बूंदी महिला अस्पताल में सी-सेक्शन के बाद 2 प्रसूताओं की मौत, ऑपरेशन थिएटर सील; महिला डॉक्टर APO
बूंदी के जिला महिला अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद दो प्रसूताओं की मौत हो गई, जबकि दो अन्य की हालत बिगड़ने पर उन्हें कोटा रेफर किया गया है।

बूंदी अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद दो महिलाओं की मौत

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डिजिटल डेस्क, कोटा। राजस्थान के बूंदी जिले के जिला महिला अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी (सी-सेक्शन) कराने वाली दो प्रसूताओं की कोटा के निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि दो अन्य महिलाओं की हालत बिगड़ने पर उन्हें सरकारी मेडिकल कॉलेज कोटा रेफर किया गया है। घटना के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
सर्जरी के बाद बिगड़ी हालत
जानकारी के अनुसार, टोंक निवासी कविता कुमावत (32) और बूंदी निवासी वर्षा सैन (28) को मंगलवार को जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बुधवार को सी-सेक्शन सर्जरी के जरिए दोनों ने बच्चों को जन्म दिया।
जन्म के बाद दोनों नवजात पूरी तरह स्वस्थ हैं, लेकिन सर्जरी के तुरंत बाद दोनों महिलाओं की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें जीएमसी कोटा रेफर कर दिया।
परिजन उन्हें बेहतर इलाज के लिए कोटा के अलग-अलग निजी अस्पतालों में ले गए, जहाँ बुधवार दोपहर दोनों महिलाओं ने दम तोड़ दिया।
इसके अलावा, गुरुवार को अस्पताल में भर्ती दो अन्य महिलाओं—जीनत (20) और पिंकी (23)—को भी सी-सेक्शन के बाद इसी तरह की जटिलताओं का सामना करना पड़ा। उन्हें भी जीएमसी कोटा रेफर किया गया, जहां फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
घटना के बाद एक्शन
घटना की गंभीरता को देखते हुए बूंदी अस्पताल प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। दोनों महिलाओं की सर्जरी करने वाली स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. चंद्रेश मीना को उनके वर्तमान पद से मुक्त करते हुए एपीओ (Awaiting Posting Orders) कर दिया गया है।
वहीं संभावित अस्पताल-जनित संक्रमण या सर्जिकल जटिलताओं की जांच के लिए अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर को दो दिनों के लिए सील कर दिया गया है। यहां सैंपलिंग, नसबंदी और कल्चर टेस्ट किए जा रहे हैं।
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए बूंदी एसडीएम की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है, जिसमें सीएमएचओ और स्त्री रोग विभाग के प्रमुख शामिल हैं।
परिजनों का हंगामा और मुआवजे की मांग
अस्पताल के पीएमओ डॉ. एल.एन. मीना ने बताया कि वर्तमान में अस्पताल में 10 उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाएं भर्ती हैं। आपात स्थिति में सामान्य ऑपरेशन थिएटर का उपयोग करने या मरीजों को कोटा रेफर करने के इंतजाम किए गए हैं।
दूसरी तरफ, मृतका कविता और वर्षा के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कड़ी कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को 50-50 लाख रुपये मुआवजे की मांग की है।
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
