उदयपुर, सुभाष शर्मा। झीलों की नगरी की एक झील लोगों के लिए सुरक्षित नहीं है। ऐसा हम नहीं, बल्कि नगर निकाय का कहना है। निकाय ने उदयपुर की गोवर्धन सागर झील के फूटने की आशंका जताई है। जिसके चलते नगर निगम प्रशासन ने इस झील का पानी एक फुट तक कम कर दिया है। इसके बावजूद इस झील की पाल से पानी का रिसाव लगातार जारी है।

नगर निगम ने फौरी तौर रिसाव वाली पाल के नीचे रेती से भरे कट्टे डलवाए हैं लेकिन अतिवृष्टि होने पर वह यह भी पाल को सुरक्षित नहीं रख पाएंगे। नगर निगम के अधिकारी मुकेश पुजारी और शशिबाला सिंह लगातार मौके पर नजर रखे हुए हैं। निगम के अधिकारी मानते हैं कि पाल के रिसाव के बाद इसे सुरक्षित नहीं माना जा सकता।

उदयपुर की प्रमुख झीलों में शुमार गोवर्धन सागर झील सोमवार को लबालब हो गया था। इस पर सुबह पांच बजे छह इंच की चादर चल रही थी। इसी दौरान पता चला कि गोवर्धन सागर झील के शिकारबाड़ी वाले रास्ते पर मंदिर के पास की पाल पर दरारें आने लगी। इस पाल से लगभग आठ जगहों से छेदों के जरिए पानी का रिसाव शुरू हो गया। विशेषज्ञों का कहना है कि ये छेद पानी के दबाव या अन्य भूगर्भिक हलचल के दौरान बड़ी हो सकती हैं। साथ ही पाल को भी तोड़ सकती है। इसके चलते अब गोवर्धन सागर झील की पाल सुरक्षित नहीं मानी जा सकती। 

तीन महीने पहले स्थानीय लोगों ने की थी शिकायत पता चला है कि तीन महीने पहले स्थानीय लोगों ने नगर निगम, सिंचाई विभाग और नगर विकास प्रन्यास को पाल की मरम्मत के लिए पत्र लिखा था। झील की पाल पर चूहों के बिल लोगों ने तीनों ही विभाग के अधिकारियों को दिखाए लेकिन सभी ने एक-दूसरे के क्षेत्राधिकार की बात कहकर इस समस्या को टाले रखा। 

गोवर्धन सागर झील निवासी रघुवीरसिंह का कहना है कि तब किसी अधिकारी ने ध्यान नहीं दिया। उस समय झील में पानी बहुत कम था और उस समय मरम्मत संभव थी लेकिन अब झील लबालब है और अब पानी खाली होने के बाद काम हो पाएगा। इधर, निगम अधिकारी मुकेश पुजारी का कहना है कि पाल की सुरक्षा के लिए फौरी उपाय किए गए हैं। मिट्टी के कट्टे डाले गए हैं। इस मामले में झील संरक्षण समिति के सदस्य डॉ. अनिल मेहता का कहना है कि प्रशासन के ढुलमुल रवैये से शहर का बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है।

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