जागरण संवाददाता, जयपुर। राजस्थान के तीसरे सबसे बड़े मुकुंदरा टाइगर रिजर्व के आसपास बसे गांवों के लोगों ने इस बार दिवाली पर पटाखे नहीं चलाए। ग्रामीणों ने ईको फ्रेंडली दिवाली मनाई। वन विभाग ने इसके लिए पहल की और ग्रामीणों ने इसमें सहयोग दिया। इस पहल का वन्यजीवों ने स्वागत करते हुए कहा कि इससे वन्यजीवों के आराम में किसी प्रकार का खलल पैदा नहीं होगा। ग्रामीणों ने दिवाली पर पटाखे नहीं चलाए केवल नए कपड़े पहने और घरों के बाहर दीपक जलाया। घरों में पारंपरिक मिठाई बनाई गई।

वन विभाग के अधिकारी ग्रामीणों को पिछले कई दिनों से जागरूक करने में जुटे थे कि पटाखों की तेज आवाज से वन्यजीवों के आराम में खलल पैदा होने के साथ ही प्रदूषण भी बढ़ेगा, इसलिए पटाखों में पैसे जलाने से बेहतर ग्रामीणों ने दो पैसे बचाकर घर में दीप जलाकर दीपावली मनाने का निर्णय लिया।

वन मंत्री सुखराम विश्नोई ने बताया कि अधिकारियों ने गांवों में ईको फ्रेंडली दीपावली मनाने को लेकर जन जागरण अभियान चलाकर ग्रामीणों को जागरूक किया। इस जागरूकता के लिए गांव-गांव रेंजर अधिकारियों, फोरेस्ट गार्ड और वनकर्मियों ने कैंप लगाकर ग्रामीणों से ईको फ्रेंडली दिवाली मनाने की समझाइश दी। इस पर ग्रामीणों ने भी एक आवाज में कहा कि वे वन्यजीवों को किसी भी तरह की पटाखे न जलाकर भयभीत नहीं करेंगे। पटाखों से जंगल में आग लगने का खतरा भी रहता है।

मुकुंदरा रिजर्व के रेंजर संजीव गौतम ने बताया कि इस बार भैरूपुरा, बोराबांसा सहित एक दर्जन गांवों में ईको फ्रेंडली दिवाली मनाई गई। वन विभाग की तरफ से सोमवार को दिवाली स्नेह मिलन का आयोजन किया गया। इसमे काफी लोगों ने शिरकत की।

उल्लेखनीय है कि मुकुंदरा रिजर्व में फिलहाल दो बाघ और दो बाघिन, पांच दर्जन से ज्यादा पैंथर, करीब छह दर्जन भालू सहित अन्य कई वन्यजीव हैं।

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Posted By: Sachin Mishra

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