जयपुर, नरेन्द्र शर्मा। राशन वितरण प्रक्रिया में राजस्थान सरकार ने पोश मशीनों को अनिवार्य कर दिया है,लेकिन इसके लिए सबसे जरूरी मोबाइल नेटवर्क पर ध्यान नहीं दिया। यही कारण है कि खराब मोबाइल नेटवर्क के कारण बांसवाड़ा जिले के दो गांवों के 454 राशन उपभोक्ताओं को पड़ोसी गुजरात के मोबाइल नेटवर्क पर निर्भर रहना पड़ता है।

गुजरात से मोबाइल नेटवर्क सिग्नल मिलने पर ही राशन का वितरण हो पाता है। इन दोनों गांवों के उपभोक्ताओं की परेशानी इस कदर है कि बेहतर नेटवर्क सिग्नल के लिए राशन डीलर और उपभोक्ताओं को पहाड़ी पर चढ़ना पड़ता है। पहाड़ी पर बेहतर सिग्नल मिलता है तो उपभोक्ताओं को राशन मिलता है,कई बार यहां भी सिग्नल गायब हो जाता है तो उपभोक्ताओं को सिग्नल वापसी तक इंतजार करना पड़ता है। यह हाल राज्य के आदिवासी जिले बांसवाड़ा से 70 किलोमीटर दूर बसे गांव रामका मुन्ना और फूलपुरी के है। ये दोनों गांव गुजरात सीमा से पात्र 500 मीटर पहले बसे हुए हैं। सरकारी रिकॉर्ड के हिसाब से तो ये दोनों गांव राजस्थान सीमा में हैं,लेकिन इन्हे प्रत्येक मूलभूत जरूरत के लिए गुजरात पर निर्भर रहना पड़ता है।

रामका मून्ना और फूलपुरी गांव से कुछ दूर पहाड़ी पर गुजरात की कुछ मोबाइल कम्पनियों का नेटवर्क सिग्नल काम करता है। इस कारण गुजरात के लोगों ने गुजरात से मोबाइल फोन की सिम खरीद रखी है। हालांकि इनका नेटवर्क भी पहाड़ी पर चढ़ने पर ही मिल पाता है। राशन ड़ीलर सुबह ही पोश मशीन लेकर पहाड़ी पर चढ़ जाता है और यहां पोश मशीन पर उपभोक्ता को अंगुठा लगाने के बाद पर्ची मिल जाती है। उपभोक्त पर्ची लेकर पहाड़ी से नीचे उतरकर राशन ड़ीलर की दुकान पर जाता है तो उसे राशन मिलता है।

यहां के राशन ड़ीलरों का कहना है कि गुजरात की मोबाइल सिम होने के कारण राशन बांटने के लिए पोश मशीन को चालने के लिए प्रतिमाह 50 से 80 रूपए प्रतिमाह रोमिंग चार्ज अतिरिक्त लग रहे हैं। समय पर राशन वितरण भी नहीं हो पाता है ।  

Posted By: Preeti jha

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