जयपुर, नरेन्द्र शर्मा। राजस्थान के आदिवासियों का बसेरा कहीं मुहानों,कहीं पहाड़ों और कहीं घने जंगलों में है। अब विधानसभा चुनाव निकट आए तो राजनीतिक दलों और नेताओं का दिल आदिवासियों पर आ गया। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों के नेताओं को इस बात का पता है कि जयपुर की सत्ता का रास्ता आदिवासी इलाकों से होकर ही जाता है।

इसी कारण नेताओं का आदिवासियों के प्रति प्रेम उमड़ पड़ा है। आदिवासी बाहुल उदयपुर संभाग की 20 विधानसभा सीटों पर कब्जे को लेकर कांग्रेस और भाजपा के दिग्गजों ने अपनी-अपनी मुहिम का आगाज आदिवासी इलाके से करने की रणनीति बनाई है। कांग्रेस ने अपने चुनाव प्रचार अभियान की शुरूआत आदिवासी बहुल उदयपुर संभाग से प्रारम्भ करने की रणनीति बनाते हुए अगस्त के पहले सप्ताह में पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी की सभा कराने का निर्णय लिया है।

लेकिन राहुल गांधी से पहले मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे आदिवासियों के बीच पहुंच गई। वसुंधरा राजे दो दिवसीय यात्रा पर सोमवार को आदिवासी बहुल जिले डूंगरपुर पहुंची। वसुंधरा राजे ने यहां आदिवासियों से रूबरू होने के साथ ही 85 करोड़ रूपए लागत की विभिन्न योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। वसुंधरा राजे ने आदिवासी महिलाओं के साथ उन्ही की भाषा में संवाद किया।

वसुंधरा राजे 1 अगस्त से प्रारम्भ होने वाली अपनी "सुराज गौरव यात्रा " भी आदिवासी बहुल उदयपुर संभाग के चारभुजा जी मंदिर से करने का निर्णय लिया है।

भाजपा ने मंत्रियों और नेताओं को भेजा आदिवासियों के बीच

राजस्थान के इतिहास के अनुसार अब तक हुए चुनाव में वहीं पार्टी सत्ता में आई है,जिसने आदिवासी बहुल 20 विधानसभा सीटों पर कब्जा जमाया है। इसी को देखते हुए भाजपा ने स्वायत्त शासन मंत्री श्रीचंद कृपलानी,जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री नंदलाल मीणा,राज्यमंत्री धनसिंह रावत,सुशील कटारा,विधायक अर्जुन लाल जीनगर और राज्य जनजाति आयोग की अध्यक्ष प्रकृति खराड़ी सहित एक दर्जन नेताओं को उदयपुर संभाग के डूंगरपुर,बांसवाड़ा,प्रतापगढ़ और चित्तोडगढ़ जिलों की जिम्मेदारी सौंपी है। ये मंत्री और नेता आदिवासियों के बीच जाकर भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे है।

कांग्रेस नेतृत्व ने 20 नेताओं को सौंपी कमान

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अविनाश पांडे ने प्रदेश के आदिवासी बहुल इलाकों की कमान राज्य के पूर्व मंत्री महेन्द्रजीत मालवीय,पूर्व सांसद रघुवीर मीणा,कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव ताराचंद भगोरा,उदय लाल आंजना सहित 20 नेताओं को डूंगरपुर,बांसवाड़ा,चित्तोडगढ़,प्रतापगढ़ और उदयपुर ग्रामीणा के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी है।

आदिवासियों की अहमियत

राज्य के राजनीतिक इतिहास में आदिवासियों की हमेशा अहमियत रही है। राजनीतिक विश्लोषकों का कहना है कि आजादी के बाद से आदिवसी अंचल पारंपरिक तौर पर कांग्रेस का साथ देता रहा है,लेकिन साल 2003 में इस क्षेत्र में भाजपा को कामयाबी मिली।

साल 2003 के चुनाव में इस अंचल से भाजपा को मिली सफलता ने कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया और वसुंधरा राजे के नेतृत्व में सरकार बनाई। इसके बाद साल 2008 में आदिवासियों ने एक बार फिर कांग्रेस का साथ दिया तो अशोक गहलोत की अगुवाई में कांग्रेस की सरकार बनी। साल 2013 के चुनाव में आदिवासियों ने भाजपा को समर्थन दिया तो भाजपा सत्ता में आई।  

Posted By: Preeti jha