जयपुर, [नरेन्द्र शर्मा ]। राजस्थान के जंगलों में पैदा होने वाली वन उपज अब आदिवासियों की तकदीर बदलेगी । राज्य सरकार ने आदिवासी बहुलता वाले उदयपुर संभाग में लधु वन उपज का मार्केट तैयार करने की योजना बनाई है । इसी दिशा में काम करते हुए 440 लाख रूपए की लगात से देश में पहला वन उपज मार्केट उदयपुर में स्थापित किया गया है ।

जंगलों में फैली वन उपज के सदुपयोग और आदिवासियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए बड़ी मार्केटिंग कम्पिनियों का भी सहयोग  लिया जा रहा है । वन उपज को मार्केट में उपलब्ध करवाने के लिए वन अधिनियम में आवश्यक संशोधन किए गए है । राज्य सरकार का एक मोटा अनुमान है कि उदयपुर संभाग के आदिवासी बाहुल्य बांसवाड़ा,डूगरपुर,प्रतापगढ़ जिलों में करीब एक हजार करोड़ की वन सम्पदा जंगलों में फैली हुई है । लेकिन अब तक जानकारी के अभाव एवं विपणन  व्यवस्था सही नहीं होने के कारण ये वन उपज जंगलों में ही खराब हो जाती है,इतना ही नहीं जटिल वन कानून भी इस मामले में कोढ़  में खाज का काम कर रहे थे । लेकिन अब सरकार इसी वन उपज से आदिवासियों की तकदीर बदलने का प्रयास कर रही है ।

राज्य के कृषि मंत्री प्रभूलाल सैनी का कहना है कि वन अधिनियम के तहत अब तक वन उत्पाद बेचने के लिए    ट्रांजिट परमिट की आवश्यकता होती थी,लेकिन राज्य सरकार ने इसकी अनिवार्यता समाप्त कर दी है । ट्रांजिट परमिट के अभाव में वन औषधी का उपयोग करने अथवा व्यापार करने वाले व्यक्ति को सजा का प्रावधान था । इसके साथ ही आयुष एवं मेडिकल कम्पनियों के माध्यम से वन औषधियों की बिक्री करवाई  जाएगी । इसका सीधा लाभ आदिवासियों को मिलेगा ।

उन्होंने बताया कि कुछ समय पूर्व एक जानकारी में सामने आया कि जंगलों में पैदा होने वाली अधिकांश वन उपज जंगलों में ही नष्ट होती रही है ।उन्होंने दावा किया कि अब यह वन उपज मार्केट में आएगी और आदिवासियों को इसका लाभ भी मिलेगा । सैनी ने दावा किया कि उदयपुर का वन उपज मार्केट देश का पहला ऐसा मार्केट है जहां मात्र वन औषधी ही  मिलेगी ।

Posted By: Preeti jha

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