाह संपन्न कराए जा चुके हैं। संस्थान का उद्देश्य दिव्यांगजनों को दया नहीं, बल्कि सम्मान, अवसर और सुरक्षित भविष्य उपलब्ध कराना है।
सात फेरों के साथ गृहस्थी भी सौंपी
नवदंपतियों को नई गृहस्थी शुरू करने के लिए पलंग, गद्दा, बिस्तर, अलमारी, गैस चूल्हा-सिलेंडर, किचन सेट, प्रेशर कुकर, तवा-कढ़ाई, पंखा, सिलाई मशीन, ट्रॉली बैग सहित दैनिक उपयोग की सामग्री दी गई।
जरूरत के अनुसार व्हीलचेयर और अन्य सहायक उपकरण भी उपलब्ध कराए गए। समारोह में संत-महात्माओं, समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों तथा देश-विदेश से आए अतिथियों ने नवदंपतियों को आशीर्वाद दिया। कई अतिथि कन्यादान में सहभागी बने। जोधपुर के स्वतंत्रता सेनानी परिवार की सुशीला परिहार को करुणा भाव और सेवा भावना के लिए सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर यश मेहता, पलक अग्रवाल, निदेशक वंदना अग्रवाल और सहसंस्थापिका कमला देवी अग्रवाल मौजूद रहे। संस्थापक कैलाश मानव ने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया।
