जयपुर, जागरण संवाददाता। Transfer policy. राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार मंत्रियों और अधिकारियों का तबादला उद्योग बंद करने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्देश पर अब तबादला नीति बनाई जा रही है। इस नीति के तहत किसी भी सरकारी कर्मचारी का दो साल पहले एक स्थान से दूसरे स्थान पर तबादला नहीं होगा। इसके साथ ही सरकारी कर्मचारियों को तबादले के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा, जिस कर्मचारी का पोर्टल पर आवेदन मिलेगा उस पर ही विचार किया जाएगा। इससे मंत्रियों और अधिकारियों के घर एवं दफ्तर में आवेदन लेकर कर्मचारियों की लगने वाली भीड़ खत्म हो जाएगी।

तबादला नीति लागू कर एक तरफ तो सरकार मंत्रियों एवं अधिकारियों को एक सीमा में बांधने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी तरफ भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगाने का प्रयास किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश, गुजरात, हरियाणा और पंजाब में पहले से ही सरकारी कर्मचारियों की तबादला नीति बनी हुई है। अब राजस्थान में भी इसी तरह की तबादला नीति बनाने की तैयारी है। मुख्य सचिव डीबी गुप्ता तबादला नीति बनाने को लेकर कसरत में जुटे हैं।

25 हजार सरकारी कर्मचारियों के हुए तबादले

सत्ता में आते ही कांग्रेस विधायकों एवं नेताओं के दबाव के चलते करीब 25 हजार सरकारी कर्मचारियों के तबादले किए गए थे। तबादलों के इस दौर में कई स्कूल और अस्पताल तो ऐसे हो गए जहां जरूरत से अधिक शिक्षक एवं चिकित्सक लगा दिए गए। वहीं, कई स्कूल और अस्तालों में एक भी शिक्षक एवं चिकित्सक नहीं रहा। तबादलों का कई स्थानों पर विरोध भी हुआ,भ्रष्टाचार की शिकायतें भी मुख्यमंत्री तक पहुंची। कोटा, बारां, पुष्कर, हनुमानगढ़, जयपुर, दौसा, टोंक, जोधपुर और बीकानेर में तबादलों का जोरदार विरोध हुआ था। लोग सड़कों पर उतरे थे। शिक्षकों के तबादलों के विरोध में तो कई स्कूलों पर छात्र-छात्राओं ने ही तालेबंदी कर दी थी।

उल्लेखनीय है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने साल 2014 में सरकारी कर्मचारियों के तबादलों की नीति बनाने को लेकर सरकार को आदेश दिए थे, लेकिन अब तक इसे टाला जाता रहा। अब सीएम गहलोत के निर्देश पर तबादलों में पारदर्शिता के लिए नीति बनाई जा रही है। सीएम अगले कुछ दिनों में नीति के प्रारूप को मंजूरी देंगे।

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Posted By: Sachin Mishra

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