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राजस्थान हाई कोर्ट में पहली बार रात 2 बजे तक चली सुनवाई, पार्षदों को मिली गिरफ्तारी से राहत

Published: Mon, 21 Sep 2026 11:36 PM (IST)

राजस्थान हाई कोर्ट ने नगर निकाय चुनाव से पहले पार्षदों और उम्मीदवारों को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण देने के लिए ...और पढ़ें

राजस्थान हाई कोर्ट में निकाय चुनाव से पहले देर रात तक चली सुनवाई

राजस्थान हाई कोर्ट में निकाय चुनाव से पहले देर रात तक चली सुनवाई

HighLights

  1. राजस्थान हाई कोर्ट में देर रात 2 बजे तक ऐतिहासिक सुनवाई हुई।

  2. नगर निकाय चुनाव से पहले पार्षदों को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण मिला।

  3. हनुमानगढ़, बीकानेर के पार्षदों को चुनाव में भाग लेने की अनुमति मिली।

जागरण संवाददाता, जोधपुर। नगर निकायों में सोमवार को हुए महापौर और सभापति चुनाव से पहले राजस्थान हाई कोर्ट में रविवार देर रात तक विशेष सुनवाई हुई। अदालत ने हनुमानगढ़ के नौ पार्षदों और बीकानेर के एक पार्षद को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया।

एक मामले की सुनवाई सोमवार तड़के करीब 2 बजे तक चली। हाई कोर्ट के इतिहास में इस तरह की देर रात सुनवाई का यह पहला मामला माना जा रहा है।

गौरतलब है कि प्रधान न्यायाधीश संजय कुमार अग्रवाल के निर्देश पर रविवार को विशेष पीठों का गठन किया गया था। कई पार्षदों और उम्मीदवारों ने आशंका जताई थी कि चुनाव से ठीक पहले उनके खिलाफ दर्ज मामलों में गिरफ्तारी हो सकती है, जिससे वे मतदान करने या चुनाव लड़ने से वंचित हो सकते हैं।

न्यायाधीश सुनील बेनीवाल की पीठ ने रात करीब 11.15 बजे अहमद की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए उन्हें चुनाव में मतदान की अनुमति देने के निर्देश दिए। याचिका में कहा गया कि पुराने विवाद से जुड़े मामले में पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया था और आशंका थी कि इससे उनका मतदान प्रभावित हो सकता है।

इससे पहले अदालत ने नागौर की कुचेरा नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष एवं पार्षद तेजपाल मिर्धा और श्रीविजयनगर नगरपालिका के सभापति पद के उम्मीदवार सुशील मूंदड़ा को भी गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिया था।

नगर निकाय चुनावों के बीच पार्षदों को प्रभावित करने और गिरफ्तारी की आशंकाओं से जुड़ी याचिकाओं पर हाई कोर्ट का यह हस्तक्षेप चुनाव से कुछ घंटे पहले हुआ।