जागरण संवाददाता, जयपुर। राजस्थान के चूरू जिले में दो लड़कियों की दोस्ती प्यार में बदल गई और अब दोनों ने स्वजनों की नाराजगी के बावजूद आपस में शादी कर ली। दरअसल, हरियाणा के जींद स्थित आदमपुर मंडी निवासी 22 वर्षीय युवती करीब एक साल पहले अपनी बहन के ससुराल चूरू जिले के रतनगढ़ में आई थी। यहां उसकी दोस्ती बहन की 18 वर्षीय ननद से हो गई। दोनों में नजदीकियां बढ़ीं और प्यार हो गया। दोनों ने शादी करने का फैसला किया और स्वजनों को इस बात की जानकारी दी। इस पर दोनों ही लड़कियों के स्वजनों ने आपत्ति की। 12 नवंबर, 2021 को रतनगढ़ निवासी युवती अपने घर से निकल कर रेखा के पास हरियाणा पहुंच गई। दोनों ने फतेहाबाद में जाकर शादी कर ली।

परिजनों ने दर्ज करवाई रिपोर्ट

इसी बीच, युवती के पिता ने 14 नवंबर को रतनगढ़ पुलिस थाने में बेटी की गुमशुदगी कर रिपोर्ट दर्ज करवा दी। गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने छानबनीन शुरू की तो पता चला कि दोनों ने शादी कर ली। मोबाइल में उनकी लोकेशन हरियाणा के फतेहाबाद में मिली। इस पर पुलिस की टीम ने वहां पहुंचकर बुधवार दोनों लड़कियों को बरामद कर लिया। दोनों को लेकर पुलिस बृहस्पतिवार को रतनगढ़ पहुंची। यहां पहुंचते ही दोनों ने पुलिस थाने में स्वजनों से साफ कह दिया कि हमने आपस में शादी कर ली है। अब अलग नहीं होंगी। काफी समझाइश के बाद भी दोनों नहीं मानी। फिलहाल, दोनों लड़कियों को रतनगढ़ के नारी निकेतन में रखा गया है। पुलिस थाना अधिकारी का कहना है कि एक-दो दिन में इनके बारे में निर्णय लिया जाएगा।

गौरतलब है कि कुछ साल पहले अमेरिका में आपस में शादी करने वाली दो युवतियों ने भारत लौटने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था। उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर अपनी शादी पंजीकृत करने की मांग की थी। दोनों युवतियों ने दिल्ली हाई कोर्ट में विशेष विवाह अधिनियम के तहत उनकी शादी को पंजीकृत कराने की इजाजत देने की मांग के लिए याचिका दायर की थी। बताया जा रहा है कि दोनों युवतियों ने दावा किया कि दोनों की शादी संयुक्त राज्य अमेरिका में हुई थी, लेकिन भारतीय वाणिज्य दूतावास ने एसएमए के तहत उनके विवाह को पंजीकृत नहीं किया, क्योंकि वे समलैंगिक हैं। दोनों युवतियों की याचिका पर न्यायमूर्ति नवीन चावला की पीठ मामले को मुख्य न्यायामूर्ति के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया था। 

दिल्ली हाई कोर्ट में दायर याचिका में दोनों युवतियों ने दलील दी कि संविधान के अनुच्छेद-21 में किसी व्यक्ति से शादी करने का अधिकार दिया गया है। यह अधिकार पूरी समलैंगिकों पर भी लागू होता है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से एसएमए को लैंगिक पहचान और यौन अभिविन्यास में भेद किए बिना लागू करने का आदेश देने के साथ ही उप-विभागीय मजिस्ट्रेट कालकाजी को उनकी शादी को पंजीकृत करने का निर्देश देने की मांग की है। भारतीय समाज इस तरह की शादी को मान्यता नहीं देता है। ऐसे में यह अपने आप में जटिल मामला है। 

Edited By: Sachin Kumar Mishra