विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

कहां बना था भारत का वो पहला खादी तिरंगा, जिसे पंडित नेहरू ने 15 अगस्त 1947 को लालकिले पर फहराया?

By Narendra SharmaEdited By: Sakshi Gupta
Published: Fri, 14 Aug 2026 11:42 PM (IST)

राजस्थान के दौसा जिले के आलूदा गांव के बुनकरों ने भारत का पहला राष्ट्रीय खादी तिरंगा बुना था, जिसे पंडित नेहरू ने लाल किले पर फहराया था।

भारत का पहला खादी तिरंगा (फाइल फोटो)

भारत का पहला खादी तिरंगा (फाइल फोटो)

HighLights

  1. आलूदा गांव के बुनकरों ने बुना था भारत का पहला खादी तिरंगा।

  2. पंडित नेहरू ने 15 अगस्त 1947 को लाल किले पर फहराया।

  3. बुनाई कम हुई, दौसा खादी समिति बनाती है हजारों तिरंगे।

नरेंद्र शर्मा, जयपुर। आजाद भारत का पहला राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा झंडा) की खादी का कपड़ा राजस्थान में दौसा जिले के आलूदा गांव के स्थानीय बुनकरों ने हाथ से बुनकर तैयार किया था।

देश के पहले प्रधानमंत्री स्व.जवाहर लाल नेहरू ने 15 अगस्त, 1947 को आलूदा गांव के बुनकरों द्वारा तैयार किए गए खादी के कपड़े से बने राष्ट्रीय ध्वज को लाल किले पर फहराया था।

कहां बना था पहला खादी तिरंगा?

आलूदा गांव के बुनकर स्व. चौथमल महावर, शंभुदयाल, नानगराम और रेवड़मल ने अपने हाथों से सूती खादी का कपड़ा दो महीने की मेहनत से बुनकर तैयार किया था।

पहले राष्ट्रीय ध्वज के इस कपड़े को बाद में राजस्थान के प्रथम मुख्यमंत्री स्व.हीरालाल शास्त्री, स्वतंत्रता सेनानी माणिक्यलाल वर्मा सहित अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ने अलवर जिले के गोविंदगढ़ में रंगाई करवा कर तिरंगा करवाया था। शास्त्री और वर्मा इस झंडे को दिल्ली लेकर गए थे, जहां पंडित नेहरू ने पहली बार राष्ट्रीय ध्वज लालकिले पर फहराया था।

दौसा जिला खादी समिति के पदाधिकारियों एवं पहला राष्ट्रीय ध्वज का कपड़ा बुनने वाले बुनकरों के स्वजनों का दावा है कि इसके बाद कई बार आलूदा गांव के बुनकरों द्वारा तैयार किए गए कपड़े से राष्ट्रीय ध्वज बनाए गए थे। स्व.चौथमल और शंभुदयाल को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार भी मिला था।

चौथमल की मौत के बाद उसके स्वजन गांव के बुनकरों के साथ मिलकर राष्ट्रीय ध्वज का सूती कपड़ा बुनते थे। जिस आलूदा गांव की प्रसिद्धी पहले राष्ट्रीय ध्वज के लालकिले पर फहराने से हुई थी। वहां पिछले 45 वर्षों से कपड़े बुनने का काम लगभग समाप्त हो गया है। मात्र चार परिवार खादी के कपड़े बनाते हैं, लेकिन झंडे के कपड़े वे भी नहीं बना रहे हैं।

पिछले कुछ वर्षों से दौसा क्षेत्रीय खादी समिति द्वारा बनेठा गांव के बुनकरों द्वारा खादी से बुनकर तैयार किए गए कपड़े की तिरंगे में रंगाई मुंबई में करवाई जा रही है। दौसा खादी समिति एक साल में करीब दस हजार तिरंगे झंडे तैयार करवाती है, जो देश के विभिन्न हिस्सों में भेजे जाते हैं।

समिति के मंत्री अनिल शर्मा ने कहा, आलूदा गांव के चार बुनकरों द्वारा तैयार किए गए कपड़े से ही राष्ट्रीय ध्वज बनाया गया था। इस कारण चारों बुनकरों का कई बार प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न समारोह में सम्मान किया गया था। चौथमल की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर हुई। उन्होंने कहा कि अब हाथ के स्थान पर मशीन से कपड़े तैयार किए जाते हैं।

यह भी पढ़ें- भारत को 10 महीने पहले ही मिली आजादी, क्यों चुनी गई 15 अगस्त की तारीख?