उदयपुर, जेएनएन। जिस आजाद भारत की कल्पना की थी, वह यह नहीं है। आजादी के बाद यहां जितने तरह के रंग देखने को मिले उनमें कालिख ही देखने को ज्यादा मिली। देश में भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी है और इसे खत्म करने के प्रयास ना के बराबर हैं। यह कहना है कि देश के वयोवृद्ध स्वधीनता सेनानी ललित मोहन शर्मा का।

देश के मौजूदा हालात पर स्वतंत्रता सेनानी ने जताई चिंता 

उदयपुर के शर्मा बताते हैं कि देश की स्वतंत्रता के लिए जो पीड़ा हमने सही, वह सुखद लगती थी लेकिन अब की पीड़ा बेहद कष्टदायी है। जिस भारत की कल्पना स्वाधीनता सेनानियों ने की और उसके लिए अंग्रेजी सरकार से संघर्ष कर जीत हांसिल की। यह देश ऐसा नहीं है। हमारी कल्पनाओं में था कि आजादी के बाद हर वर्ग को न्याय मिलेगा। गरीब और वंचित वर्ग को उठने के अवसर होंगे लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। वर्तमान में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि न्याय तो दूर की बात है। छोटे-मोटे काम के लिए भी पैसे देने पड़ते हैं। भ्रष्टाचार से कोई अछूता नहीं है।

स्वतंत्रता सेनानी से मांगी गई रिश्वत

वह अपने साथ बीते संस्मरण को याद करते हुए बताते है कि किस तरह चार दशक पहले स्वाधीनता सेनानी होने के बावजूद उन्हें भी भ्रष्टाचार की पीड़ा से गुजरना पड़ा। राज्य सरकार ने स्वाधीनता सेनानियों के परिचय पत्र जारी करने का निर्णय लिया और उनके पास भी परिचय पत्र बनवाने के लिए राज्य सरकार की ओर से पत्र आया था। जिसके लिए उन्होंने चार—पांच बार जिला कलक्टर कार्यालय के चक्कर लगाए लेकिन हर बार उन्हें कोई ना कोई बहाना बनाकर टाल दिया जाता।

जब सीधे कलक्टर के टेबल पर रख दिए 50 के नोट

थक—हारकर उन्होंने परिचय पत्र नहीं लेने का मानस बनाया और घर लौट रहे थे कि कलक्टर कार्यालय के बाहर साफा पहने व्यक्ति ने कहा कि आप 50 का नोट टिकाओ और परिचय पत्र प्राप्त कर लो। तब उन्होंने ठान लिया कि वह इस व्यवस्था के विरोध में काम करेंगे। जिसके लिए उन्होंने जो उपाय सोचा वह चौंकाने वाला रहा। वह जिला कलक्टर से मिले और उन्हें अपना परिचय देकर सीधे उनकी टेबल पर 50 का नोट रखकर परिचय पत्र दिलाने के कहा।

पहले तो कलक्टर को समझ में नहीं आया और जब उन्हें पता लगा तो तुरंत उस कार्मिक को बुलाकर कड़ी फटकार लगाई। साथ ही पांच मिनट में उनका परिचय पत्र बनवाने के बाद सम्मान के साथ विदा किया। स्वाधीनता सेनानी शर्मा बताते हैं कि उन्होंने 8 नौकरियां बदलीं, लेकिन गुलामी कहीं नहीं की। गलत काम कराने का दबाव होता तो जेब में इस्तीफा रखते थे। आज स्वतंत्रता भटक गई है। भ्रष्टाचारी को सख्त से सख्त सजा होनी चाहिए।

यह भी पढ़ेंRepublic Day 2023: गणतंत्र दिवस पर पीएम नहीं राष्ट्रपति फहराते हैं तिरंगा, जानें क्या है इसकी वजह

Edited By: Piyush Kumar

जागरण फॉलो करें और रहे हर खबर से अपडेट